योगी का अखिलेश पर निशाना, दिवाली पर बयान से भड़का सियासी तूफान
उत्तर प्रदेश में एक बार फिर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। योगी का अखिलेश पर निशाना और उनके दिवाली को लेकर दिए गए बयान पर तीखा पलटवार किया। योगी ने कहा — “अखिलेश ने एक बार फिर साबित किया कि सिंहासन विरासत में मिल सकता है, लेकिन बुद्धि नहीं।” यह बयान मंगलवार को तब आया जब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के दिवाली और क्रिसमस की तुलना वाले बयान ने विवाद खड़ा कर दिया।

अखिलेश यादव के दिवाली बयान पर बवाल
विवाद तब शुरू हुआ जब अखिलेश यादव ने अयोध्या में दिवाली समारोह पर यूपी सरकार के खर्च पर सवाल उठाए। इस वर्ष सरयू नदी के घाटों पर 26 लाख से अधिक दीपक जलाकर एक विश्व रिकॉर्ड बनाया गया। अखिलेश ने कहा कि “भारत को उन देशों से सीखना चाहिए जो क्रिसमस को महीनों तक मनाते हैं, ना कि इतने पैसे दीपक और सजावट पर बर्बाद करने चाहिए।”
उन्होंने कहा, “जब हमारी सरकार आएगी, तो हम और बेहतर रोशनी लगाएंगे।”
यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और बीजेपी ने आरोप लगाया कि अखिलेश ने हिंदू परंपराओं का अपमान किया है। विश्व हिंदू परिषद ने भी इस टिप्पणी की निंदा की, इसे “लाखों हिंदुओं की आस्था पर चोट” बताया।
योगी आदित्यनाथ का करारा जवाब
मुख्यमंत्री योगी का अखिलेश पर निशाना और कहा कि “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो व्यक्ति कभी इस राज्य पर शासन कर चुका है, वही अब अयोध्या की भव्यता में दोष ढूंढ रहा है।” योगी ने कहा — “अखिलेश यादव ने एक बार फिर दिखा दिया कि सिंहासन विरासत में मिल सकता है, लेकिन बुद्धि नहीं। सत्ता परिवार से मिल सकती है, लेकिन संस्कृति की समझ और विवेक अर्जित करना पड़ता है।”
उन्होंने आगे कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में अयोध्या “अंधेरे और उपेक्षा” में थी,
जबकि उनकी सरकार ने उसे राम की नगरी का गौरव वापस दिलाया है।
योगी बोले — “जो लोग राम भक्तों पर गोलियां चलाते थे, वे अब परेशान हैं कि अयोध्या दीपों से जगमगा रही है। यह उनकी मानसिकता दर्शाता है।”
राजनीतिक और जन प्रतिक्रियाएं
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “जो लोग सैफई के नाच-गानों में रमते थे, उन्हें अब अयोध्या का दीपोत्सव अखर रहा है।” वहीं विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने अखिलेश पर “विदेशी संस्कृति का महिमामंडन” करने का आरोप लगाया और कहा कि “दिवाली हजारों साल पुराना त्योहार है, इसे क्रिसमस से तुलना करना अज्ञान और असंवेदनशीलता है।”
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने सफाई देते हुए कहा कि अखिलेश यादव के बयान को तोड़ा-मरोड़ा गया।
आने वाले चुनाव और सियासी मायने
आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में राजनीतिक टकराव का संकेत भी है।
योगी आदित्यनाथ खुद को सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक गौरव के रक्षक के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं,
जबकि अखिलेश यादव “धर्म की राजनीति” का विरोध करते हुए एक सेक्युलर छवि को मजबूत करना चाहते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे सांस्कृतिक विवाद अब उत्तर प्रदेश की राजनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
त्यौहार से पहले बढ़ी सियासी जंग
अयोध्या में दिवाली के ऐतिहासिक दीपोत्सव के दौरान राजनीति ने फिर एक बार त्योहार की चमक फीकी कर दी।
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योगी ने अपने भाषण में कहा —
भगवान राम का प्रकाश कभी अयोध्या से मद्धम नहीं होगा।
जो लोग इसे बुझाने चले थे, उन्होंने साबित कर दिया कि नेतृत्व विरासत से नहीं, कर्म से मिलता है।
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