AI Poisoning क्या है? यह कैसे बदल रहा है AI मॉडल्स का “दिमाग”
AI Poisoning (या डेटा पॉइज़निंग) एक उभरता हुआ खतरा है, जिसमें हैकर्स जानबूझकर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के ट्रेनिंग डेटा या एल्गोरिद्म को दूषित कर देते हैं। इससे AI गलत, पक्षपाती या खतरनाक परिणाम देने लगता है।

इसे ऐसे समझिए — जैसे कोई छात्र की नोटबुक में नकली पन्ने डाल दे, और फिर वही छात्र आत्मविश्वास से गलत जवाब देने लगे। यही AI Poisoning का असर है।
AI Poisoning कैसे होता है?
AI Poisoning हमले ज़्यादातर AI के “ट्रेनिंग फेज़” में होते हैं:
- डेटा में छेड़छाड़: हैकर्स झूठे या संशोधित डेटा को ट्रेनिंग सेट में मिला देते हैं। यह डेटा सामान्य लगता है, इसलिए आसानी से फिल्टर से गुजर जाता है।
- गलत सीखना: AI इस दूषित डेटा से सीखता है और गलत पैटर्न याद कर लेता है। समस्या तब तक नज़र नहीं आती जब तक कोई विशेष इनपुट उसे ट्रिगर न करे।
- आउटपुट बदलना या बैकडोर खोलना: इसके बाद मॉडल गलत क्लासिफिकेशन करने लगता है या किसी विशेष इनपुट पर हैकर को नियंत्रण दे देता है।
AI Poisoning कैसे बदलता है मॉडल्स का “दिमाग”?
AI का “दिमाग” यानी उसकी सीखी हुई यादें और कनेक्शन — इन्हीं पर हमला होता है।
- Targeted Attacks: इसमें कुछ खास इनपुट हमेशा गलत आउटपुट देते हैं। जैसे – किसी फेस रिकग्निशन सिस्टम को एक व्यक्ति को पहचानने से रोक देना।
- Non-Targeted Attacks: इसमें पूरा मॉडल कमजोर कर दिया जाता है ताकि उसकी एक्यूरेसी गिर जाए।
ऐसा AI बाहर से सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर छिपा “हाइजैक स्विच” किसी भी समय सक्रिय हो सकता है,
— जिससे मेडिकल, फाइनेंस या लीगल मॉडल्स तक ग़लत निर्णय दे सकते हैं।
AI Poisoning के आधुनिक रूप
अब हैकर्स और रिसर्चर्स, दोनों ही, ट्रेनिंग डेटा में बहुत चालाक तरीकों से बदलाव कर रहे हैं:
- Backdoor Attacks: डेटा में छिपे पैटर्न या शब्द डाल दिए जाते हैं जो बाद में मॉडल को गलत दिशा में ट्रिगर करते हैं।
- Clean Label Attacks: सही दिखने वाले डेटा पॉइंट्स में भी गुप्त छेड़छाड़ होती है।
- Label Flipping: जानबूझकर गलत लेबल लगाए जाते हैं ताकि मॉडल की समझ बिगड़ जाए।
- Model Poisoning: हैकर्स ट्रेनिंग के बाद मॉडल की आंतरिक सेटिंग्स में बदलाव करते हैं।
यह खतरा क्यों गंभीर है?
AI Poisoning एक “साइलेंट” और बेहद रणनीतिक साइबर हमला है।
जब AI हेल्थकेयर, लॉ, बिज़नेस या नेशनल सिक्योरिटी में उपयोग होता है,
— तब ऐसे दूषित मॉडल्स गलत इलाज, झूठे लेनदेन या संवेदनशील डेटा लीक का कारण बन सकते हैं।
यह न केवल तकनीकी नुकसान है, बल्कि विश्वास की नींव को भी हिला देता है।
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AI Poisoning से कैसे बचें?
- विश्वसनीय डेटा स्रोतों का उपयोग करें और डेटा को नियमित रूप से ऑडिट करें।
- मॉडल मॉनिटरिंग करें — अचानक आने वाले बायस या गलत आउटपुट पर नज़र रखें।
- एक्सेस कंट्रोल मजबूत करें ताकि केवल अधिकृत व्यक्ति ही डेटा या मॉडल को बदल सकें।
- बार-बार वैलिडेशन और रिट्रेनिंग करें ताकि मॉडल सुरक्षित और निष्पक्ष बना रहे।
संक्षेप में, AI Poisoning का मतलब है — किसी भी आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस सिस्टम को उसके ट्रेनिंग या लॉजिक स्तर पर “रीप्रोग्राम” कर देना।
जैसे-जैसे AI हमारे जीवन के हर हिस्से में शामिल हो रहा है, वैसे-वैसे AI Poisoning से सुरक्षा ज़रूरी बन गई है।
यह न केवल तकनीकी चुनौती है बल्कि एक डिजिटल नैतिक जिम्मेदारी भी है।
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