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SHANTI Nuclear Energy Bill: भारत की ऊर्जा यात्रा में ऐतिहासिक मोड़

भारत की ऊर्जा नीति में एक बड़ा और दूरगामी बदलाव सामने आया है। गुरुवार को संसद ने Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India (SHANTI) Bill को मंजूरी दे दी। यह विधेयक न केवल परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सुधार का संकेत है, बल्कि भारत के 2047 तक 100 गीगावाट (GW) परमाणु ऊर्जा क्षमता के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की दिशा में एक ठोस कदम भी माना जा रहा है। यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब देश तेजी से बढ़ती ऊर्जा जरूरतों, जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा की चुनौती से जूझ रहा है।

SHANTI Nuclear Energy Bill

SHANTI Nuclear Energy Bill क्या है और क्यों है खास?

SHANTI Bill का उद्देश्य भारत में परमाणु ऊर्जा के सतत और सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देना है। अब तक भारत का परमाणु क्षेत्र मुख्य रूप से सरकारी नियंत्रण में रहा है। इस नए कानून के जरिए पहली बार निजी कंपनियों को भी नियंत्रित और सुरक्षित ढंग से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भागीदारी का अवसर मिलेगा।

सरकार का मानना है कि सिर्फ सरकारी संसाधनों के भरोसे 100 GW का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल है। निजी निवेश, तकनीक और नवाचार के साथ यह लक्ष्य ज्यादा व्यवहारिक हो जाता है।


संसद की मंजूरी क्यों है अहम?

यह विधेयक Parliament of India में लंबी चर्चा के बाद पारित हुआ। संसद की मंजूरी का मतलब है कि अब यह नीति केवल प्रस्ताव नहीं, बल्कि कानूनी रूप से लागू होने वाला ढांचा बन चुकी है।

सरकार के अनुसार, इसमें सुरक्षा मानकों, नियामक निगरानी और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है, ताकि किसी भी तरह का जोखिम न हो।


निजी क्षेत्र के लिए क्या बदलेगा?

SHANTI Nuclear Energy Bill के तहत:

  • निजी कंपनियां परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश कर सकेंगी
  • सरकार और निजी क्षेत्र के बीच पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल को बढ़ावा मिलेगा
  • उन्नत तकनीक और वैश्विक अनुभव का लाभ मिलेगा

हालांकि, परमाणु ईंधन, सुरक्षा और रणनीतिक नियंत्रण सरकार के पास ही रहेगा।


2047 तक 100 GW का लक्ष्य क्यों जरूरी है?

भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए:

  • स्थिर और सस्ती ऊर्जा
  • कम कार्बन उत्सर्जन
  • औद्योगिक विकास

बेहद जरूरी है। परमाणु ऊर्जा इन तीनों जरूरतों को पूरा करती है।

आज भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता सीमित है, लेकिन 100 GW का लक्ष्य हासिल होने पर:

  • कोयले पर निर्भरता घटेगी
  • कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कमी आएगी
  • ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी

रोजगार और अर्थव्यवस्था पर असर

SHANTI Bill का असर सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। इसके जरिए:

  • इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग में रोजगार
  • रिसर्च और डेवलपमेंट को बढ़ावा
  • स्थानीय उद्योगों और सप्लाई चेन का विस्तार

होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह भारत की ग्रीन इकॉनमी को भी मजबूत करेगा।


सुरक्षा को लेकर क्या कहा गया है?

परमाणु ऊर्जा को लेकर सुरक्षा हमेशा एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि:

  • अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन होगा
  • स्वतंत्र नियामक संस्थाएं निगरानी करेंगी
  • किसी भी निजी भागीदारी को कड़े नियमों के तहत अनुमति मिलेगी

यानी विकास के साथ-साथ सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

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वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति

इस विधेयक के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में आ जाएगा, जहां परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में नियंत्रित निजी भागीदारी मौजूद है। इससे:

  • भारत की वैश्विक ऊर्जा छवि मजबूत होगी
  • विदेशी निवेश और सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे
  • स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व में भारत की भूमिका बढ़ेगी

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