भारत निर्वाचन आयोग ने शुरू किया विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision)
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पूरे देश में विशेष गहन संशोधन शुरू करने जा रहा है। यह प्रक्रिया अगले चार से पाँच दिनों में प्रारंभ होगी। इस बड़े अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची सटीक हो और प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम उसमें शामिल हो।

बिहार में हाल ही में पूरी की गई संशोधन प्रक्रिया को आधार बनाकर यह राष्ट्रीय स्तर पर लागू की जाएगी। प्रत्येक चरण लगभग तीन महीने का होगा, और वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इसे दो चरणों में पूरा किया जा सकता है ताकि राज्यों की परिस्थितियों और व्यवस्थागत चुनौतियों का ध्यान रखा जा सके।
निर्वाचन आयोग की बैठक से मुख्य बिंदु
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ग्यानेश कुमार और अन्य वरिष्ठ आयुक्तों की उपस्थिति में हुई उच्चस्तरीय बैठक में विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई रणनीतियाँ तय की गईं। बिहार में हाल में पूरी हुई इस प्रक्रिया ने यह दिखाया कि पुराने, डुप्लीकेट या अयोग्य मतदाताओं को हटाना और नए पात्र मतदाताओं को शामिल करना किस तरह से संभव है। यह पूरी प्रक्रिया चार महीने में पूरी हुई और इसने मतदाता सूची की विश्वसनीयता बढ़ाई, साथ ही समावेशिता और पारदर्शिता पर नए विमर्श खोले।
चरणबद्ध विस्तार और अपवर्जन
आगामी विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision) चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में लगभग 10–15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया जाएगा, जिनमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी जैसे विधानसभा चुनाव वाले राज्य प्रमुख होंगे। वहीं जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम जैसे बर्फीले क्षेत्र दूसरे चरण में शामिल होंगे, जो सर्दियों के बाद शुरू होगा।
स्थानीय निकाय चुनावों वाले राज्यों में इस प्रक्रिया को स्थगित रखा जाएगा ताकि प्रशासनिक ओवरलैप से बचा जा सके।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रक्रिया और पारदर्शिता
यह संशोधन वार्षिक या सामान्य अद्यतन से अलग है, क्योंकि इसमें मतदाता सूची को पूरी तरह से नए सिरे से तैयार किया जाएगा। हर मतदाता को नए एन्यूमरेशन फॉर्म भरने होंगे और बूथ स्तर अधिकारी घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। इसके साथ ही आयोग ने मतदाता सूची के डिजिटलाइजेशन पर भी ज़ोर दिया है ताकि पुराने डेटा (2002–2004) से तुलना कर सटीकता सुनिश्चित की जा सके।
आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना उचित कारण के न हटाया जाए,
जैसा कि बिहार में कुछ शिकायतें आई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शिता, हटाए गए नामों की सार्वजनिक सूची,
और शिकायत निवारण तंत्र की आवश्यकता पर भी बल दिया है।
भारतीय लोकतंत्र के लिए महत्व
विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision) को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।
यह न केवल निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों को मज़बूत करेगा,
बल्कि शहरीकरण और पलायनशील जनसंख्या के युग में सही मतदाता सूची सुनिश्चित करेगा।
ये भी पढ़ें: योगी का अखिलेश पर निशाना, दिवाली पर बयान से भड़का सियासी तूफान
यदि यह प्रक्रिया पारदर्शी और सटीक ढंग से पूरी होती है,
तो यह जनता के विश्वास को मजबूत करेगी और चुनावी प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाएगी।
khaberbox.com पर पढ़ें ताजा समाचार (हिंदी समाचार), मनोरंजन, खेल, क्रिकेट, राजनीति, धर्म, शिक्षा, बाज़ार और प्रौद्योगिकी से जुड़ी हर खबर। समय पर अपडेट या हिंदी ब्रेकिंग न्यूज के लिए खबर बॉक्स चुनें। अपने समाचार अनुभव को और बेहतर बनाएं।

