यूरोप में मिले हिन्दू देवता हनुमान जी, नाग मंदिर और पाताल लोक के रहस्य
शोधकर्ताओं ने हाल ही में दो ऐसे रहस्यमयी पुरातात्विक स्थल खोजे हैं जो मुख्य रूप से ईसाई देशों में स्थित हैं, लेकिन उनका सीधा संबंध प्राचीन हनुमान खोज और हिन्दू पौराणिक कथाओं से जुड़ता है। इन स्थलों पर भगवान हनुमान जैसी मूर्तियाँ, नाग देवता जैसे आकृतियों की नक्काशियाँ और पाताल लोक जैसी भूमिगत संरचनाएँ मिली हैं। इन खोजों ने दुनिया भर के इतिहासकारों और धर्म विशेषज्ञों को चौंका दिया है।

सीमाओं को पार करती हनुमान जी की खोज
पहला स्थल पुर्तगाल के तट के पास मिला, जहाँ समुद्र तल के नीचे गोताखोरों ने एक विशाल पत्थर की टूटी हुई मूर्ति खोजी। इस मूर्ति की आकृति, मुँड़, गदा और पूँछ को देखकर यह स्पष्ट हुआ कि यह भगवान हनुमान की प्रतिमा है।
कार्बन डेटिंग से पता चला कि यह प्रतिमा लगभग 5,000 वर्ष पुरानी है — यानी ईसाई धर्म से बहुत पहले की। इसके नीचे पाए गए शिलालेख प्राचीन संस्कृत जैसी लिपि में हैं, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि प्राचीन भारत के नाविक अफ्रीका और मध्य-पूर्व के रास्ते यूरोप पहुँचे होंगे।
इन यात्रियों ने भगवान हनुमान की पूजा की होगी जो शक्ति, साहस और निष्ठा के प्रतीक हैं।
स्पेन में मिला नाग मंदिर और भूमिगत रहस्य
दूसरी प्राचीन हनुमान जी की खोज दक्षिणी स्पेन में हुई, जहाँ पुरातत्वविदों ने कॉर्डोबा के पास खुदाई के दौरान एक विशाल भूमिगत मंदिर पाया। इस मंदिर की दीवारों पर नाग देवताओं जैसी आकृतियों की नक्काशी मिली — आधा मानव, आधा सर्प, जो हिन्दू और बौद्ध कथाओं में वर्णित हैं।
मंदिर में नीचे जाने वाले गोलाकार सीढ़ियाँ और अंधेरी सुरंगें हैं जिन्हें “Porta Inferna” यानी “अंधकार का द्वार” कहा गया है।
यह संरचना भारतीय ग्रंथों के पाताल लोक के समान है।
रोचक बात यह है कि यूनानी संस्कृति में भी सर्प देवी और हाइड्रा जैसे मिथक हैं,
जिससे यह सिद्ध होता है कि इन सभ्यताओं में कभी न कभी सांस्कृतिक संबंध रहे होंगे।
ईसाई देशों में हिन्दू देवताओं की उपस्थिति कैसे?
इतिहासकारों के अनुसार, यह संभव है कि प्राचीन भारतीय समुद्री यात्री अपनी धार्मिक मान्यताओं और मूर्तियों के साथ दूसरे महाद्वीपों तक पहुँचे हों।
कुछ विद्वानों का मानना है कि यह आध्यात्मिक आदान-प्रदान (spiritual exchange) था, न कि केवल एकतरफा सांस्कृतिक प्रभाव।
पुराने चर्च ग्रंथों में भी “पूर्व से आए यात्रियों” का उल्लेख है जिन्होंने पवित्र मूर्तियाँ यूरोप लाकर रखीं।
इन्हें बाद में ईसाई भिक्षुओं ने ‘पगान मूर्तियों’ के रूप में दर्ज किया।
पाताल लोक और अंधकार का रहस्य
दोनों खोजों में एक समान प्रतीक दिखता है — “अंधकार” या “पाताल लोक” का विचार।
भारतीय ग्रंथों में पाताल लोक नागों का स्थान माना गया है, जहाँ ज्ञान, शक्ति और रहस्यमय ऊर्जा का वास है।
स्पेन की भूमिगत सुरंगें शायद प्राचीन साधकों के लिए ध्यान या पुनर्जन्म के संस्कार स्थल रहे हों।
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इन खोजों से यह सवाल उठता है — क्या प्राचीन सभ्यताएँ एक-दूसरे से जुड़ी थीं? क्या हिन्दू देवताओं और प्रतीकों का प्रभाव विश्व के दूसरे हिस्सों तक फैला था?
वैज्ञानिक अब उन्नत स्कैनिंग तकनीक और भाषा विश्लेषण से इन रहस्यों की पड़ताल कर रहे हैं।
एक बात निश्चित है — प्राचीन हनुमान जी की खोज ने यह साबित कर दिया है कि मानव सभ्यता की आध्यात्मिक कहानी पहले से कहीं अधिक जुड़ी और वैश्विक रही है।
अस्वीकरण: यह लेख एक सामाजिक पोस्ट या अनुसंधान पर आधारित है। खबरबॉक्स इन तथ्यों की पुष्टि नहीं करता है।
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