भारतीय ग्रंथों में रक्षाबंधन का महत्व – राखी का पवित्र पर्व
भारत में रक्षाबंधन या “राखी” भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का त्योहार है। यह प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे की रक्षा के वचन का प्रतीक है। हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को यह पर्व मनाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय ग्रंथों में रक्षाबंधन का गहरा ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है, जो इसे और भी खास बनाता है?

भारतीय ग्रंथों में रक्षाबंधन
रक्षाबंधन केवल पारिवारिक त्योहार ही नहीं, बल्कि यह आस्था, साहस और सुरक्षा का प्रतीक भी है।
वेदों, पुराणों और महाकाव्यों में इस पर्व का उल्लेख मिलता है।
भागवत पुराण में इंद्र और इंद्राणी की कथा
भागवत पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, असुरराज बली ने स्वर्ग पर आक्रमण कर इंद्र को पराजित कर दिया था। गुरु बृहस्पति के सुझाव पर इंद्राणी ने श्रावण पूर्णिमा के दिन इंद्र के हाथ में पवित्र धागा बांधा और उनकी विजय के लिए प्रार्थना की।
इस राखी के प्रभाव से इंद्र ने असुरों को हराकर स्वर्ग वापस प्राप्त किया।
महाभारत में कृष्ण और द्रौपदी की कहानी
महाभारत में वर्णित है कि एक बार भगवान कृष्ण की उंगली से रक्त निकलने लगा।
द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया।
इस प्रेम के प्रतीक को देखते हुए कृष्ण ने जीवनभर द्रौपदी की रक्षा का वचन दिया और चीरहरण के समय उनका सम्मान बचाया।
राजपूत रानियों का साहस
मध्यकाल में कई राजपूत रानियों ने पड़ोसी राजाओं या मुगल बादशाहों को राखी भेजकर रक्षा का आग्रह किया। इनमें सबसे प्रसिद्ध रानी कर्णावती थीं, जिन्होंने चित्तौड़ की रक्षा के लिए सम्राट हुमायूं को राखी भेजी। हुमायूं ने भाई का धर्म निभाते हुए उनकी मदद की।
आध्यात्मिक महत्व
भारतीय ग्रंथों के अनुसार, रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के लिए नहीं है।
‘रक्षा संकल्प’ किसी भी व्यक्ति, धर्म, मित्र या देश की रक्षा के लिए लिया जा सकता है।
श्रावण पूर्णिमा का यह पवित्र धागा सौभाग्य, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
वैदिक काल में इसे यज्ञ और मंत्रों के साथ भी प्रयोग किया जाता था।
आज का रक्षाबंधन – परंपरा और आधुनिकता का संगम
आज भी बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करती हैं और भाई जीवनभर रक्षा का वचन देते हैं। अब कई महिलाएं अपने दोस्तों, बहनों या शुभचिंतकों को भी राखी बांधती हैं, जो प्रेम, विश्वास और एकता का व्यापक संदेश देती है।
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समापन
भारतीय ग्रंथों के अनुसार रक्षाबंधन केवल रिश्तों का पर्व नहीं, बल्कि धर्म, साहस और मानव मूल्यों का प्रतीक है।
रक्षा का बंधन केवल एक धागा नहीं, बल्कि एक मजबूत भावना है जो लोगों को जोड़ती है।
इस श्रावण पूर्णिमा पर हमें केवल अपने प्रियजनों ही नहीं, बल्कि समाज और देश की रक्षा का भी संकल्प लेना चाहिए। यही रक्षाबंधन का सच्चा अर्थ है।
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