ट्रंप का भारत पर टैरिफ प्लान: व्यापार और अर्थव्यवस्था पर असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत को वैश्विक सुर्खियों में ला दिया है। 2025 के चुनावों में जीत की स्थिति में, ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर नए टैरिफ (शुल्क) लगाने का प्रस्ताव रखा है।

एक चुनावी रैली के दौरान इस घोषणा ने भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों पर एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। इसे ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” (Global US-Indian Tariff Trade War) नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वे अन्य देशों के तथाकथित “अनुचित व्यापार व्यवहार” को रोकना चाहते हैं।
टैरिफ क्या हैं और अब इनकी अहमियत क्यों बढ़ी है?
टैरिफ वह कर होता है जो एक देश, दूसरे देश से आयातित वस्तुओं पर लगाता है। ट्रंप का कहना है कि भारत, चीन और मैक्सिको जैसे देश अमेरिका से अनुचित लाभ ले रहे हैं और इससे अमेरिका का व्यापार घाटा बढ़ता है।
2016-2020 के कार्यकाल में ट्रंप ने GSP (Generalized System of Preferences) के तहत भारत को दिए गए व्यापारिक लाभ समाप्त कर दिए थे, जिससे भारत के $5 बिलियन से अधिक के निर्यात प्रभावित हुए थे।
अब फिर से ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र और दवाओं के भारतीय निर्यात को वह अमेरिकी श्रमिकों और कंपनियों के लिए खतरा मानते हैं।
किन भारतीय क्षेत्रों पर पड़ेगा असर?
यदि ट्रंप का नया टैरिफ प्लान लागू होता है, तो निम्नलिखित उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं:
- फार्मास्युटिकल्स: अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का बड़ा हिस्सा भारत से आता है।
- वस्त्र एवं परिधान उद्योग: कम लागत के कारण अमेरिका में लोकप्रिय।
- आईटी सेवाएं: भले ही भौतिक उत्पाद नहीं हैं, लेकिन वीज़ा और प्रतिबंधों पर असर संभव।
- ऑटो पार्ट्स और मशीनरी: भारत का यह उभरता निर्यात क्षेत्र भी निशाने पर हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे और मंझोले निर्यातकों को तात्कालिक झटका लग सकता है।
भारत की संभावित रणनीति
भारत अब तक व्यापार विवादों पर संयमित रवैया अपनाता रहा है।
पहले भी ट्रंप की टैरिफ नीति के जवाब में भारत ने अमेरिका के 28 उत्पादों पर शुल्क लगाया था।
इस बार भारत सरकार दोहरी रणनीति अपना सकती है:
- कूटनीतिक वार्ता: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों से बातचीत।
- विविधीकरण: यूरोप, दक्षिण-पूर्व एशिया और अन्य उभरते बाजारों से व्यापार बढ़ाना।
हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय ने अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है,
लेकिन सूत्रों का मानना है कि पर्दे के पीछे बातचीत शुरू हो चुकी है।
वैश्विक बाजारों और निवेशकों की चिंता
इस खबर से वैश्विक शेयर बाजारों में सतर्कता देखी गई है।
रुपये में हल्की गिरावट और निर्यातक कंपनियों के शेयरों में दबाव आया है।
अमेरिकी व्यापार समूहों ने भी चिंता जताई है, क्योंकि भारतीय उत्पाद सस्ते और गुणवत्तापूर्ण होते हैं।
टैरिफ से अमेरिकी ग्राहकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस तरह की संरक्षणवादी नीतियां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बिगाड़ सकती हैं, अमेरिकी महंगाई बढ़ा सकती हैं, और भारत-अमेरिका संबंधों में खटास ला सकती हैं।
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विशेषज्ञों की राय
- डॉ. अंजलि मेहरा, व्यापार विश्लेषक:
“ट्रंप की टैरिफ धमकियां नई नहीं हैं, लेकिन अस्थिरता ज़रूर लाती हैं। भारत को ठंडे दिमाग से रणनीति बनानी होगी।” - डेविड गेलर, अमेरिकी ट्रेड लॉबिस्ट:
“भारत पर टैरिफ लगाना अमेरिकी उपभोक्ताओं को ही नुकसान देगा। उत्पाद महंगे होंगे और नुकसान सबका होगा।”
ट्रंप की व्यापार नीति फिर से दुनिया भर में हलचल मचा रही है।
भारत को इस टैरिफ के खतरे से डरने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि उसने पहले भी ऐसे झटके झेले हैं।
अब भारत के पास मजबूत अर्थव्यवस्था, डिजिटल ताकत और वैश्विक साझेदारियाँ हैं,
जिससे वह ऐसी चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकता है।
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