Home / Technology / India’s Robodog: चीन नहीं, भारत बना रहा है रोबोडॉग

India’s Robodog: चीन नहीं, भारत बना रहा है रोबोडॉग

तकनीक की दुनिया में एक नई दौड़ शुरू हो चुकी है—रोबोटिक सिस्टम्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़। अब तक रोबोडॉग का नाम आते ही लोगों के मन में चीन या अमेरिका की तस्वीर उभरती थी, लेकिन अब भारत भी इस क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। भारत का रोबोडॉग न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

India’s Robodog क्या है?

रोबोडॉग एक चार पैरों वाला रोबोटिक सिस्टम है, जो असली कुत्ते की तरह चलफिर सकता है, सीढ़ियां चढ़ सकता है और कठिन इलाकों में संतुलन बनाए रख सकता है। यह रोबोट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेंसर और कैमरों से लैस होता है। इसका मुख्य उद्देश्य निगरानी, सुरक्षा और जोखिम भरे इलाकों में काम करना है, जहां इंसानों के लिए जाना खतरनाक हो सकता है।


भारत की तकनीकी छलांग

भारत में रक्षा और अनुसंधान क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाएं, जैसे डीआरडीओ, स्वदेशी तकनीक विकसित करने पर जोर दे रही हैं। रोबोडॉग इसी दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। यह पूरी तरह भारतीय जरूरतों और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है।


India’s Robodog क्या-क्या कर सकता है?

भारत का रोबोडॉग कई उन्नत क्षमताओं से लैस हो सकता है:

  • निगरानी और गश्त: सीमावर्ती इलाकों, सैन्य अड्डों और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर सकता है।
  • खतरनाक इलाकों में प्रवेश: बम निरोधक अभियानों या आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जहां मानव जीवन को खतरा हो, वहां यह काम कर सकता है।
  • रात में काम करने की क्षमता: नाइट विजन कैमरों की मदद से अंधेरे में भी निगरानी संभव है।
  • रीयल-टाइम डेटा ट्रांसमिशन: लाइव वीडियो और जानकारी कंट्रोल रूम तक भेज सकता है।
  • स्वचालित नेविगेशन: AI आधारित सिस्टम से बाधाओं को पहचानकर रास्ता बदल सकता है।

सुरक्षा बलों के लिए गेम-चेंजर

भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों के लिए यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। दुर्गम पहाड़ी इलाकों, जंगलों या शहरी ऑपरेशनों में रोबोडॉग सैनिकों की मदद कर सकता है। इससे मानव हताहतों का खतरा कम होगा और ऑपरेशन अधिक सटीक और सुरक्षित होंगे।


चीन और अमेरिका से मुकाबला

अब तक चीन और अमेरिका रोबोटिक डॉग तकनीक में आगे रहे हैं। लेकिन भारत का इस क्षेत्र में प्रवेश यह संकेत देता है कि देश हाईटेक रक्षा प्रणालियों में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसी पहलें इस विकास को मजबूती दे रही हैं।


नागरिक क्षेत्रों में भी उपयोग

रोबोडॉग का इस्तेमाल केवल रक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में इसे आपदा राहत,

औद्योगिक निरीक्षण, खनन क्षेत्रों और यहां तक कि स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में भी उपयोग किया जा सकता है।

इससे सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।

ये भी पढ़ें: Varaha avatar: जल की खोज पर नया दृष्टिकोण


भविष्य की ओर कदम

भारत का रोबोडॉग केवल एक मशीन नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मविश्वास का प्रतीक है।

यह दिखाता है कि देश अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता भी बन रहा है।

आने वाले वर्षों में अगर इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन और तैनाती होती है,

तो भारत वैश्विक रोबोटिक्स बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।

khaberbox.com पर पढ़ें ताजा समाचार (हिंदी समाचार), मनोरंजन, खेल, क्रिकेट, राजनीति, धर्म, शिक्षा, बाज़ार और प्रौद्योगिकी से जुड़ी हर खबर। समय पर अपडेट या हिंदी ब्रेकिंग न्यूज के लिए खबर बॉक्स चुनें। अपने समाचार अनुभव को और बेहतर बनाएं।