दिल्ली में ECO-Friendly उत्सव की तैयारी: यमुना के स्थान पर गणेश चतुर्थी और दुर्गा पूजा विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाब
दिल्ली में गणेश चतुर्थी और दुर्गा पूजा के त्यौहार की तैयारी जोरों पर है, जो शहर के सबसे बड़े और सबसे जीवंत पर्वों में से हैं। इस साल यह उत्सव एक खास पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ मनाया जा रहा है: यमुना नदी के बजाय 80 से अधिक कृत्रिम तालाब बनाए गए हैं जहाँ गणेश और दुर्गा की मूर्तियाँ विसर्जित की जाएंगी, जिससे यह सबसे पर्यावरण-अनुकूल उत्सव बन जाएगा।

कृत्रिम तालाब की आवश्यकता क्यों?
कई सालों से इन त्योहारों के दौरान मूर्ति विसर्जन से यमुना नदी को भारी प्रदूषण का सामना करना पड़ता है।
पारंपरिक मूर्तियों में उपयोग होने वाले रसायन नदी और जलीय जीवों के लिए नुकसानदेह होते हैं।
दिल्ली सरकार, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग और दिल्ली जल बोर्ड की अगुवाई में, 11 जिलों में इन प्रदूषण को रोकने के लिए 80 से अधिक कृत्रिम तालाब बनाए गए हैं। इसका उद्देश्य यमुना को साफ रखना और लोगों को सुरक्षित, स्थानीय और पर्यावरण-प्रेमी तरीके से उत्सव मनाने का मौका देना है।
कृत्रिम तालाब कहाँ-कहाँ हैं?
कृत्रिम तालाब इस तरह बनाए गए हैं जिससे हर इलाके के लोगों को सुरक्षित विसर्जन स्थल मिल सके।
पश्चिम दिल्ली में 20 तालाब, पूर्व दिल्ली में 16, उत्तर-पश्चिम दिल्ली में 12, दक्षिण-पूर्व में 9,
और दक्षिण-पश्चिम में 7, शाहदरा, दक्षिण और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में 5-5, केंद्रीय दिल्ली में 4, और उत्तर दिल्ली में 1 तालाब है।
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स्थानीय विधायक और नागरिक समितियों ने मिलकर इन स्थलों का चुनाव किया, जिससे प्रक्रिया सहज और पारदर्शी रही।
इस पहल की एक खास बात यह है कि इन तालाबों का पानी पुनः उपयोग के लिए रखा जाएगा।
त्योहार की आनंदमयी रौनक और पर्यावरणीय जागरूकता
दिल्ली के मोहल्ले त्योहार के उत्साह से लबरेज हैं, जहाँ गणेश और दुर्गा की प्रतिमाएँ मंडपों में सजाई गई हैं,
रंग-बिरंगे झंडे, दीप और भजन की मधुर आवाज़ फैल रही है।
कृत्रिम तालाबों के चारों ओर वृक्षारोपण और अस्थाई बाड़ लगाकर पारंपरिक उत्सव को पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ने के प्रयास किए गए हैं।
सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। हर विसर्जन स्थल पर एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध होंगी।
स्थानीय पुलिस के सहयोग से यातायात प्रबंधन एवं भीड़ नियंत्रण के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
समुदाय की सकारात्मक प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासी और भक्त इस बदलाव का खुले दिल से स्वागत कर रहे हैं।
वे समझ चुके हैं कि यमुना नदी का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है,
फिर भी वे अपनी आस्था और उत्साह को पूरा करने में पीछे नहीं हटेंगे।
कई लोग इसे अन्य शहरों के लिए एक मिसाल मानते हैं, जहां लोग अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को पर्यावरण के साथ सामंजस्य में मनाते हुए संदेश देंगे कि कैसे भविष्य की पीढ़ियों के लिए जिम्मेदार उत्सव संभव हैं।
आगे की दिशा
सभी तैयारियों के साथ, दिल्ली इस बार गणेश चतुर्थी और दुर्गा पूजा उत्सव को न केवल श्रद्धा के साथ बल्कि पर्यावरणीय सम्मान के साथ भी मनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
कृत्रिम तालाबों की व्यवस्था यह दिखाती है कि धार्मिक विश्वास नवाचार और सततता के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।
दिल्ली की यह पहल यह दर्शाती है कि परंपराएँ बदल सकती हैं और बेहतर भविष्य के लिए विकसित हो सकती हैं।
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