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आम आदमी पार्टी ने INDIA गठबंधन से हमेशा के लिए नाता तोड़ा

आम आदमी पार्टी (AAP) ने आधिकारिक रूप से INDIA गठबंधन से बाहर होने की घोषणा कर दी है, जो भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ है। यह निर्णय विपक्षी दलों में खलबली मचा चुका है। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि यह गठबंधन केवल लोकसभा चुनावों तक सीमित था, और अब पार्टी प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों पर अकेले आगे बढ़ेगी। आइए इस फैसले की पृष्ठभूमि, कारणों, नतीजों और इसके आगामी चुनावों (खासकर पंजाब और बिहार) पर प्रभाव को विस्तार से समझते हैं।

आम आदमी पार्टी

1. पृष्ठभूमि: INDIA गठबंधन क्या था?

INDIA (Indian National Developmental Inclusive Alliance) एक राजनीतिक गठबंधन था जिसे जुलाई 2023 में 28 विपक्षी दलों ने मिलकर बनाया था, जिसका लक्ष्य 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा-नीत NDA को टक्कर देना था।

इस गठबंधन में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस जैसे बड़े दल शामिल थे।

हालांकि यह गठबंधन सत्ता में नहीं आ सका, लेकिन 234 सीटें जीतकर यह एक मजबूत विपक्षी ताकत बनकर उभरा।


2. AAP का गठबंधन में जुड़ना और शुरुआती उद्देश्य

AAP इस गठबंधन में मुख्य रूप से 2024 के आम चुनावों के लिए शामिल हुआ था, खासकर दिल्ली,

हरियाणा जैसे राज्यों में कांग्रेस के साथ सीट साझा करने के लिए।

हालांकि, चुनावों के बाद AAP ने पंजाब और हरियाणा में विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला लिया,

जिससे गठबंधन की दीर्घकालिक स्थिरता पर सवाल उठने लगे।


3. आधिकारिक ऐलान: साफ और सीधा अलगाव

18 जुलाई 2025 को संजय सिंह ने ऐलान किया कि AAP अब INDIA गठबंधन की आगामी बैठकों में शामिल नहीं होगा। उन्होंने कहा:

  • 2024 का समझौता केवल चुनावी था।
  • अब AAP राज्य चुनावों (जैसे बिहार) में अकेले लड़ेगी।
  • संसद में ‘बुलडोजर राजनीति’ जैसे मुद्दों को स्वतंत्र रूप से उठाएगी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव के बाद गठबंधन को संभाल नहीं सकी।


4. अलगाव के कारण

A. रणनीतिक स्वतंत्रता
AAP अपनी क्षेत्रीय पहचान बनाए रखना चाहती है और दिल्ली, पंजाब, बिहार जैसे मजबूत गढ़ों में बिना गठबंधन के लड़ना चाहती है।

B. बुलडोजर राजनीति पर फोकस
AAP सरकारों द्वारा की जा रही टारगेटेड ध्वस्तीकरण की निंदा करती है और इस विषय को स्वतंत्र रूप से उठाना चाहती है।

C. कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने गठबंधन को जोड़कर रखने में विफलता दिखाई और गुप्त राजनीतिक सौदेबाज़ियों में लिप्त रही।


5. अन्य दलों की प्रतिक्रिया

कांग्रेस पार्टी
कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी और AAP पर “डबल गेम” खेलने का आरोप लगाया। कांग्रेस प्रवक्ता प्रताप बाजवा ने AAP को “जूनियर पार्टनर” कहा जिसने विपक्ष की एकता को नुकसान पहुंचाया।

राजनीतिक विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि AAP का यह कदम बहु-दलीय गठबंधनों की नाजुकता को दर्शाता है।

हर क्षेत्रीय दल अब अपने एजेंडे पर काम कर रहा है।


6. तात्कालिक राजनीतिक प्रभाव

A. बिहार विधानसभा चुनाव


AAP बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों के लिए पूरी तैयारी में है और बिना गठबंधन के चुनाव लड़ने की योजना बना रही है।

B. मानसून सत्र में प्रभाव

संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले AAP का बाहर आना विपक्ष की एकता को कमजोर करता है,

जिससे महत्त्वपूर्ण विधेयकों पर सामूहिक रणनीति बनाना मुश्किल होगा।


7. दीर्घकालिक प्रभाव

A. INDIA गठबंधन की कमजोरी
नितीश कुमार, RLD और अब AAP जैसे दलों के बाहर आने से गठबंधन कमजोर होता जा रहा है।

B. चुनाव रणनीति में बदलाव
राष्ट्रीय स्तर की विपक्षी एकता अब कठिन होती जा रही है, क्योंकि क्षेत्रीय दल अपने दम पर चुनाव जीतने की रणनीति बना रहे हैं।

C. क्या AAP बनेगा तीसरा मोर्चा?
AAP पंजाब और दिल्ली में अपने प्रदर्शन को आधार बनाकर राष्ट्रीय विकल्प बनने की कोशिश कर रही है।

लेकिन यह तभी संभव है जब उसे और समर्थन मिले।


8. विपक्ष एक चौराहे पर

AAP का आधिकारिक तौर पर INDIA गठबंधन से बाहर आना 2024 के बाद की राजनीति में एक नया मोड़ है। यह निर्णय दर्शाता है:

  • अवसरवादी राजनीति पर आधारित व्यापक गठबंधनों की सीमाएं।
  • क्षेत्रीय ताकतों की बढ़ती भूमिका।
  • बिखरे विपक्ष के खिलाफ भाजपा की बढ़त।

आगामी बिहार विधानसभा चुनाव और अन्य राज्यों के चुनावों में देखना होगा कि AAP अकेले कितनी मजबूती से उभर पाती है।

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