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Varaha avatar earth ocean mystery: वराह अवतार की कथा और ब्रह्मांड में जल की खोज पर नया दृष्टिकोण

बचपन से ही कई लोगों के मन में एक सवाल उठता रहा है—जब समुद्र पृथ्वी पर ही मौजूद है, तो फिर वह कौन-सा समुद्र था जिसमें पृथ्वी को छिपाया गया था? हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार, हिरण्यकश्यप का भाई Hiranyaksha पृथ्वी को उठाकर समुद्र में छिपा देता है। तब Vishnu वराह अवतार धारण कर हिरण्याक्ष का वध करते हैं और पृथ्वी को उसके स्थान पर पुनः स्थापित करते हैं।

Varaha avatar earth ocean mystery

Varaha avatar earth ocean mystery: यह कथा लंबे समय तक एक प्रतीकात्मक या काल्पनिक कथा के रूप में देखी जाती रही। आधुनिक दृष्टिकोण से इसे मिथक मानकर नकार दिया गया। लेकिन विज्ञान की नई खोजों ने इस कथा पर एक नया, विचारोत्तेजक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है – हालांकि इसे प्रमाण नहीं, बल्कि दार्शनिक और प्रतीकात्मक संगति के रूप में समझना अधिक उपयुक्त है।


वराह अवतार और “समुद्र” का अर्थ

वराह अवतार की कथा में “समुद्र” को सामान्य भौगोलिक समुद्र की तरह नहीं, बल्कि एक आदिम, सर्वव्यापी जल-तत्व के रूप में देखा जाता है। पुराणों में सृष्टि की उत्पत्ति से पहले जल का वर्णन मिलता है – एक ऐसा जल जो जीवन के आरंभिक तत्व का प्रतीक है। यही कारण है कि कई विद्वान इस समुद्र को “भौतिक समुद्र” के बजाय “कॉस्मिक ओशन” या “महासागर” मानते हैं।


विज्ञान की खोज: ब्रह्मांड में विशाल जल-भंडार

हाल के वर्षों में NASA से जुड़ी खगोलीय शोधों और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक अध्ययनों में यह सामने आया कि ब्रह्मांड में अत्यंत दूर स्थित एक विशाल जल-भंडार पाया गया है। यह जल-भंडार एक क्वासर के आसपास जलवाष्प के रूप में मौजूद है और पृथ्वी से लगभग 12 अरब प्रकाश-वर्ष दूर है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, उस जल की मात्रा पृथ्वी के सभी महासागरों के कुल जल से कई गुना अधिक है।

यह खोज यह सिद्ध करती है कि जल केवल पृथ्वी तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्रह्मांड में भी व्यापक रूप से मौजूद है।

यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि विज्ञान यह नहीं कहता कि पृथ्वी को कहीं छिपाया गया था।

यह विचार आस्था और प्रतीकात्मक व्याख्या से जुड़ा है।


मिथक और विज्ञान: टकराव नहीं, संवाद

जब पौराणिक कथाओं को विज्ञान के साथ जोड़ा जाता है, तो अक्सर गलत निष्कर्ष निकाल लिए जाते हैं।

वराह अवतार की कथा को यदि शाब्दिक रूप से लिया जाए, तो वह विज्ञान से मेल नहीं खाती।

लेकिन यदि इसे प्रतीकात्मक रूप में देखें – जहां “पृथ्वी” व्यवस्था का प्रतीक है

और “समुद्र” अराजकता या आदिम अवस्था का – तो कथा का दार्शनिक अर्थ गहरा हो जाता है।

इसी संदर्भ में ब्रह्मांड में जल की खोज यह संकेत देती है कि प्राचीन ग्रंथों में वर्णित “महासागर” केवल पृथ्वी का समुद्र नहीं, बल्कि अस्तित्व का व्यापक रूपक भी हो सकता है।

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Varaha avatar earth ocean mystery: “भावसागर” की अवधारणा

हिंदू शास्त्रों में “भावसागर” शब्द जीवन-संघर्ष और अस्तित्व के महासागर के लिए प्रयुक्त होता है।

यह केवल भौतिक जल नहीं, बल्कि जन्म-मृत्यु, अज्ञान और ज्ञान के बीच की यात्रा का प्रतीक है।

वराह अवतार द्वारा पृथ्वी का उद्धार इस भावसागर से मुक्ति का भी संकेत माना जाता है।

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