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India Air Quality Global Rankings: बिगड़ती हवा पर संसद में सरकार का पक्ष

भारत में वायु प्रदूषण लगातार एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। सर्दियों के महीनों में दिल्ली-एनसीआर समेत कई बड़े शहरों में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक पहुंच जाती है। इसी पृष्ठभूमि में संसद में वायु गुणवत्ता को लेकर अहम चर्चा हुई, जहां पर्यावरण मंत्री ने वैश्विक एयर क्वालिटी रैंकिंग को लेकर सरकार का स्पष्ट रुख रखा। सरकार ने संसद को बताया कि भारत किसी भी अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा जारी वैश्विक एयर क्वालिटी रैंकिंग को आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं देता, क्योंकि ऐसी कोई वैश्विक संस्था नहीं है जो आधिकारिक रैंकिंग तैयार करती हो।

India air quality global rankings

संसद में क्या कहा गया?

संसद में दिए गए जवाब में पर्यावरण मंत्री ने कहा कि भारत अपनी वायु गुणवत्ता की निगरानी अपने नियमों और वैज्ञानिक मानकों के आधार पर करता है।

सरकार के अनुसार:

  • कोई भी वैश्विक संस्था आधिकारिक एयर क्वालिटी रैंकिंग नहीं बनाती
  • अलग-अलग संगठन अपने सीमित डेटा के आधार पर सूचियां जारी करते हैं
  • इन सूचियों को भारत सरकार की आधिकारिक रेटिंग नहीं माना जा सकता

यह बयान Parliament of India में उस समय आया, जब भारत की बिगड़ती हवा को लेकर अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों का हवाला दिया जा रहा था।


वैश्विक रैंकिंग पर सरकार को आपत्ति क्यों है?

पिछले कुछ वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों और देशों की सूची जारी की है, जिनमें भारत के कई शहर शीर्ष पर दिखाए जाते हैं।

लेकिन सरकार का कहना है कि:

  • ये रिपोर्ट सीमित मॉनिटरिंग स्टेशनों के डेटा पर आधारित होती हैं
  • भारत जैसे विशाल और विविध देश की वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शातीं
  • मौसम, भौगोलिक परिस्थितियां और स्थानीय स्रोतों का सही मूल्यांकन नहीं होता

इसी वजह से India air quality global rankings को लेकर सरकार सतर्क रुख अपनाती है।


भारत कैसे करता है वायु गुणवत्ता का आकलन?

पर्यावरण मंत्री ने बताया कि भारत अपनी स्वदेशी निगरानी प्रणाली के जरिए वायु गुणवत्ता का मूल्यांकन करता है।

इसके तहत:

  • देशभर में सैकड़ों एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन
  • वार्षिक और मौसमी डेटा का विश्लेषण
  • PM2.5, PM10, NO₂, SO₂ जैसे मानकों की निगरानी
  • राज्यों और शहरों के लिए अलग-अलग कार्ययोजनाएं

शामिल हैं। यह पूरा तंत्र Ministry of Environment, Forest and Climate Change के अंतर्गत काम करता है।


क्या सरकार प्रदूषण की गंभीरता से इनकार कर रही है?

सरकार ने यह साफ किया कि वह वायु प्रदूषण की समस्या से इनकार नहीं कर रही है। मंत्री ने कहा कि:

  • प्रदूषण एक वास्तविक और गंभीर चुनौती है
  • केंद्र और राज्य मिलकर इस पर काम कर रहे हैं
  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) जैसे प्रयास चल रहे हैं

हालांकि, सरकार का जोर इस बात पर है कि समस्या का समाधान भारतीय परिस्थितियों के अनुसार निकाला जाना चाहिए, न कि केवल वैश्विक रैंकिंग के आधार पर।


आम जनता के लिए इस बयान का क्या मतलब है?

सरकार के इस रुख का सीधा असर आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है।

  • सरकार का फोकस घरेलू डेटा और समाधान पर रहेगा
  • नीतियां स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर बनेंगी
  • वैश्विक छवि से ज्यादा प्राथमिकता जमीनी सुधार को दी जाएगी

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों को पूरी तरह नजरअंदाज करने के बजाय उन्हें सुधार के संकेत के रूप में भी देखा जाना चाहिए।

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वायु प्रदूषण: रैंकिंग से आगे की चुनौती

हकीकत यह है कि चाहे रैंकिंग मानी जाए या नहीं, प्रदूषित हवा का असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सांस की बीमारियां, हृदय रोग और बच्चों में अस्थमा के मामले बढ़ रहे हैं।

इसलिए सवाल सिर्फ India air quality global rankings का नहीं, बल्कि यह है कि:

  • हवा कब साफ होगी?
  • प्रदूषण के स्रोतों पर कितनी तेजी से नियंत्रण होगा?
  • आम नागरिकों को कब राहत मिलेगी?

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