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Ram Rahim Castration Case CBI Court: 5 मार्च को CBI कोर्ट में अहम सुनवाई

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख Gurmeet Ram Rahim Singh और दो डॉक्टरों के खिलाफ कथित नपुंसकीकरण मामले में 5 मार्च को सीबीआई अदालत में सुनवाई तय है। यह मामला कई वर्षों से कानूनी प्रक्रिया से गुजर रहा है और अब एक बार फिर अदालत में इसकी महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है।

आरोप है कि कुछ अनुयायियों को आध्यात्मिक लाभ या मोक्ष का लालच देकर उनका कथित रूप से नपुंसकीकरण कराया गया। यह मामला सामने आने के बाद देशभर में चर्चा और विवाद का विषय बन गया था।

राम रहीम नपुंसक बनाने का केस सीबीआई कोर्ट

Ram Rahim Castration Case CBI Court: मामला क्या है?

सीबीआई जांच के अनुसार, कुछ अनुयायियों ने आरोप लगाया कि उन्हें डेरा परिसर में विशेष धार्मिक कारणों का हवाला देकर ऑपरेशन के लिए राजी किया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह प्रक्रिया उनकी जानकारी और स्वतंत्र सहमति के बिना या दबाव में कराई गई।

इस केस में दो डॉक्टरों को भी आरोपी बनाया गया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने इन सर्जिकल प्रक्रियाओं को अंजाम दिया। जांच एजेंसियों ने मेडिकल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेजों के आधार पर मामला तैयार किया।


कानूनी प्रक्रिया और पिछली सुनवाई

यह केस काफी समय से अदालत में लंबित है। कई बार गवाहों के बयान दर्ज किए गए और बचाव पक्ष ने भी अपने तर्क रखे। बचाव पक्ष का कहना है कि सभी आरोप निराधार हैं और सर्जरी संबंधित दावे तथ्यों से परे हैं।

5 मार्च की सुनवाई में अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुन सकती है और आगे की प्रक्रिया तय कर सकती है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुनवाई केस की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है।


सुरक्षा और प्रशासन की तैयारी

Ram Rahim Castration Case CBI Court: राम रहीम से जुड़े मामलों में पहले भी सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहने की संभावना है, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो। प्रशासन ने एहतियातन अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने की तैयारी की है।


समाज और अनुयायियों पर असर

यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील है।

डेरा सच्चा सौदा के लाखों अनुयायी हैं, जिनमें से कई अपने गुरु के समर्थन में खड़े रहे हैं।

वहीं, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि न्याय मिलना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं।

इस केस ने धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी बहस छेड़ दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और पारदर्शी सुनवाई बेहद जरूरी होती है।

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अदालत के फैसले पर टिकी नजरें

5 मार्च को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

यह देखना अहम होगा कि अदालत किस तरह के निर्देश जारी करती है

और आगे की कानूनी कार्रवाई क्या रूप लेती है।

फिलहाल आरोपी पक्ष ने सभी आरोपों से इनकार किया है और अदालत में अपने बचाव के लिए तैयार है।

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