जमकर विरोध के बाद Jagadguru रामभद्राचार्य ने अपने बयान पर दी सफाई!
🕉️ श्री आज सनातन धर्म पर चारों ओर से आक्रमण हो रहे हैं। अब सभी हिंदुओं को बिल्कुल पारस्परिक भेद छोड़कर इकट्ठा होने की आवश्यकता है। हमने साल 100 वर्ष की लड़ाई जीती। श्री राम मंदिर हमें मिल गया। अब श्री कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ भी हमें मिलेगा। पर हमें सबको इकट्ठा होना होगा।

रही बात प्रेमानंद की।
मैंने प्रेमानंद जी के लिए कोई भी अभद्र टिप्पणी नहीं की है। वे मेरी दृष्टि में एक बालक पुत्रवत हैं। मेरी अवस्था भी बड़ी है। एक आचार्य होने के नाते मैं सबको कहता हूं कि संस्कृत का अध्ययन करना चाहिए। आज जो सामान्य लोग चोला पहन के वक्तव्य दे रहे हैं, जिनको एक अक्षर आता जाता नहीं। मैंने अपने उत्तराधिकारी रामचंद्र दास को भी कहा है कि बच्चों को संस्कृत पढ़ना चाहिए। और मैं सबको कह रहा हूं, प्रत्येक हिंदू को संस्कृत पढ़ना चाहिए। कहते ही नहीं, मैं आज भी स्वयं पढ़ता हूं। 18-18 घंटे पढ़ता हूं और पढ़ता रहूंगा यावत जीव।
चमत्कार का सवाल
प्रेमानंद के लिए मैंने कोई ऐसी टिप्पणी नहीं की है, हाँ चमत्कार को मैं नमस्कार नहीं करता – ये सत्य है। ये तो मैंने अपने शिष्य धीरेंद्र शास्त्री को भी कहा, “बेटा पढ़ो लिखो, सब लोग पढ़ो।” भारत की दो प्रतिष्ठाएं हैं: संस्कृत और संस्कृति। भारत की प्रतिष्ठा ‘संस्कृतम्’ – भारतीय संस्कृति को जानने के लिए संस्कृत पढ़ना नितांत आवश्यक है। मैं किसी के लिए कुछ भी नहीं कह रहा हूं, सभी संत मेरे लिए स्नेह भाजन हैं और स्नेह भाजन रहेंगे।
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संतों में एकता का आह्वान
विधर्मी शक्तियां सनातन धर्म को निर्बल बनाने के लिए तोड़-मरोड़कर पेश करती हैं, संतों में भेद डालती हैं। अभी सब संतों को एक हो जाना चाहिए – एक होकर हिंदू धर्म की रक्षा में तत्पर होना चाहिए। मेरा ये तो कहूंगा ही और मैं प्रत्येक संत से कह रहा हूं… यहाँ तक कि प्रत्येक हिंदू से कह रहा हूं कि भारतीय संस्कृति को समझने के लिए संस्कृत पढ़ो, पढ़ना चाहिए। स्वाध्याय में प्रमाद नहीं होना चाहिए।
समाप्ति में स्पष्टता और शुभकामनाएं
यह जो भ्रम फैलाया जा रहा है मेरे लिए – यह गलत है।
मैंने प्रेमानंद या किसी संत के प्रति कोई भी गलत टिप्पणी नहीं की है, आगे भी नहीं करूंगा।
जब भी प्रेमानंद जी मुझे मिलने आएंगे, मैं निश्चित रूप से आशीर्वाद दूंगा, उन्हें हृदय से लगाऊंगा।
उनके स्वास्थ्य के लिए भगवान श्री रामचंद्र जी से मैं प्रार्थना करता हूं, निरंतर उनकी दीर्घायु की कामना करता रहूंगा।
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