माता सीता स्वयंवर: एक अनकहा प्रश्न – राजा दशरथ को नहीं बुलाया गया क्यों?
रामायण की कथा सदियों से भारतीय संस्कृति का आधार रही है। माता सीता का स्वयंवर, भगवान राम का धनुष तोड़ना और उनका विवाह – ये प्रसंग हर भक्त के हृदय में अमिट हैं। लेकिन एक सवाल अक्सर मन में उठता है: “जब राम और लक्ष्मण को आमंत्रित किया गया, तो अयोध्या के राजा दशरथ को माता सीता के स्वयंवर में क्यों नहीं बुलाया गया?”

राजा दशरथ को नहीं बुलाया गया यह प्रश्न धार्मिक, राजनीतिक और व्यावहारिक – तीनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
आइए, इसे गहराई से समझते हैं।
1. राजा दशरथ संस्कृति और परंपरा का सम्मान करते थे
ऋषि विश्वामित्र जब राम और लक्ष्मण को अपने साथ ले जाना चाहते थे, तो राजा दशरथ ने पहले इनकार किया।
लेकिन विश्वामित्र ने कहा कि यह कार्य केवल धर्म और कल्याण के लिए है।
धर्म में एक महत्वपूर्ण नियम है:
जहाँ गुरु का आदेश हो, वहाँ राजा भी स्वयं उपस्थित नहीं होता।
विश्वामित्र राम को अपने शिष्य के रूप में ले गए थे, न कि अयोध्या के राजकुमार के रूप में।
इसलिए दशरथ उनके साथ स्वयं नहीं जा सकते थे।
2. जनकपुर और अयोध्या अलग-अलग राजनीतिक क्षेत्रों में थे
मिथिला (जनकपुर) और अयोध्या दोनों अपने समय के शक्तिशाली राज्य थे।
राजनीति में यह माना जाता था कि:
- शाही विवाह समारोहों में राजा का उपस्थित होना
- राजनीतिक गठबंधन का संकेत बन सकता है
- शर्तों और संबंधों में असंतुलन पैदा हो सकता है
राजा जनक एक पवित्र ऋषि-परंपरा वाले ज्ञानी थे।
उनका स्वयंवर आयोजन किसी राजनीतिक गठबंधन का मंच नहीं था।
इसलिए उन्होंने केवल यज्ञ और प्रतियोगिता में भाग लेने वाले राजाओं को आमंत्रित किया, न कि उनके पूरे शाही परिवार को।
3. स्वयंवर का असली उद्देश्य—धनुष-यज्ञ
सीता स्वयंवर का केंद्र एक परंपरा थी:
भगवान शंकर का पिनाक धनुष उठाने और चढ़ाने की प्रतिज्ञा।
यह प्रतियोगिता थी – उन राजाओं के लिए जो:
- बलवान हों
- धर्मपरायण हों
- राजसत्ता चलाने योग्य हों
राम और लक्ष्मण तो गुरु विश्वामित्र के साथ यज्ञ रक्षा के लिए आए थे।
दशरथ स्वयं आने के पात्र नहीं थे, क्योंकि प्रतियोगिता में राजा स्वयं भाग लेते थे, न कि उनके प्रतिनिधि।
4. दशरथ की आयु और स्वास्थ्य का कारण
रामायण के अनुसार उस समय दशरथ वृद्धावस्था में थे। उनके तीन पुत्र बड़े हो चुके थे।
ऐसी अवस्था में उनका लंबी दूरी की यात्रा करना कठिन था, विशेषकर तब, जब यात्रा का कारण प्रतियोगिता हो, न कि औपचारिक दावत या सम्मेलन।
5. विश्वामित्र की योजना – दिव्य मिलन का मार्ग
यह प्रसंग केवल सामाजिक व्यवस्था का हिस्सा नहीं था, बल्कि ईश्वर की लीला भी थी।
विश्वामित्र को पहले से ज्ञात था कि राम और सीता का मिलन दिव्य नियति है।
यदि दशरथ वहाँ होते:
- राजनीतिक बाधाएँ
- प्रोटोकॉल
- सुरक्षा
- और शाही सीमाएँ
इन सबके कारण यह दिव्य मिलन उतना सहज नहीं हो पाता।
विश्वामित्र ने पूरी परिस्थिति इस प्रकार बनाई कि राम स्वयं धनुष तोड़कर सीता को प्राप्त करें और दशरथ बाद में सम्मानपूर्वक विवाह यात्रा के साथ आएँ।
ये भी पढ़ें: इस्लाम में ‘कबूल है’ तीन बार क्यों कहा जाता है? जानिए असली वजह
6. विवाह के समय दशरथ को सम्मानपूर्वक बुलाया गया
यह महत्वपूर्ण है कि विवाह के समय राजा दशरथ को विधिवत आमंत्रित किया गया था। वे:
- चारों भाइयों
- अपनी पत्नियों
- अयोध्या के मंत्रियों
- और विशाल सेना
के साथ मिथिला पहुँचे। जनक ने उनका भव्य स्वागत किया।
इससे स्पष्ट है कि:
राजा दशरथ को नहीं बुलाया क्योकी दशरथ को स्वयंवर के लिए नहीं, विवाह के लिए बुलाया जाना ही उचित माना गया।
khaberbox.com पर पढ़ें ताजा समाचार (हिंदी समाचार), मनोरंजन, खेल, क्रिकेट, राजनीति, धर्म, शिक्षा, बाज़ार और प्रौद्योगिकी से जुड़ी हर खबर। समय पर अपडेट या हिंदी ब्रेकिंग न्यूज के लिए खबर बॉक्स चुनें। अपने समाचार अनुभव को और बेहतर बनाएं।

