दुनिया में अब कितने बाघ बचे हैं? सौ साल की गिरावट और उम्मीद की कहानी।
एक ज़माने था, जब पूरी दुनिया में लगभग 1 लाख जंगली बाघ हुआ करते थे। यह आंकड़ा 1900 के शुरुआती दशक का है। आज, यानी 2025 में, यह संख्या गिरकर एक मामूली अंश तक सिमट चुकी है—सिर्फ 100 सालों में! बाघ एशिया की जंगलों के राजा थे, लेकिन अब वे विलुप्त होने की कगार पर खड़े हैं। सिर्फ पर्यावरण का हिस्सा होना ही उनकी अहमियत नहीं है—बाघ हमारी संस्कृति, जंगली प्रकृति के प्रतीक और पूरे इकोसिस्टम को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ये आर्टिकल दुनिया भर में बाघों की वर्तमान स्थिति, उन्हें बचाने वाली सरकारों, चल रहे संरक्षण प्रयासों और इस बात पर चर्चा करता है कि खबर बॉक्स के पाठकों के लिए हर बाघ क्यों मायने रखता है।

दुनिया में अब कितने बाघ बचे हैं?
सबसे ताज़ा अनुमान दिखाता है कि पूरी दुनिया में 5,500 से ज़्यादा जंगली बाघ बचे हैं।
यह आंकड़ा 2023 में ग्लोबल टाइगर फोरम के अनुमान (5,574) से थोड़ा अधिक है,
जिसकी चर्चा इंटरनेशनल टाइगर डे 2023 पर हुई थी। वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (WWF) और अन्य प्रमाणित स्रोत कभी-कभी इसे 4,000 के आसपास बताते हैं, लेकिन जुलाई 2025 तक, सरकारी सर्वे और ग्लोबल टाइगर फोरम जैसे आधिकारिक स्रोत 5,500 से ज़्यादा बाघ होने की पुष्टि करते हैं।
देशवार आंकड़े
- भारत में दुनिया के सबसे ज़्यादा जंगली बाघ हैं—करीब 3,000, यानी दुनिया के कुल बाघों का 75%।
- रूस, बांग्लादेश, भूटान, चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया, नेपाल, थाईलैंड, वियतनाम, लाओस और म्यांमार में भी बाघ हैं, लेकिन इन देशों में हर जगह इनकी संख्या सैकड़ों में या कुछ पाए जाते हैं, और कुछ जगहों पर ये बेहद दुर्लभ हो चुके हैं।
- कुछ उप-प्रजातियाँ, जैसे मलयाई बाघ (चीन, थाईलैंड, वियतनाम, लाओस, म्यांमार में), अब विलुप्त होने की कगार पर हैं—उनकी संख्या 200 से भी कम है।
संरक्षण में जीत और हार
भारत की जीत की कहानी
भारत में 2006 में बाघों की संख्या महज़ 1,400 के आसपास थी, आज यह 3,000 से ज़्यादा पहुंच चुकी है,
यानी दोगुने से भी अधिक। 1973 में शुरू हुए ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ ने अभयारण्य बनाने, शिकारी रोकने के लिए पेट्रोलिंग, वीडियो ट्रैप और ड्रोन जैसी तकनीकें अपनाईं और स्थानीय समुदायों को जोड़ा। इसके बाद भी, आवास की कमी, इंसान-बाघ संघर्ष और अवैध वाइल्डलाइफ ट्रेड जैसी चुनौतियां देश के सबसे सुरक्षित इलाकों में भी बनी हुई हैं।
TX2 लक्ष्य और ग्लोबल टाइगर समिट
2010 में, दुनिया के 13 बाघ-वासी देशों की सरकारों ने TX2 पहल के तहत 2022 तक बाघों की संख्या दोगुनी करने का वादा किया था। यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका, लेकिन 2010 में जहां कुल मिलाकर 3,200 से कम बाघ थे, वहीं 2025 में यह संख्या 5,500 से ज़्यादा पहुंच गई है—यह कामयाबी ऐतिहासिक है।
नेपाल और रूस ने भी बढ़िया प्रयास किए, लेकिन दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देश अब भी शिकार और आवास के नुकसान से जूझ रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका
ग्लोबल टाइगर फोरम, WWF, TRAFFIC और दुनिया भर की सरकारें मिलकर बाघों की सुरक्षा, शिकार रोकने और आवास को पुनर्जीवित करने के लिए काम कर रही हैं।
हर साल 29 जुलाई को इंटरनेशनल टाइगर डे मनाया जाता है।
बाघों के लिए क्या बड़े खतरे हैं?
सख्त कानूनों के बावजूद, बाघ अब भी गंभीर संकट में हैं:
- अवैध व्यापार और शिकार: बाघों की खाल, हड्डियाँ और शरीर के दूसरे हिस्से, जिन्हें पारंपरिक दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है, के लिए बाघों को मारा जाता है—खासकर पूर्वी एशिया के बाज़ारों में।
- आवास का नुकसान: खेती, शहरीकरण और सड़कों के लिए जंगलों की कटाई से बाघों का घर छिन रहा है।
- इंसान-बाघ संघर्ष: जैसे-जैसे बाघों का घर सिकुड़ रहा है, वे मानव बस्तियों में भटक जाते हैं—इंसान के लिए और बाघ, दोनों के लिए खतरा।
- जलवायु परिवर्तन: समुद्र का बढ़ता जलस्तर निचले जंगलों के लिए गंभीर खतरा है। मौसम की चरम घटनाएँ जानवरों—बाघों के शिकार—के बारे में और उनके आवास को बदल रही हैं।
हमें बाघों को क्यों बचाना चाहिए? पर्यावरण और संस्कृति में उनकी अहमियत
बाघ प्रकृति की श्रृंखला में सबसे ऊपर हैं। वे जंगली हिरण, सांभर जैसे शिकार को नियंत्रित रखते हैं,
जिससे जंगल का स्वास्थ्य बना रहता है। उनका अस्तित्व पूरे हाबिटैट की सेहत की निशानी है।
साथ ही, बाघ एशिया की सभ्यता, धर्म, मिथक और राष्ट्रीय पहचान में भी गहरे जुड़े हैं।
बाघ संरक्षण का भविष्य क्या है?
- आवास की सुरक्षा और विस्तार: मौजूदा जंगलों को बचाने और टूट-फूट चुके हाबिटैट को फिर से संजोना।
- शिकार रोकने की मुहिम तेज़ करना: पेट्रोलिंग बढ़ाना, खुफिया जानकारी जुटाना और अंतरराष्ट्रीय पुलिस के साथ सहयोग।
- स्थानीय समुदायों को जोड़ना: संरक्षण प्रयासों में स्थानीय लोगों को साथ लेना, ताकि इनसान और बाघ दोनों का फायदा हो।
- सतत विकास: इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास के बीच बाघों के घर के साथ सामंजस्य बिठाना।
- वित्तपोषण और वैश्विक जागरूकता: संरक्षण संगठनों को दान और जन जागरूकता अभियानों को जारी रखना बेहद ज़रूरी है।
सतर्क उम्मीद
आज की तारीख (जुलाई 2025) में इंटरनेशनल टाइगर डे के मौके पर, दुनिया भर में 5,500 से ज़्यादा जंगली बाघ बचे हैं—यह प्रयासों का एक कमज़ोर, लेकिन स्थायी नतीजा है। ये संख्या बाघों को विलुप्त होने से बचाने की ओर एक छोटा कदम है, लेकिन भविष्य अब भी नाज़ुक है। भारत इस मामले में अग्रणी है, लेकिन हर बाघ-वासी देश को अवैध शिकार रोकने, आवास बचाने और रिसर्च आधारित संरक्षण की पूरी प्रतिबद्धता दिखानी होगी।
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बाघ सिर्फ जंगली जानवर नहीं हैं—वे राष्ट्रीय गौरव, जैवविविधता के रक्षक और हम सबकी साझा ज़िम्मेदारी के प्रतीक हैं।
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