चेतश्वर पुजारा ने क्रिकेट से संन्यास लिया: एक टेस्ट युग का अंत
टीम इंडिया की टेस्ट बल्लेबाजी की “दीवार” कहे जाने वाले चेतश्वर पुजारा ने एक शांत रविवार सुबह सभी फॉर्मेट से संन्यास लेने की घोषणा की। इस खबर ने भारतीय क्रिकेट फैन्स को भावुक कर दिया। करीब 15 साल की मेहनत, टीम वर्क, और समर्पण का सफर अब सुकून के साथ समाप्त हो गया है।

37 साल की उम्र में पुजारा ने सोशल मीडिया पर लिखा–
“भारतीय जर्सी पहनना, राष्ट्रगान गाना और हर बार मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ देना—इन सबका एहसास शब्दों में नहीं बयान हो सकता। हर अच्छी चीज़ का अंत एक दिन आता है, और बहुत आभार के साथ मैं अब भारतीय क्रिकेट के सभी रूपों से संन्यास ले रहा हूँ।”
चेतश्वर पुजारा ने बताया कि ये फैसला अचानक नहीं था। उन्होंने परिवार और साथियों से सलाह-मशविरा किया और सोचा कि अब युवा खिलाड़ियों को मौका देना चाहिए। उन्होंने दर्शाया कि क्रिकेट केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का खेल नहीं, बल्कि विरासत और निरंतरता का नाम है।
पुजारा की विरासत: आँकड़े और उससे भी आगे
- 103 टेस्ट
- 7,195 रन
- 19 शतक, 35 अर्धशतक
- औसत 43.60
चेतश्वर पुजारा की असली पहचान सिर्फ आँकड़ों में नहीं, उनके मैदान पर धैर्य, टीम के लिए जुझारू अंदाज और संकट के समय बल्लेबाजी के जज्बे में थी। राहुल द्रविड़ के बाद टीम इंडिया के नंबर-3 बल्लेबाज़ के रूप में वे सबसे विश्वासपात्र खिलाड़ी रहे। 2018–19 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया में 521 रन बना कर भारत को पहली सीरीज़ जीत दिलाई। वे तेज गेंदबाजों का डटकर सामना करते, युवा खिलाड़ियों की ढाल बनते।
विदाई और सम्मान
क्रिकेट जगत ने चेतश्वर पुजारा की विनम्रता, टीम भावना और दबाव में शानदार खेल के लिए सराहना की। पुराने साथी युवराज सिंह, गौतम गंभीर, बीसीसीआई और दिग्गज अनिल कुंबले सहित सभी ने फाइटर पुजारा को भावभीनी विदाई दी। सबसे खास बात, पुजारा के लिए कोई भव्य फेयरवेल मैच नहीं हुआ, जैसे बीते कुछ सितारों ने चुपचाप विदा ली।
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क्रिकेट के बाद का जीवन
पुजारा ने इंटरनेशनल क्रिकेट जून 2023 में खेला, लेकिन वे घरेलू क्रिकेट और कोचिंग से जुड़े हुए हैं।
वे युवा प्रतिभाओं को गाइड करते हैं, मीडिया में सक्रिय रहते हैं, और नए चेहरों को उभरता देखना चाहते हैं।
चेतश्वर पुजारा की कहानी: इंसानियत और सादगी
यह कहानी युवा खिलाड़ियों को सिखाती है कि महानता सिर्फ बड़े शॉट्स और शानदार कैच में ही नहीं, बल्कि ईमानदार मेहनत, फोकस, और खेल के प्रति सम्मान में है। हर टेस्ट में उनकी मौजूदगी टीम के लिए अनमोल रही। उनकी विनम्रता, आत्मज्ञान और सही समय पर रास्ता छोड़ने की हिम्मत क्रिकेट जगत को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेगी। पुजारा भले ही अब ना खेलें, लेकिन भारतीय क्रिकेट और उसके समर्थकों के दिलों में उनकी विरासत हमेशा ज़िंदा रहेगी।
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