₹9 Lakh Crore Wiped Out: कुछ ही दिनों में ₹9 लाख करोड़ का सफाया: मार्केट में ऐसी क्या गड़बड़ हुई?
भारतीय शेयर बाजार एक बार फिर भारी गिरावट की चपेट में है। कुछ ही दिनों में निवेशकों की लगभग ₹9 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति मिट गई। बेंचमार्क इंडेक्स लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ बंद हुए और बाजार की चौड़ाई भी कमजोर दिखी। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि निवेशक इतने तेज़ी से घबराए और बाजार इस तरह फिसल गया? विश्लेषकों की मानें तो इस गिरावट के पीछे एक नहीं, बल्कि कई कारक एक साथ काम कर रहे हैं – अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी, विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली, डॉलर की मजबूती, और घरेलू बाज़ार की ओवरवेल्यूएशन चिंताएँ।

₹9 Lakh Crore Wiped Out: US टैरिफ चिंता ने बढ़ाई हलचल
मार्केट की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक अमेरिकी टैरिफ नीति है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका कुछ चुनिंदा उत्पादों पर नए या बढ़े हुए आयात शुल्क पर विचार कर रहा है। इससे:
- एक्सपोर्ट सेक्टर में अनिश्चितता
- ग्लोबल ट्रेड फ्लो पर दबाव
- भारतीय विनिर्माण क्षेत्र पर संभावित असर
जैसी चिंताएँ पैदा हुईं।
भारतीय बाजार का ग्लोबल इंडेक्स से संबंध मजबूत होने के कारण किसी भी अंतरराष्ट्रीय तनाव का सीधा असर घरेलू मार्केट पर दिखाई देता है।
भारी FII बिकवाली
हाल के सत्रों में Foreign Institutional Investors (FII) ने बड़ी मात्रा में बिकवाली की है।
जब विदेशी संस्थागत निवेशक बाजार में बड़े पैमाने पर सेलिंग करते हैं, तो सबसे पहले:
- लिक्विडिटी घटती है
- वोलैटिलिटी बढ़ती है
- सेंटीमेंट कमजोर पड़ता है
और यह चेन रिएक्शन की तरह पूरे बाजार में फैल जाता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, FIIs डॉलर की मजबूत स्थिति, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, और जोखिम भरे एसेट्स से दूरी की रणनीति अपनाते हुए उभरते बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं।
बाज़ार चौड़ाई कमजोर
गिरावट केवल इंडेक्स में नहीं बल्कि बाज़ार की चौड़ाई (Market Breadth) में भी दिखाई दी।
Midcap और Smallcap शेयरों में तेजी से गिरावट ने निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ाया।
अक्सर ऐसा तब होता है जब बाजार ओवर-एक्सटेंडेड होता है और किसी बाहरी झटके का असर अधिक दिखता है।
विशेषज्ञ इसे “Healthy Correction” भी कह रहे हैं, क्योंकि पिछले महीनों में छोटे और मध्यम कैप स्टॉक्स ने असाधारण रिटर्न दिए थे।
Valuation का दबाव
भारत का इक्विटी मार्केट पिछले एक साल में दुनिया के सबसे मजबूत बाजारों में शामिल रहा, लेकिन इसके साथ एक चिंता अब भी जीवित रही—Valuation।
कई सेक्टरों और कंपनियों के शेयर अपने ऐतिहासिक मल्टीपल्स से बहुत ऊपर ट्रेड कर रहे थे, ऐसे में किसी भी नकारात्मक खबर ने बाजार को नीचे खींचने में ज्यादा समय नहीं लिया।
निवेशकों की प्रतिक्रिया: Panic Selling vs Profit Booking
बाजार गिरने पर दो तरह की प्रतिक्रिया सामने आई:
- कुछ निवेशकों ने Panic Selling की
- कई ने इसे Profit Booking का मौका माना
Mutual Fund SIP निवेश अभी भी स्थिर दिखा, लेकिन ट्रेडर्स और शॉर्ट-टर्म खिलाड़ियों में दबाव स्पष्ट था।
₹9 Lakh Crore Wiped Out: कैसे मिटे ₹9 लाख करोड़?
जब Sensex और Nifty गिरते हैं, तो उनके साथ बाजार की कुल Market Capitalization भी गिरती है।
बीते कुछ दिनों में:
- बेंचमार्क इंडेक्स नीचे गए
- Midcap और Smallcap करेक्शन में आए
- FII आउटफ्लो बढ़ा
- Global Sentiment कमजोर रहा
इन सबका संयुक्त प्रभाव निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा।
आगे क्या? Recovery के संकेत या और दबाव?
विश्लेषक आगे तीन चीज़ों पर नज़र रख रहे हैं:
1. अमेरिका-चीन व्यापार अपडेट
अगर टैरिफ से जुड़े संकेत सकारात्मक आते हैं, तो बाजार में कुछ सुधार हो सकता है।
2. FII Trend
अगर Dollar Index मजबूत रहता है तो FII की बिकवाली जारी रह सकती है।
3. घरेलू Earnings Season
कंपनियों का नतीजा सीजन बाजार को नए संकेत देगा।
अगर कॉर्पोरेट अर्निंग मजबूत रहती है तो गिरावट सीमित हो सकती है।
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निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों की आम राय है कि:
- Panic Selling से बचें
- Portfolio में Diversification रखें
- Valuation पर ध्यान दें
- Mid/Smallcap में लेवरेज न बढ़ाएं
- SIP जारी रखें (लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए)
ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो बाजार की ऐसी गिरावटें सुधार की ओर भी ले जाती हैं।
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