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Heart Attack और Cardiac Arrest में क्या अंतर है? जानिए लक्षण, कारण और बचाव

आज के समय में दिल से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। आंकड़ों के अनुसार भारत में हर साल लाखों लोग हार्ट डिजीज के कारण जान गंवा देते हैं। लेकिन इनमें एक बड़ी समस्या यह है कि लोग अक्सर Heart Attack और Cardiac Arrest को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों में बड़ा अंतर है। इन दोनों स्थितियों में समानता यह है कि दोनों जीवन के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं, लेकिन उनकी वजह, प्रक्रिया और इलाज अलग-अलग होते हैं। इसलिए सही जानकारी होना बेहद आवश्यक है।

Heart Attack और Cardiac Arrest

Heart Attack क्या होता है?

Heart Attack तब होता है जब दिल की मांसपेशियों में खून का प्रवाह रुक जाता है।
आमतौर पर यह तब होता है जब दिल की धमनियों में प्लाक (कोलेस्ट्रॉल, वसा और कैल्शियम का जमाव) जमा हो जाता है।
इस ब्लॉकेज की वजह से दिल तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होती है, जिससे दिल का हिस्सा प्रभावित होता है और दर्द शुरू हो जाता है।

Heart Attack के सामान्य लक्षण:

  • सीने में भारीपन या दबाव जैसा दर्द
  • दर्द का जबड़े, बांह, कंधे या पीठ में फैलना
  • सांस लेने में तकलीफ
  • उल्टी या मतली
  • ठंडा पसीना
  • चक्कर आना या कमजोरी

ये लक्षण धीरे-धीरे बढ़ सकते हैं और कई बार घंटों तक बने रह सकते हैं। कुछ लोगों में “साइलेंट हार्ट अटैक” भी होता है जिसमें लक्षण कम या बिल्कुल भी महसूस नहीं होते।

Heart Attack क्यों होता है?

इसके प्रमुख कारण हैं:

  • हाई कोलेस्ट्रॉल
  • धूम्रपान
  • डायबिटीज
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • मोटापा
  • तनाव
  • व्यायाम की कमी
  • अस्वस्थ भोजन की आदतें
  • अनुवांशिक कारण

हार्ट अटैक एक सर्कुलेशन समस्या है यानी खून के प्रवाह में रुकावट से नुकसान होता है।


Cardiac Arrest क्या होता है?

कार्डियक अरेस्ट दिल की इलेक्ट्रिकल समस्या है।
इसमें दिल की धड़कन अचानक रुक जाती है और शरीर के बाकी हिस्सों तक खून का प्रवाह बंद हो जाता है।
यह स्थिति सामान्यतः अचानक और बिना चेतावनी के होती है और कुछ ही मिनटों में मौत का कारण बन सकती है।

Cardiac Arrest के लक्षण:

  • अचानक गिर जाना
  • सांस रुक जाना
  • नाड़ी का न मिलना
  • बेहोशी

यह स्थिति अस्पताल पहुँचने से पहले भी हो सकती है और इसमें CPR और डिफिब्रिलेशन से ही जीवन बचाया जा सकता है।


Cardiac Arrest क्यों होता है?

इसके कारणों में शामिल हैं:

  • वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन
  • एरिद्मिया (असमय धड़कन)
  • दिल की बीमारी
  • इलेक्ट्रिकल डिस्टर्बेंस
  • इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन
  • ड्रग्स या अल्कोहल का सेवन
  • गंभीर चोट
  • कार्डियोमायोपैथी
  • हार्ट अटैक के बाद की जटिलताएं

कार्डियक अरेस्ट तुरंत और घातक हो सकता है। उपचार में देरी होने से जीवित रहने की संभावना तेजी से घट जाती है।


क्या Heart Attack से Cardiac Arrest हो सकता है?

हाँ।
हालांकि दोनों अलग स्थितियाँ हैं, लेकिन Heart Attack Cardiac Arrest का कारण बन सकता है।
अगर हार्ट अटैक दिल की इलेक्ट्रिकल सिस्टम को प्रभावित कर दे तो दिल धड़कना बंद कर सकता है।


Heart Attack और Cardiac Arrest: मुख्य अंतर एक नजर में

पहलूHeart AttackCardiac Arrest
प्रकृतिसर्कुलेशन समस्याइलेक्ट्रिकल समस्या
प्रक्रियाब्लॉकेज से खून का प्रवाह रुकता हैदिल धड़कना बंद
शुरुआतधीरे-धीरे लक्षणतुरंत और अचानक
लक्षणदर्द, सांस की तकलीफगिरना, नाड़ी रुकना, बेहोशी
इलाजब्लॉकेज हटाना, दवाएंCPR, डिफिब्रिलेटर
जोखिमगंभीर लेकिन समय रहता हैतुरंत जानलेवा

Heart Attack और Cardiac Arrest: किसे अधिक जोखिम होता है?

इन लोगों में दोनों का जोखिम अधिक होता है:

  • 40 वर्ष से ऊपर के पुरुष
  • महिलाएं (विशेषकर मेनोपॉज़ के बाद)
  • डायबिटीज रोगी
  • स्मोकर
  • हाई बीपी/हाई कोलेस्ट्रॉल वाले
  • मोटापे से ग्रसित
  • परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास

भारत में युवा पेशेवरों और फिटनेस मेंटेन करने वालों में भी अचानक कार्डियक केस बढ़ रहे हैं, जिसका बड़ा कारण तनाव, गलत वर्कआउट प्रैक्टिस और स्क्रीन-आधारित जीवन शैली है।

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कैसे बचें? रोकथाम सबसे बड़ा उपाय

हार्ट डिजीज में रोकथाम इलाज से ज्यादा प्रभावी है।

कुछ महत्वपूर्ण कदम:

  1. नियमित एक्सरसाइज
  2. स्ट्रेस कंट्रोल
  3. कम नमक और कम वसा वाला भोजन
  4. धूम्रपान और अल्कोहल से दूरी
  5. नियमित मेडिकल चेकअप
  6. ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल
  7. वर्क-लाइफ बैलेंस

CPR की जानकारी क्यों जरूरी है?

कार्डियक अरेस्ट के मामलों में पहले 3 से 5 मिनट महत्वपूर्ण होते हैं।
अगर आसपास कोई व्यक्ति CPR जानता हो तो जीवित रहने की संभावना 50-70% तक बढ़ सकती है।
दुनिया के कई देशों में CPR प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है, भारत में भी इसकी ज़रूरत बढ़ रही है।

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