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Artificial Intelligence Water Consumption: क्या AI रोज़ इंसानों से ज़्यादा पानी पी रहा है?

आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI हमारे जीवन का हिस्सा बन चुका है। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, ऑनलाइन शॉपिंग, नेविगेशन, हेल्थकेयर – हर जगह AI मौजूद है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह तकनीक, जो हमें “डिजिटल” लगती है, असल दुनिया के संसाधनों पर कितना बोझ डाल रही है? हाल के शोध और रिपोर्ट्स ने एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने रखी है – AI सिस्टम हर दिन लाखों लीटर पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं, और कई मामलों में यह खपत इंसानों की रोज़मर्रा की जरूरतों से भी ज्यादा हो सकती है।

Artificial Intelligence water consumption

Artificial Intelligence Water Consumption: AI पानी क्यों इस्तेमाल करता है?

अक्सर लोग सोचते हैं कि AI सिर्फ कोड और इंटरनेट पर चलता है, लेकिन हकीकत यह है कि AI के पीछे विशाल डेटा सेंटर्स काम करते हैं। इन्हीं डेटा सेंटर्स की वजह से पानी की खपत होती है।

1. डेटा सेंटर्स को ठंडा रखने के लिए

AI मॉडल चलाने के लिए हजारों सर्वर लगातार काम करते हैं। ये सर्वर बहुत ज्यादा गर्मी पैदा करते हैं।
इस गर्मी को नियंत्रित करने के लिए:

  • वॉटर कूलिंग सिस्टम
  • इवापोरेटिव कूलिंग
  • कूलिंग टावर

का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें भारी मात्रा में पानी खर्च होता है।

2. AI मॉडल ट्रेनिंग में ज्यादा संसाधन

जब बड़े AI मॉडल (जैसे चैटबॉट, इमेज जनरेशन सिस्टम) को ट्रेन किया जाता है, तो वे हफ्तों या महीनों तक सुपरकंप्यूटर पर चलते हैं। इस दौरान:

  • बिजली की खपत बढ़ती है
  • सर्वर का तापमान बढ़ता है
  • और पानी की जरूरत कई गुना बढ़ जाती है

कितना पानी खर्च होता है?

रिसर्च के अनुसार:

  • एक बड़ा AI डेटा सेंटर दिन में लाखों लीटर पानी इस्तेमाल कर सकता है
  • कुछ AI क्वेरी या मॉडल ट्रेनिंग से सैकड़ों मिलीलीटर पानी अप्रत्यक्ष रूप से खर्च हो सकता है
  • यह पानी सीधे “पीया” नहीं जाता, लेकिन कूलिंग प्रक्रिया में भाप बनकर उड़ जाता है

यानी जब आप AI से एक सवाल पूछते हैं, तो कहीं न कहीं पानी की खपत भी होती है—यह बात आम यूज़र को पता ही नहीं होती।


इंसानों और AI की तुलना क्यों चौंकाने वाली है?

एक औसत इंसान रोज़:

  • पीने
  • खाना बनाने
  • नहाने

में पानी का इस्तेमाल करता है। लेकिन जब हजारों AI सर्वर एक साथ चलते हैं, तो उनकी सामूहिक जल-खपत कई बार छोटे शहरों के बराबर हो जाती है।

इसलिए कुछ विशेषज्ञ यह कहने लगे हैं कि
“AI डिजिटल है, लेकिन उसका असर पूरी तरह भौतिक है।”


Artificial Intelligence Water Consumption: पानी संकट वाले इलाकों में खतरा ज्यादा

यह समस्या तब और गंभीर हो जाती है, जब डेटा सेंटर्स:

  • पानी की कमी वाले क्षेत्रों में बनाए जाते हैं
  • भूजल पर निर्भर होते हैं

कुछ देशों और शहरों में स्थानीय लोगों ने शिकायत की है कि डेटा सेंटर्स की वजह से:

  • जल स्तर गिर रहा है
  • किसानों और आम लोगों को पानी की दिक्कत हो रही है

क्या AI विकास रोकना समाधान है?

नहीं। AI को रोकना न संभव है, न जरूरी। लेकिन सवाल यह है कि क्या इसे जिम्मेदारी से विकसित किया जा रहा है?

विशेषज्ञ कुछ समाधान सुझाते हैं:

  • पानी-कुशल कूलिंग तकनीक
  • समुद्री जल या रिसाइकल्ड पानी का उपयोग
  • ठंडे इलाकों में डेटा सेंटर्स स्थापित करना
  • AI मॉडल को ऊर्जा और संसाधन-कुशल बनाना

यूज़र के रूप में हमारी क्या जिम्मेदारी है?

हम भले सीधे डेटा सेंटर न चलाते हों, लेकिन:

  • जरूरत से ज्यादा AI टूल्स का इस्तेमाल
  • अनावश्यक जनरेशन और ट्रायल
  • “फ्री है तो चलाओ” वाली मानसिकता

भी संसाधनों पर दबाव बढ़ाती है।

जैसे बिजली और पानी बचाने की आदत डाली जाती है, वैसे ही डिजिटल संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल की भी जरूरत है।

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भविष्य का सवाल

AI मानवता के लिए वरदान है, लेकिन अगर इसकी कीमत:

  • पर्यावरण
  • पानी
  • प्राकृतिक संसाधन

चुकाएं, तो यह लाभ अधूरा रह जाएगा।

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