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AI जो दिमाग पढ़ सकता है: क्या अब विचार सीधे कंप्यूटर में लिखे जाएंगे ?

यह सुनने में साइंस फिक्शन जैसा लग सकता है कि एक AI जो दिमाग पढ़ सकता है और आपके विचारों को सीधे कंप्यूटर में लिख सकता है, लेकिन ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) और AI में हुई प्रगति ने इसे हकीकत के और करीब ला दिया है। यह तकनीक इंसान और मशीन के बीच की दूरी लगभग खत्म कर रही है। अब पोर्टेबल कैप्स ब्रेनवेव्स को टेक्स्ट में बदल सकती हैं, और न्यूरल इम्प्लांट्स आपके सोचे गए शब्दों को डिकोड कर सकते हैं।

AI जो दिमाग पढ़ सकता है

AI जो दिमाग पढ़ सकता है कैसे काम करता है?

इस तकनीक का मूल आधार है — ब्रेन एक्टिविटी रिकॉर्डिंग और शक्तिशाली AI मॉडल्स का संयोजन।
सबसे आम नॉन-इनवेसिव तरीका है EEG कैप्स का उपयोग। इन कैप्स में सेंसर होते हैं जो मस्तिष्क से निकलने वाले इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स को पकड़ते हैं।

इसके बाद, डीप न्यूरल नेटवर्क्स और बड़े भाषा मॉडल इन सिग्नल्स को समझकर शब्दों या वाक्यों में बदल देते हैं।

कुछ आधुनिक डिवाइसेस बिना आवाज़ के केवल सोचे गए शब्दों को पहचान सकती हैं।

यह तकनीक उन लोगों के लिए वरदान है जो बोल नहीं सकते या शारीरिक रूप से अक्षम हैं।

पहले जो काम आई-ट्रैकिंग या अक्षर चुनने वाले टूल्स करते थे, अब AI जो दिमाग पढ़ सकता है

बहुत अधिक सटीकता से कर रहा है।


वास्तविक परिणाम और सीमाएँ

हाल के प्रयोगों में पाया गया कि AI जो दिमाग पढ़ सकता है लगभग 75% सटीकता के साथ विचारों को टेक्स्ट में बदल सकता है।
यह तकनीक दो तरह के AI का उपयोग करती है —

  1. एक न्यूरल नेटवर्क जो कच्चे EEG सिग्नल्स को डिकोड करता है।
  2. दूसरा उन्नत भाषा मॉडल जो परिणामों को सुधारता है।

क्लिनिकल परीक्षणों में यह भी देखा गया है कि ब्रेन इम्प्लांट्स पैरालिसिस वाले व्यक्तियों को बोलने या लिखने की क्षमता दे रहे हैं। हालांकि, फिलहाल यह तकनीक सीमित शब्दावली तक ही सीमित है और जटिल विचारों को पूरी तरह पकड़ने में सक्षम नहीं है।


मानसिक गोपनीयता की सुरक्षा

दिमाग और मशीन को जोड़ने वाली यह तकनीक नैतिक और गोपनीयता से जुड़ी बड़ी चिंताएँ उठाती है।

क्या कोई आपकी अनुमति के बिना आपके विचार पढ़ सकता है?

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इससे निपटने के लिए कुछ वैज्ञानिकों ने “मेंटल पासवर्ड्स” का विचार दिया है — यानी सिस्टम तभी सक्रिय होगा जब उपयोगकर्ता एक विशेष शब्द के बारे में सोचेंगे। यह सुनिश्चित करता है कि डेटा डिकोडिंग केवल उपयोगकर्ता की अनुमति से हो।


अन्य उपयोग और भविष्य की दिशा

यह तकनीक सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है।

यह कंटेंट क्रिएशन, गेमिंग, कंप्यूटर कंट्रोल और आइडिया जेनरेशन के तरीकों को भी बदल सकती है।

कल्पना कीजिए — केवल सोचकर ईमेल लिखना, संदेश भेजना या स्मार्ट होम डिवाइस कंट्रोल करना संभव होगा।

हालांकि वैज्ञानिक मानते हैं कि बायोमेट्रिक डेटा के उपयोग से पहले जनता के बीच नैतिकता, सहमति और डेटा सुरक्षा पर चर्चा जरूरी है।


अब यह कल्पना नहीं, बल्कि सच्चाई बनती जा रही है कि AI जो दिमाग पढ़ सकता है और विचारों को कंप्यूटर पर लिख सकता है।
न्यूरोसाइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की प्रगति से यह तकनीक हमारे संवाद, कार्य और जानकारी तक पहुँचने के तरीके को पूरी तरह बदल देगी।

इसके साथ ही, यह मानसिक गोपनीयता और डिजिटल युग में नैतिक सीमाओं पर नए प्रश्न भी खड़े करती है।

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