गुजरात का विश्व का सबसे बड़ा सोलर पार्क: स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भारत की बड़ी छलांग
गुजरात ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है।
राज्य में गुजरात का विश्व का सबसे बड़ा सोलर पार्क बनकर तैयार हुआ है, जिसकी क्षमता 30 गीगावाट (GW) है। यह विशाल सोलर पार्क लगभग 2 करोड़ घरों को बिजली प्रदान करने में सक्षम होगा।

यह परियोजना न केवल भारत की स्वच्छ ऊर्जा क्रांति को नई दिशा दे रही है, बल्कि गुजरात को “सन सिटी” के नाम से भी नई पहचान दिला रही है।
दुनिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना
यह सोलर पार्क कच्छ के रेगिस्तानी क्षेत्र में 70,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर बनाया गया है।
यह क्षेत्र अब चमकती हुई सौर पैनलों की भूमि में बदल गया है, जो हर तरफ स्वच्छ बिजली का नज़ारा पेश करता है।
इस परियोजना में सोलर फोटovoltaic (PV) और सोलर थर्मल दोनों तकनीकों का उपयोग किया गया है,
साथ ही ऊर्जा संग्रहण के लिए बैटरी सिस्टम भी शामिल है ताकि दिन-रात बिजली की आपूर्ति बनी रहे।
परियोजना के पूरा होने पर यह हर साल लगभग 5 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन को रोक सकेगी
— जो एक अरब पेड़ लगाने या 1 करोड़ वाहनों को सड़कों से हटाने के बराबर है।
गुजरात: स्वच्छ ऊर्जा की राजधानी
गुजरात पिछले एक दशक से भारत की अक्षय ऊर्जा क्रांति का नेतृत्व कर रहा है।
2012 में चारंका सोलर पार्क से लेकर 2025 की इस रिकॉर्ड परियोजना तक, राज्य ने लगातार नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। गुजरात अक्षय ऊर्जा नीति 2023–2028 के तहत राज्य का लक्ष्य है कि 2030 तक अपनी कुल बिजली क्षमता का 50% अक्षय स्रोतों से प्राप्त करे।
राज्य सरकार ने ReNew Power और Adani Green Energy जैसी बड़ी कंपनियों के साथ मिलकर इस दिशा में तेजी लाई है।
भूमि आवंटन, स्मार्ट ग्रिड और ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार से गुजरात अब अन्य राज्यों और देशों के लिए एक आदर्श मॉडल बन चुका है।
2 करोड़ घरों को ऊर्जा की रोशनी
यह सोलर पार्क 30 GW बिजली उत्पन्न करने की क्षमता रखता है,
जिससे करीब 2 करोड़ घरों को बिजली मिल सकेगी।
इससे यह सुनिश्चित होता है कि बिजली हमेशा उपलब्ध रहे — चाहे सूर्यास्त ही क्यों न हो।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह परियोजना भारत की कुल बिजली आवश्यकताओं का लगभग 15% अक्षय स्रोतों से पूरी कर सकती है। यह भारत के 2030 तक 500 GW अक्षय क्षमता हासिल करने के लक्ष्य में अहम भूमिका निभाएगी।
आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन
पर्यावरणीय सफलता के साथ यह परियोजना आर्थिक रूप से भी बहुत फायदेमंद साबित हुई है —
- रोज़गार में वृद्धि: निर्माण के दौरान 2 लाख से अधिक नौकरियां सृजित हुईं, और हज़ारों नई नौकरियां रखरखाव व अनुसंधान में बनी रहेंगी।
- ग्रामीण विकास: बेहतर सड़कें, बुनियादी ढाँचा और छोटे उद्योगों का विकास हुआ है।
- विदेशी निवेश में उछाल: अरबों डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया, जिससे गुजरात “ग्रीन एनर्जी हॉटस्पॉट” बन गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सोलर पार्क भारत को हर साल लगभग ₹1,20,000 करोड़ की जीवाश्म ईंधन आयात बचत दिला सकता है।
“सन सिटी” का नया अर्थ
गुजरात अब “सन सिटी” के रूप में जाना जा रहा है।
जहां कभी उद्योग और व्यापार की पहचान थी, अब वही क्षेत्र भारत की ऊर्जा क्रांति का प्रतीक बन चुका है।
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यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “2070 तक नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन” के लक्ष्य के अनुरूप है।
परियोजना में अत्याधुनिक तकनीक जैसे बिफेशियल सोलर पैनल, फ्लोटिंग सोलर फार्म और हाइड्रोजन-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं, जिससे यह सिर्फ एक सोलर पार्क नहीं, बल्कि आने वाले समय की ऊर्जा का प्रतीक है।
उज्जवल कल की ओर
यह सिद्ध करता है कि टिकाऊ ऊर्जा केवल भविष्य का सपना नहीं, बल्कि आज की सच्चाई है।
गुजरात का विश्व का सबसे बड़ा सोलर पार्क यह संदेश देता है
कि भारत अब न सिर्फ ऊर्जा का उपभोक्ता है, बल्कि विश्व का अग्रणी नवप्रवर्तक भी बन रहा है।
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