हम बच्चे नहीं कर रहे हैं… लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं या मेरे पति में कोई कमी है
आज की दुनिया में “परफेक्ट लाइफ” का मतलब अक्सर शादी, बच्चे, घर और एक तयशुदा रास्ते से जोड़ा जाता है, जिसे पिछली पीढ़ियाँ अपनाती आई हैं। लेकिन समय बदल रहा है, सोच बदल रही है और व्यक्तिगत निर्णय पहले से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं। जब मैं कहती हूँ कि “हम बच्चे नहीं कर रहे हैं… लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं या मेरे पति में कोई कमी है,” तो यह कई लोगों को चौंका देता है।

अक्सर यह मान लिया जाता है कि बच्चे न करने का फैसला कमजोरी, स्वार्थ या अपरिपक्वता से आता है। लेकिन सच्चाई इससे कहीं गहरी और समझदारी भरी है।
हम बच्चे नहीं कर रहे हैं – यह भी एक सोच-समझकर लिया गया निर्णय है
हम जैसे कई दंपतियों के लिए बच्चे न करने का फैसला अचानक नहीं होता। यह एक जागरूक, सम्मानजनक और परस्पर सहमति वाला निर्णय होता है। हमने वर्षों तक इस पर बात की, इसके प्रभाव को समझा, और खुद से कई मुश्किल सवाल पूछे। और हर बार हमारा जवाब वही रहा—हमारी ज़िंदगी इसी रूप में पूरी है।
यह मान्यता कि बिना बच्चों के कोई महिला या दंपति “अधूरा” है, अब पुरानी हो चुकी है। मातृत्व सुंदर है, लेकिन उतना ही सुंदर है एक ऐसा जीवन जीना जो आपके मूल्य, प्राथमिकताओं और भावनात्मक क्षमता के अनुरूप हो।
संतुष्टि कई रूपों में मिलती है
लोग अक्सर मान लेते हैं कि बच्चों के बिना जीवन खाली हो जाता है।
लेकिन संतुष्टि का एक ही अर्थ नहीं होता। कोई इसे बच्चों की परवरिश में पाता है,
कोई अपने करियर में, कोई रचनात्मकता में, यात्रा में, रिश्तों में या सामाजिक योगदान में।
हमारे लिए संतुष्टि मिलती है—एक-दूसरे को समझने में, अपने शौक पूरे करने में, समाज में योगदान देने में और स्वतंत्र व संतुलित जीवन जीने में। हमारे घर में हँसी, प्यार और अपनापन भरपूर है। हमारे लक्ष्य स्पष्ट हैं, और हमारा रिश्ता मजबूत है। हम बच्चे नहीं कर रहे हैं, और इस निर्णय ने हमें किसी भी चीज़ से वंचित नहीं किया—बल्कि हमारे जीवन को एक अलग, पर उतना ही सही दिशा दी है।
हम स्वार्थी नहीं, बल्कि आत्म-जागरूक हैं
बहुत लोग सोचते हैं कि बच्चे न करने वालों में जिम्मेदारी की कमी होती है।
लेकिन सच तो यह है कि यह फैसलों में परिपक्वता का सबसे बड़ा संकेत है।
व्यक्ति को अपनी भावनात्मक क्षमता, वित्तीय प्राथमिकताओं और जीवनशैली के बारे में स्पष्ट होना चाहिए।
हम जानते हैं कि हम किस तरह का जीवन बनाना चाहते हैं। हमें पता है कि किस तरह का वातावरण हमें खुश रखता है। एक बच्चे का पालन-पोषण जितनी समर्पण मांगता है, वह हम अपने जीवन के अन्य लक्ष्यों की तरफ मोड़ चुके हैं। यह स्वार्थ नह – आत्म-जागरूकता है।
समाज को समझना होगा कि हर जीवन यात्रा अलग होती है
जीवन जीने का कोई एक “सही” तरीका नहीं है। समाज हमें अक्सर एक निर्धारित कहानी देता हैं,
– बड़े हो, शादी करो, बच्चे करो और वही पैटर्न दोहराओ। लेकिन खुशी किसी फार्मूले से नहीं मिलती।
जब हम कहते हैं कि “हम बच्चे नहीं कर रहे हैं… लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं या मेरे पति में कोई कमी है,” तो हम अपनी कहानी खुद तय कर रहे हैं। हम दुनिया को यह बता रहे हैं कि हमारी जिंदगी भी उतनी ही पूरी और सार्थक है, भले ही वह दूसरों से अलग दिखती हो।
हमारा विवाह बच्चों के बिना भी पूर्ण है
किसी शादी की मजबूती बच्चों की उपस्थिति पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि पति-पत्नी एक-दूसरे का कितना साथ देते हैं, समझते हैं और सम्मान करते हैं।
साझा सपने, भावनात्मक स्थिरता और परस्पर सहयोग भी रिश्ते को उतना ही मजबूत बनाते हैं।
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अंत में, खुशी निजी होती है
हर व्यक्ति, हर दंपति और हर परिवार की जरूरतें अलग होती हैं।
जो एक के लिए सही है, वह दूसरे के लिए नहीं हो सकता।
हमारा फैसला किसी और की खुशी को नहीं घटाता—यह बस हमारे लिए सही है।
इसलिए हाँ, हम बच्चे नहीं कर रहे हैं—और नहीं, हममें कोई कमी नहीं है। हमारी जिंदगी पूरी है,
अर्थपूर्ण है और पूरी तरह सम्मान के योग्य है।
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