Wipro और IISc की ड्राइवरलेस कार: AI और 5G तकनीक से भारत की स्मार्ट मोबिलिटी में बड़ा कदम
भारत ने परिवहन के भविष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। देश की प्रमुख आईटी कंपनी Wipro Limited और Indian Institute of Science (IISc) बेंगलुरु ने मिलकर एक ऐसी ड्राइवरलेस कार तैयार की है जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और 5G तकनीक पर आधारित है।

यह उपलब्धि न केवल तकनीकी दृष्टि से बड़ी है, बल्कि यह भारत के अकादमिक और औद्योगिक सहयोग का एक बेहतरीन उदाहरण भी है।
नवाचार में अनोखी साझेदारी
Wipro और IISc की ड्राइवरलेस कार प्रोजेक्ट ने भारत की दो सबसे बड़ी ताकतों — शोध और औद्योगिक इंजीनियरिंग — को एक साथ जोड़ा है।
इस प्रोजेक्ट पर पिछले कुछ वर्षों से काम चल रहा था, जिसमें AI आधारित निर्णय प्रणाली, कंप्यूटर विज़न और रियल-टाइम 5G कनेक्टिविटी को जोड़ा गया।
इस ड्राइवरलेस कार में LiDAR, रडार और हाई-डेफिनिशन कैमरों सहित कई सेंसर लगे हैं जो रीयल टाइम में बाधाओं को पहचानते हैं, सिग्नलों को पढ़ते हैं और सबसे सुरक्षित मार्ग तय करते हैं।
IISc की मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स लैब्स ने ऐसे एल्गोरिदम तैयार किए हैं जो कार को स्वयं निर्णय लेने की क्षमता देते हैं, जबकि Wipro ने 5G आधारित सुरक्षित डेटा ट्रांसफर, क्लाउड और साइबर सुरक्षा पर काम किया है।
AI और 5G तकनीक से बन रही है स्मार्ट ड्राइविंग
- ड्राइवरलेस सिस्टम तीन परतों में काम करता है — परसेप्शन, डिसीजन और कंट्रोल।
- परसेप्शन लेयर कैमरों और सेंसरों से वातावरण का नक्शा तैयार करती है।
- डिसीजन लेयर AI मॉडल के जरिए ट्रैफिक और पैदल यात्रियों की गतिविधियों का अनुमान लगाती है।
- कंट्रोल लेयर स्टीयरिंग, ब्रेक और एक्सीलेरेशन को संभालकर वास्तविक ड्राइविंग करती है।
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी ताकत 5G तकनीक है, जो कार, क्लाउड सर्वर और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच तत्काल डेटा ट्रांसफर को संभव बनाती है।
इससे कार को ट्रैफिक या मौसम के अचानक बदलावों के अनुसार तुरंत निर्णय लेने की क्षमता मिलती है।
5G तकनीक के जरिए V2V (Vehicle-to-Vehicle) और V2I (Vehicle-to-Infrastructure) कनेक्टिविटी भी संभव होती है, जिससे सड़कें अधिक सुरक्षित और कुशल बनेंगी।
परीक्षण और प्रारंभिक प्रदर्शन
IISc के स्मार्ट मोबिलिटी टेस्टिंग ग्राउंड पर इस कार का पहला ट्रायल सफल रहा।
यह ड्राइवरलेस कार सिम्युलेटेड शहर में ट्रैफिक सिग्नलों का पालन करती हुई, पैदल यात्रियों को पहचानकर, और अन्य वाहनों से दूरी बनाए रखते हुए सुचारू रूप से चली। अब अगला चरण बेंगलुरु के नियंत्रित सार्वजनिक क्षेत्रों में परीक्षण का है, जहाँ यह कार वास्तविक भारतीय ट्रैफिक स्थितियों में अपनी क्षमता दिखाएगी।
इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य एक ऐसा AI आधारित स्वचालित परिवहन तंत्र तैयार करना है
जो 5G नेटवर्क के साथ मिलकर शहरों में यात्रा को स्मार्ट और सुरक्षित बनाए।
भारत की तकनीकी दिशा में बड़ा बदलाव
Wipro और IISc की ड्राइवरलेस कार यह दर्शाती है कि भारत अब वैश्विक ऑटोमेशन रेस में शामिल हो चुका है।
अमेरिका, जापान और जर्मनी जैसे देशों ने पहले ही स्वचालित वाहनों को अपनाया है,
भारत का यह स्वदेशी कदम यह साबित करता है कि देश अब डीप टेक इनोवेशन में आत्मनिर्भर बन रहा है।
आने वाले दशक में यह तकनीक भारत की लॉजिस्टिक्स, सार्वजनिक परिवहन और आपातकालीन सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
स्वदेशी तकनीक से बनी ये कारें न केवल ट्रैफिक जाम को कम करेंगी बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी लाएंगी।
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स्मार्ट मोबिलिटी की ओर भारत का कदम
Wipro और IISc का यह सहयोग भारत में स्मार्ट ट्रांसपोर्टेशन की नई परिभाषा गढ़ रहा है।
यह ड्राइवरलेस कार प्रोजेक्ट इस बात का प्रमाण है कि जब अकादमिक और इंडस्ट्री एकजुट होकर काम करते हैं,
तो तकनीक समाज के लिए वास्तविक परिवर्तन ला सकती है।
भविष्य में, जब पूरी तरह स्वचालित वाहन भारतीय सड़कों पर उतरेंगे, तब यह प्रोजेक्ट उस परिवर्तन की नींव के रूप में याद किया जाएगा — जहाँ AI, 5G और नवाचार मिलकर भारत की यात्रा को सुरक्षित, बुद्धिमान और पर्यावरण के अनुकूल बना रहे हैं।
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