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योगी आदित्यनाथ वंदे मातरम भाषण: बाराबंकी में बोले — भारत में रहकर भारत माता का अपमान नहीं चलेगा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाराबंकी के दौरे के दौरान दिए गए अपने जोशीले भाषण से एक बार फिर सुर्खियां बटोरीं।

योगी आदित्यनाथ वंदे मातरम भाषण

योगी आदित्यनाथ वंदे मातरम भाषण: उन्होंने “वंदे मातरम” का विरोध करने वालों पर करारा प्रहार करते हुए कहा —

“भारत में रहेंगे, भारत का खाएंगे, लेकिन जब ‘वंदे मातरम’ बोलने की बात आती है, तो चुप क्यों हो जाते हैं?”

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जो लोग भारत की भूमि पर रहते हुए, इसकी हवा और जल से जीवन पा रहे हैं,
उन्हें भारत माता और वंदे मातरम के सम्मान में एक स्वर से जुड़ना चाहिए।


वंदे मातरम का ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व

  • वंदे मातरम, जिसे बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था, भारत का राष्ट्रीय गीत (National Song) है।
  • स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत देशभक्ति, एकता और बलिदान का प्रतीक बना।
  • इस गीत ने भारत माता को पूजनीय स्वरूप में प्रस्तुत करते हुए हर भारतीय को एक सूत्र में बांधा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में कहा —

“वंदे मातरम किसी धर्म, जाति या पंथ का प्रतीक नहीं है। यह भारत माता के प्रति श्रद्धा का भाव है। जो इसका विरोध करता है, वह भारत माता का विरोध करता है।”


योगी आदित्यनाथ का संदेश: आधी-अधूरी देशभक्ति नहीं चलेगी

बाराबंकी में आयोजित राष्ट्रीय एकता यात्रा (Rashtriya Ekta Yatra) के शुभारंभ कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने कहा —

“वंदे मातरम का विरोध करने वाला व्यक्ति, भारत माता का विरोधी है। यह गीत किसी एक समुदाय या पंथ का नहीं, बल्कि पूरे भारत का सम्मान है।”

उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति देवी सरस्वती, लक्ष्मी और दुर्गा की पूजा से आती है, और देशभक्ति इन शक्तियों का सम्मान करने से ही प्रकट होती है।

योगी ने साफ शब्दों में कहा —

“भारत की एकता और भारत माता के सम्मान से बड़ा कोई विचार या मत नहीं हो सकता।”


विद्यालयों और कॉलेजों में वंदे मातरम अनिवार्य

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश के सभी विद्यालयों और महाविद्यालयों में ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों में बचपन से ही देशभक्ति और एकता की भावना विकसित होगी।

योगी ने शिक्षण संस्थानों को प्रेरित किया कि वे

“भारत क्या है, वंदे मातरम का अर्थ क्या है, और सरदार पटेल जैसे नेताओं ने किस तरह भारत को एक सूत्र में पिरोया” — इन विषयों पर चर्चा करवाएं।


राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

योगी आदित्यनाथ के इस बयान ने फिर से राष्ट्रीय प्रतीकों और धर्मनिरपेक्षता (Secularism) के बीच संतुलन पर बहस छेड़ दी है।

समर्थकों ने इसे “राष्ट्र एकता और गर्व का सशक्त संदेश” बताया,

जबकि आलोचकों ने कहा कि देशभक्ति को जबरदस्ती थोपना नागरिक स्वतंत्रता के खिलाफ है।

इसके बावजूद योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि —

“देशभक्ति किसी विचारधारा का विषय नहीं, बल्कि हर भारतीय का कर्तव्य है।
धर्म, भाषा या जाति से ऊपर उठकर हमें भारत माता की एकता के लिए एक स्वर में बोलना होगा।”

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वंदे मातरम — भारत की एकता का प्रतीक

योगी आदित्यनाथ वंदे मातरम भाषण केवल एक राजनीतिक वक्तव्य नहीं था, बल्कि एक राष्ट्रीय चेतना का आह्वान था।
उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने मतभेद भूलकर भारत माता के सम्मान में एक स्वर से “वंदे मातरम” गाएं।

योगी ने कहा —

“वंदे मातरम कोई गीत नहीं, यह भारत की आत्मा है, यह हमारी एकता का प्रतीक है।”

इस संदेश ने देशभर में एक नई चर्चा छेड़ दी — कि वंदे मातरम केवल राष्ट्रगान नहीं, बल्कि राष्ट्रभाव का प्रतीक है

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