CP राधाकृष्णन होंगे एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार – जेपी नड्डा ने की घोषणा
भारतीय राजनीति में एक और बड़ा ऐलान सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष जेपी नड्डा ने औपचारिक रूप से घोषणा की है कि सी.पी. राधाकृष्णन (CP Radhakrishnan) को एनडीए (NDA) का उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया है। इस घोषणा के बाद देशभर में चर्चा तेज हो गई है क्योंकि राधाकृष्णन एक सादगीपूर्ण, जमीनी और संगठनात्मक राजनीति में लंबे समय से सक्रिय चेहरा रहे हैं।

कौन हैं सी.पी. राधाकृष्णन?
सी.पी. राधाकृष्णन का जन्म तमिलनाडु में हुआ और वे हमेशा से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा की विचारधारा से जुड़े रहे हैं।
- उन्होंने दो बार कोयंबटूर से लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया है।
- वे भाजपा के तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
- राधाकृष्णन अपनी सादगी, साफ-सुथरी छवि और निष्ठावान कार्यकर्ता के तौर पर पहचाने जाते हैं।
उनका राजनीतिक सफर सिर्फ चुनाव जीतने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संगठन निर्माण और कार्यकर्ताओं को मजबूत करने पर उनका विशेष फोकस रहा है।
जेपी नड्डा का ऐलान
घोषणा करते हुए भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि:
“सी.पी. राधाकृष्णन एक समर्पित कार्यकर्ता हैं जिन्होंने हमेशा संगठन और देशहित को सर्वोपरि रखा है। उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए नामित करना एनडीए के लिए गर्व की बात है।”
यह बयान राधाकृष्णन की नैतिकता और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।
राजनीतिक संदेश और महत्व
सी.पी. राधाकृष्णन का नाम उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में सामने आने के कई मायने हैं:
- दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु में भाजपा की पैठ बढ़ाने का यह एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
- उनकी साफ-सुथरी छवि विपक्ष को भी एक सकारात्मक संदेश देती है।
- यह एनडीए का संकेत है कि वह केवल राजनीति ही नहीं बल्कि ईमानदारी और सामाजिक मूल्यों को भी प्राथमिकता देता है।
राधाकृष्णन की छवि
सी.पी. राधाकृष्णन को हमेशा “जनता का नेता” कहा जाता है।
- वे साधारण जीवन जीते हैं और जनता से सीधे संवाद में विश्वास रखते हैं।
- अपने निर्वाचन क्षेत्र कोयंबटूर में उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत ढांचे पर काम किया है।
- लोग उन्हें एक सच्चे सेवक के रूप में देखते हैं, न कि सिर्फ एक राजनेता के तौर पर।
उपराष्ट्रपति पद की भूमिका
भारत का उपराष्ट्रपति पद केवल एक संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक संतुलन और लोकतांत्रिक परंपराओं का प्रतीक भी है।
- उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति होते हैं।
- यह पद ऐसे व्यक्ति को चाहिए जो निष्पक्षता, शालीनता और संतुलन बनाए रख सके।
सी.पी. राधाकृष्णन का राजनीतिक और सामाजिक अनुभव उन्हें इस भूमिका के लिए एक उपयुक्त उम्मीदवार बनाता है।
जनता की प्रतिक्रियाएँ
घोषणा के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर #CPRadhakrishnan और #NDAVicePresidentCandidate ट्रेंड करने लगे।
- समर्थकों ने इसे एक “जनता का चयन” बताया।
- विपक्ष की ओर से भी उन्हें एक सशक्त उम्मीदवार माना जा रहा है।
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निष्कर्ष
सी.पी. राधाकृष्णन का नाम उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर सामने आना भारतीय राजनीति में एक नई उम्मीद और नई दिशा का संकेत है। उनकी सादगी, पारदर्शिता और जनता से जुड़ाव उन्हें खास बनाता है।
भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि उपराष्ट्रपति के रूप में वे किस तरह से भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और राज्यसभा के संचालन में योगदान देते हैं।
कुल मिलाकर, यह घोषणा केवल एक नाम का ऐलान नहीं है, बल्कि यह भारतीय राजनीति में नैतिकता, ईमानदारी और जनसेवा की जीत का प्रतीक है।
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