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NISAR उपग्रह तकनीकी विशेषताएं: भारत-अमेरिका का क्रांतिकारी पृथ्वी निगरानी मिशन

नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (NISAR) उपग्रह का सफल प्रक्षेपण और तैनाती अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग और पृथ्वी अवलोकन प्रौद्योगिकी में एक अभूतपूर्व मील का पत्थर है। 30 जुलाई 2025 को भारत के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित इस 1.5 बिलियन डॉलर के संयुक्त मिशन ने अब तक का सबसे परिष्कृत पृथ्वी निगरानी सिस्टम तैयार किया है।

NISAR उपग्रह तकनीकी विशेषताएं

अंतरिक्ष में तकनीकी चमत्कार

NISAR उपग्रह तकनीकी विशेषताएं इसे दुनिया का सबसे महंगा नागरिक पृथ्वी-इमेजिंग उपग्रह बनाती हैं।

2,392 किलोग्राम वजन के साथ, यह अभूतपूर्व दोहरी-आवृत्ति रडार क्षमताओं से सुसज्जित है।

उपग्रह में नासा का L-बैंड और इसरो का S-बैंड सिंथेटिक एपर्चर रडार सिस्टम दोनों शामिल हैं,

जो इसे 12-मीटर तैनात करने योग्य मेश रिफ्लेक्टर एंटीना के साथ दोहरी-आवृत्ति SAR तकनीक का उपयोग करके पृथ्वी का अवलोकन करने वाला पहला उपग्रह बनाता है।

15 अगस्त 2025 को उपग्रह की तैनाती प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हुई जब मिशन नियंत्रकों ने एक जटिल 37-मिनट की ऑपरेशन में 12-मीटर रडार रिफ्लेक्टर को खोला। यह एंटीना, अंतरिक्ष में तैनात किए गए सबसे बड़े एंटीनाओं में से एक, NISAR को 242-किलोमीटर स्वाथ के साथ संपूर्ण ग्लोब को स्कैन करने और 12-दिन के अंतराल पर उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा प्रदान करने में सक्षम बनाता है।


व्यापक पृथ्वी निगरानी क्षमताएं

NISAR उपग्रह तकनीकी विशेषताएं इसके उन्नत रडार इमेजिंग सिस्टम को उल्लेखनीय सटीकता के साथ पृथ्वी की भूमि और बर्फ की सतहों का मानचित्रण करने में सक्षम बनाती हैं, जो एक सेंटीमीटर तक की सतह परिवर्तन का पता लगा सकती है। उपग्रह सभी मौसम स्थितियों में संचालित होता है, पूरे ग्रह में दिन और रात दोनों समय डेटा कवरेज प्रदान करता है।

यह क्षमता इसे निम्नलिखित के लिए अमूल्य बनाती है:

  • प्राकृतिक आपदा पूर्वानुमान और प्रतिक्रिया
  • बर्फ की चादरों और ग्लेशियरों पर जलवायु परिवर्तन प्रभाव
  • पारिस्थितिकी तंत्र की गड़बड़ी और वनस्पति गतिशीलता
  • भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधि से भूमि विकृति
  • मिट्टी की नमी के स्तर और कृषि निगरानी

आपदा प्रबंधन के लिए क्रांतिकारी अनुप्रयोग

NISAR के सबसे महत्वपूर्ण योगदानों में से एक आपदा पूर्वानुमान और प्रबंधन में निहित है। उपग्रह भूस्खलन की भविष्यवाणी करने, ग्लेशियर गतिविधियों की निगरानी करने, संभावित बादल फटने का आकलन करने और अन्य प्राकृतिक घटनाओं को ट्रैक करने में मदद कर सकता है जो हिमालय जैसे पहाड़ी क्षेत्रों को तेजी से प्रभावित कर रही हैं।

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वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग

NISAR मिशन ISRO और NASA टीमों के बीच एक दशक से अधिक के तकनीकी सहयोग का प्रतिनिधित्व करता है। साझेदारी समझौते के तहत, NASA ने L-बैंड सिंथेटिक एपर्चर रडार, उच्च-दर दूरसंचार प्रणाली, GPS रिसीवर और ठोस-स्थिति रिकॉर्डर प्रदान किए। ISRO ने उपग्रह बस, S-बैंड रडार सिस्टम, प्रक्षेपण यान और संबंधित सेवाएं योगदान दीं।

NISAR द्वारा एकत्रित सभी डेटा एक से दो दिनों के भीतर वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए निःशुल्क उपलब्ध होगा।

इस उन्नत तकनीक के लाभ दुनियाभर के शोधकर्ताओं और आपदा प्रबंधन एजेंसियों तक पहुंचें।

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