लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) Start स्वदेशी 2.0 मूवमेंट, अमेरिकी ड्रिंक्स पर लगाया बैन
जालंधर (पंजाब): लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) ने एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाते हुए भारत की व्यापार और टैरिफ बहस में सीधे उतरने का ऐलान किया है। विशाल कैंपस और विविध छात्र-समुदाय वाली इस यूनिवर्सिटी ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि कैंपस में कोई भी अमेरिकी सॉफ्ट ड्रिंक, जिनमें कोका-कोला और पेप्सी जैसे बड़े नाम शामिल हैं, बेचे या विज्ञापित नहीं किए जाएंगे।

इस फैसले की घोषणा यूनिवर्सिटी के फाउंडर-चांसलर और आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने की।
स्वदेशी 2.0 मूवमेंट की शुरुआत
डॉ. मित्तल ने इसे स्वदेशी 2.0 नामक बड़े राष्ट्रीय अभियान का पहला कदम बताया।
उनका कहना है कि इसका मकसद देश के युवाओं को प्रेरित करना है,
वे विदेशी मल्टीनेशनल कंपनियों पर निर्भर होने की बजाय भारतीय उत्पादों को अपनाएँ।
यह अभियान भारत के स्वतंत्रता संग्राम काल के स्वदेशी आंदोलन से प्रेरित है, जब लोगों से विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने का आग्रह किया गया था। लक्ष्य स्पष्ट है—आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी आर्थिक आत्मनिर्भरता को फिर से हासिल करना।
डॉ. मित्तल ने छात्रों से कहा: “भारत का युवा उपभोग की आदतें बदल सकता है। अगर हम अपने किसानों, उद्यमियों और ब्रांड्स को प्राथमिकता देंगे, तो हम ऐसी मज़बूत अर्थव्यवस्था बना पाएंगे जो विदेशी कंपनियों पर निर्भर न हो।”
टैरिफ वार और ग्लोबल राजनीति
यह घोषणा ऐसे समय आई है जब दुनियाभर में टैरिफ और व्यापारिक बचाव नीतियों को लेकर बहस तेज हो रही है।
अमेरिकी ड्रिंक्स पर कैंपस बैन केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि यह वैश्विक व्यापारिक खींचतान पर भारत की पोज़िशनिंग भी दर्शाता है।
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छात्रों के लिए इसका क्या मतलब?
अब LPU के छात्र कैंपस में कोका-कोला, पेप्सी या किसी भी अमेरिकी ड्रिंक को नहीं खरीद सकेंगे।
इसके बदले यूनिवर्सिटी ने वादा किया है कि वह स्थानीय और देसी विकल्पों को बढ़ावा देगी—जैसे नींबू पानी, जलजीरा, छाछ और देशी ब्रांड्स।
छात्रों की शुरुआती प्रतिक्रिया मिली-जुली है। कुछ इसे राष्ट्रीय गौरव और हेल्दी च्वॉइस मानते हैं, जबकि अन्य इसे पर्सनल फ्रीडम की पाबंदी कहते हैं। लेकिन प्रशासन का मानना है कि इस तरह की नीतियां युवाओं को आर्थिक संप्रभुता पर सोचने का अवसर देती हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर स्वदेशी 2.0
डॉ. मित्तल ने इसे पूरे देश में फैलाने की योजना साझा की। इसके 3 मुख्य स्तंभ होंगे:
- युवा जागरूकता – छात्रों को यह बताना कि विदेशी ब्रांड्स भारतीय किसानों और उद्योगों पर कितना प्रभाव डालते हैं।
- स्थानीय ब्रांड्स को बढ़ावा – छोटे और मंझोले भारतीय निर्माताओं की मदद करना।
- पॉलिसी एडवोकेसी – नेताओं और व्यापारियों को प्रेरित करना कि वे ऐसी नीतियां बनाएं जो भारतीय उत्पादों के हित में हों।
यह निर्णय केवल कुछ ड्रिंक्स रोकने का मामला नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और सांस्कृतिक बयान है।
यह आत्मनिर्भर भारत (Self Dependent) मिशन से पूरी तरह मेल खाता है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अन्य यूनिवर्सिटीज़ भी ऐसे कदम उठाएंगी।
फिलहाल, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी एक अहम बहस के केंद्र में है,
क्या आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में नया भारतीय युवा स्वदेशी आंदोलन को आधुनिक रूप दे सकता है?
डॉ. मित्तल के स्वदेशी 2.0 लॉन्च से इसका जवाब “हाँ” की ओर जाता दिखाई देता है।
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