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दिवाली 2025, भाई दूज और गोवर्धन पूजा: भारतीय संस्कृति की आत्मा

भारतीय संस्कृति का केंद्र दिवाली, भाई दूज और गोवर्धन पूजा जैसे त्योहार हैं। ये तीनों पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं बल्कि परिवार, एकता और आनंद का प्रतीक भी हैं। हर साल ये त्यौहार अंधकार पर प्रकाश और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश देते हैं।

दिवाली 2025

दिवाली 2025 के साथ अक्टूबर में भारत फिर से रोशनी, भक्ति और खुशियों से जगमगाने वाला है।


दीपों का पर्व — दिवाली 2025

तारीख: सोमवार, 20 अक्टूबर 2025

दिवाली 2025 अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव है। यह पर्व रामायण से जुड़ा है, जब भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे और रावण का वध किया।
इस दिन घरों और गलियों में दीयों की रौशनी, रंगोली, और आतिशबाज़ी से वातावरण पवित्र हो जाता है। परिवार के लोग शाम को लक्ष्मी पूजा करते हैं ताकि घर में धन, सुख और समृद्धि बनी रहे।

लोग माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं और एक-दूसरे को मिठाई व उपहार देते हैं।

अमावस्या तिथि: 20 अक्टूबर 2025
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 7:08 बजे से 8:18 बजे तक (भारतीय समयानुसार)


गोवर्धन पूजा 2025 — श्रीकृष्ण की भक्ति और प्रकृति की रक्षा

तारीख: बुधवार, 22 अक्टूबर 2025

गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन मनाई जाती है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की घटना की याद दिलाता है, जब उन्होंने इंद्र देव की वर्षा से वृंदावन वासियों की रक्षा की थी।
भक्त इस दिन गोबर या मिट्टी से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाते हैं, उसे फूलों से सजाते हैं और भगवान को अन्नकूट का भोग लगाते हैं।

यह पर्व धर्म, प्रकृति-संतुलन और कृतज्ञता की भावना को सशक्त करता है।


भाई दूज 2025 — भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का उत्सव

तारीख: गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025

दिवाली उत्सव का अंतिम दिन भाई दूज कहलाता है, जिसे भाऊ बीज या यम द्वितीया भी कहा जाता है।

यह त्योहार भाई-बहन के स्नेह और सुरक्षा के बंधन को दर्शाता है।

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कहते हैं कि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने आए थे और उन्हें आशीर्वाद दिया था।

बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए आरती उतारती हैं, तिलक लगाती हैं और मिठाई खिलाती हैं,

जबकि भाई अपनी बहनों की रक्षा का वचन देते हैं।


इन पर्वों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

  • दिवाली 2025: नए आरंभ, समृद्धि और पारिवारिक एकता का प्रतीक है।
  • गोवर्धन पूजा: प्रकृति के प्रति सम्मान और ईश्वर की कृपा के लिए कृतज्ञता सिखाती है।
  • भाई दूज: भाई-बहन के प्रेम और कर्तव्य के संबंध को और मजबूत करती है।

ये तीनों पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारत की जीवंत परंपराएँ हैं जो समाज को जोड़ती हैं, मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाती हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा से जीवन को प्रकाशित करती हैं।
जैसे-जैसे अक्टूबर 2025 पास आ रहा है, घरों में फिर से प्रकाश, भक्ति और परिवार के साथ रहने की गर्माहट लौटने वाली है।

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