हम दिवाली क्यों मनाते हैं? हर व्यक्ति के जीवन में दीवाली का क्या महत्व है? दिवाली से हम क्या सीखते हैं?
दीवाली, जिसे “प्रकाश पर्व” के नाम से भी जाना जाता है, भारत और दुनिया भर में मनाए जाने वाले सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। यह त्योहार धर्म, भाषा या क्षेत्र की सीमाओं को मिटाकर लोगों को आनंद, प्रेम और उम्मीद के बंधन में जोड़ देता है।

दीवाली का महत्व: अंधकार पर प्रकाश की विजय का उत्सव
दीवाली का महत्व अच्छाई पर बुराई की, प्रकाश पर अंधकार की और ज्ञान पर अज्ञान की जीत को दर्शाता है
– यह एक ऐसा संदेश है जो हर इंसान के जीवन से जुड़ा है।
दीवाली क्यों मनाई जाती है
- भारत की विविध परंपराओं में दीवाली के पीछे कई धार्मिक और ऐतिहासिक कथाएं हैं, जो विजय, पुनर्जन्म और दिव्य आशीर्वाद का प्रतीक हैं।
- मुख्य रूप से यह पर्व भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने और रावण पर विजय प्राप्त करने की याद में मनाया जाता है।
- उस समय अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत में दीप प्रज्वलित किए थे, और वही परंपरा आज भी हर घर में निभाई जाती है।
- कई लोग इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं, जो धन और समृद्धि की देवी मानी जाती हैं।
- जैन धर्म के अनुयायियों के लिए यह दिन भगवान महावीर के निर्वाण (आध्यात्मिक जागृति) का प्रतीक है,
- जबकि सिखों के लिए यह गुरु हरगोबिंद साहिब जी की कैद से मुक्ति का दिन है।
- इन सभी अर्थों के कारण दीवाली भारत की सबसे विविध और एकता लाने वाली परंपरा बन जाती है।
आध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से
दीवाली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन में पुनर्जागरण और सद्भाव का प्रतीक है।
यह हमें न केवल घर सजाने, बल्कि मन को भी उजाला करने की प्रेरणा देता है।
- परिवारिक एकता और रिश्तों की मजबूती: इस पर्व पर लोग घर की सफाई करते हैं, साज-सज्जा करते हैं और परिवार के साथ समय बिताते हैं। यह कृतज्ञता और क्षमा का समय है — जब पुरानी शिकायतें मिटाकर नई शुरुआत की जाती है।
- दान और सहानुभूति का भाव: मिठाइयाँ, उपहार या समय — दीवाली हमें सिखाती है कि खुशी बाँटने से बढ़ती है। यह करुणा और विनम्रता का पर्व है।
आध्यात्मिक अर्थ
दीपक जलाना केवल बाहरी अंधकार को दूर करने का प्रतीक नहीं है,
बल्कि यह हमारे भीतर की नकारात्मकता को मिटाने और ज्ञान के प्रकाश को जगाने का संकेत है।
यह आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का अवसर देता है,
– हमें क्रोध, लोभ और ईर्ष्या जैसी भावनाओं को त्यागकर विश्वास, शांति और ज्ञान को अपनाने की प्रेरणा देता है।
दीवाली का सांस्कृतिक और आर्थिक प्रभाव
- दीवाली का महत्व आर्थिक दृष्टि से भी गहरा है।
- इस दौरान छोटे व्यापारी, कारीगर और हस्तशिल्प व्यवसायी खूब लाभ कमाते हैं।
- यह त्यौहार भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ समुदायों को जोड़ने का कार्य भी करता है।
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दीवाली हमें क्या सिखाती है
- अच्छाई की जीत: दीवाली सिखाती है कि सत्य और धर्म की विजय हमेशा होती है, जैसे भगवान राम ने रावण पर विजय पाई।
- प्रकाश है आशा: हर जलता दीपक यह संदेश देता है कि अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, आशा की किरण हमेशा मौजूद रहती है।
- विविधता में एकता: दीवाली भारत की विविधता में एकता की मिसाल है, जो मानवता का सार्वभौमिक संदेश देती है।
- अनुशासन और नवजीवन: घर की सफाई और सजावट मन की सफाई का भी प्रतीक है। यह अनुशासन और आत्मनियंत्रण की प्रेरणा देता है।
- सच्ची संपत्ति: दीवाली भौतिक संपत्ति से ज्यादा आध्यात्मिक संपत्ति — यानी आनंद, करुणा और ज्ञान — को महत्व देती है।
आत्मा को रोशनी देने वाला पर्व
दीवाली केवल दीपों और पटाखों का त्योहार नहीं, बल्कि आत्मा को जगाने वाला उत्सव है।
दीवाली हमें याद दिलाती है कि सबसे सच्चा प्रकाश हमारे भीतर से आता है —
वह प्रकाश जो जीवन में आशा, शांति और समृद्धि का संदेश देता है।
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