केरल स्थानीय निकाय चुनाव: शाह का मिशन 20,000 सीटें और 25% वोट शेयर
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने केरल में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के लिए एक बड़ा लक्ष्य तय किया है — लगभग 23,612 वार्ड्स में से 20,000 सीटें जीतना और कम से कम 25% वोट शेयर हासिल करना। यह अभियान केवल एक चुनावी योजना नहीं है, बल्कि एक स्थायी राजनीतिक उपस्थिति स्थापित करने की दीर्घकालिक रणनीति है।

1. केरल स्थानीय निकाय चुनाव
नवंबर-दिसंबर 2025 में केरल में छह नगर निगम, 87 नगरपालिका, 14 जिला पंचायत और 1200 से अधिक ग्राम व ब्लॉक पंचायतों में चुनाव होंगे। यदि भाजपा अच्छा प्रदर्शन करती है, तो वह:
- उत्तर भारत के बाहर अपनी स्वीकृति को दर्शा सकती है।
- 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले स्थानीय स्तर पर मजबूत आधार बना सकती है।
- LDF/UDF के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को चुनौती दे सकती है।
2. शाह की संख्यात्मक रणनीति
थिरुवनंतपुरम में हुए एक नेतृत्व सम्मेलन में शाह ने बताया कि:
- पार्टी 21,000 से 23,600 वार्ड्स में चुनाव लड़ेगी।
- लक्ष्य 20,000 जीत का है।
- न्यूनतम 25% वोट शेयर सुनिश्चित करना है।
2020 में भाजपा को लगभग 15% वोट, 1600 वार्ड्स और दो नगरपालिकाओं में जीत मिली थी। अब 25% को एक स्मार्ट लक्ष्य माना गया है — अंतिम मंजिल नहीं।
3. जमीनी रणनीति: बूथ स्तर से शुरुआत
- प्रत्येक बूथ पर समर्पित कोऑर्डिनेटर नियुक्त किए गए हैं।
- फोकस शहरों पर: विशेष रूप से थिरुवनंतपुरम और त्रिशूर को “शहरी गढ़” माना गया है।
- हर बूथ पर संगठनात्मक ढांचा खड़ा किया गया है।
राज्य महासचिव एम.टी. रमेश ने बताया कि वॉर्ड स्तर पर टीमें स्थानीय मुद्दे, वोटर भावना और विकास एजेंडा पर डाटा जुटा रही हैं।
4. शाह की राजनीतिक कहानी
LDF को उन्होंने भ्रष्टाचार, पार्टी स्वार्थ और PFI जैसे कट्टर संगठनों से मिलीभगत के लिए घेरा।
UDF को अशासन और अनैतिक व्यवहार का प्रतीक बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा 2014 के 11% वोट से 2024 में 20% तक पहुंची — जो दर्शाता है कि यह अब केवल उत्तर भारत की पार्टी नहीं रही।
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5. भाजपा की दीर्घकालिक योजना
स्थानीय निकायों में जीत से:
- पार्टी स्थानीय व जिला स्तर पर प्रभावशाली विपक्ष बन सकती है।
- 2026 विधानसभा के लिए मंच तैयार होगा।
- युवा, महिलाएं और ईसाई मतदाताओं का समर्थन बढ़ सकता है।
6. संभावित चुनौतियां
- LDF/UDF का मौजूदा ढांचा काफी मजबूत है।
- व्यक्तिगत निष्ठा और पहचान की राजनीति बीजेपी की राह में रुकावट बन सकती है।
- धार्मिक ध्रुवीकरण के आरोप भी चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
- राज्य मीडिया और विपक्षी प्रचार से भाजपा के संदेश की धार कुंद हो सकती है।
7. केरल स्थानीय निकाय चुनाव पर प्रभाव
अगर भाजपा 20,000 सीटें और 25% वोट पाती है:
- स्थानीय स्तर पर नीतिगत दखल बढ़ेगा।
- राज्य की राजनीति में LDF/UDF की बारी-बारी से सरकार का सिलसिला टूट सकता है।
- दक्षिण भारत में भाजपा की जड़ें जमाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
8. मतदाताओं को क्या देखना चाहिए?
- भाजपा को शहरी बनाम ग्रामीण इलाकों में कहां समर्थन मिल रहा है?
- पार्टी की बूथ स्तर पर कार्यकुशलता कैसी है?
- LDF और UDF क्या संयुक्त रणनीति बना रहे हैं?
- क्या विक्सित केरलम का संदेश मतदाताओं तक पहुंच रहा है?
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