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चीन और रूस के करीब हुआ भारत, PM मोदी की शी जिनपिंग और पुतिन से बातचीत पर US की पैनी नजर

हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से उच्च स्तर की वार्ता की। ये बैठकें बदलती वैश्विक परिस्थितियों और बदलते गठबंधनों के बीच भारत की चीन और रूस से नजदीकी को दर्शाती हैं, वहीं अमेरिका भी इस घटनाक्रम पर नजरें गड़ाए हुए है।

चीन और रूस के करीब हुआ भारत

🤝 दमदार कूटनीति की झलक

तिआनजिन समिट में विश्व के शक्तिशाली नेता व्यापार, सुरक्षा और वैश्विक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा करने जुटे।

पीएम मोदी की शी और पुतिन से मुलाकातें सौहार्द, सम्मान और साझा हितों पर केंद्रित रहीं।

इन सत्रों में विवादित सीमाओं पर शांति बहाली, आर्थिक सहयोग बढ़ाने और ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर बात हुई।

भारत को अक्सर संतुलन साधने वाली ताकत माना जाता है,

लेकिन हाल के वर्षों में वह चीन और रूस के साथ अधिक सक्रियता से संवाद बढ़ा रहा है,

जबकि पश्चिम से संबंध भी बनाए हुए है।

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📈 बदलता विश्व क्रम और रणनीतिक तैयारी

तीरतरफा वार्ता भारत का एक सशक्त कदम है, जिससे वह बदलती वैश्विक स्थिति में अपनी अहमियत बनाए रख सके। जैसे-जैसे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित होती हैं और व्यापार युद्ध जारी हैं, भारत अपने हितों को सुरक्षित रखने के लिए चीन-रूस के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता दे रहा है।

मोदी और शी के बीच सीमा प्रबंधन, व्यापार अवसरों और राजनयिक वार्ता पुनः शुरू करने के उपायों पर चर्चा हुई।

पुतिन के साथ एनर्जी, रक्षा समझौतों और तकनीकी विकास पर फोकस रहा।

तीनों नेताओं ने खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सहयोग पर भी बात की।


🇺🇸 अमेरिका की चिंता

भारत की चीन और रूस से बढ़ती नजदीकी को अमेरिका ने खासतौर पर नोट किया है। अमेरिकी अधिकारी भारत की इन सहयोगी गतिविधियों को अपनी रणनीतिक योजनाओं के लिए चुनौती मानते हैं। अमेरिका चिंतित है कि अगर भारत स्वतंत्र कूटनीति अपनाता है, तो वॉशिंगटन के लिए बीजिंग और मॉस्को के खिलाफ सहयोगी बनाना मुश्किल हो जाएगा।

भारत का रुख इसी बात को दर्शाता है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देता है,

बिना वैश्विक सामर्थ्य संघर्षों में खुलकर पक्ष लेने के।

भारत अमेरिकी, चीनी और रूसी संबंधों में संतुलन के लिए शांत और कुशल कूटनीति अपनाता है।


🔄 प्रतिक्रियाएं और आगे की राह

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ये वार्ताएं भविष्य के गठबंधनों को लेकर चर्चाओं का विषय बनी हुई हैं।

भारतीय अधिकारी कहते हैं, भारत ऐसे संबंध बनाए रखेगा जिससे देश के लोगों का हित और क्षेत्रीय शांति बनी रहे।

SCO समिट का आयोजन भारत की आत्मनिर्भर विदेश नीति का प्रतीक बन गया है। पीएम मोदी के शी और पुतिन के साथ साथ चलकर बातचीत करना, वैश्विक घटनाओं पर चर्चा और मतभेदों का समाधान खोजने की भारत की बढ़ती सामर्थ्य को दर्शाता है।


📝 निष्कर्ष

पीएम मोदी की शी जिनपिंग और पुतिन से बातचीत भारतीय विदेश नीति का मूल सिद्धांत साबित करती है: राष्ट्रीय हितों की पूर्ति के लिए हर शक्तिशाली देश से संवाद। भारत की स्वतंत्र कूटनीति ने उसे वैश्विक केंद्र में ला दिया है, और यह आने वाले समय में विश्व राजनीति के नए समीकरणों की शुरुआत है।

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