Excessive Behavior Leads to Ruin: शिखर तक पहुंचने में उम्र लगती है, गिरने में एक पल
जीवन का एक कठोर लेकिन अटल सत्य है – अति का अंत पतन होता है। जब शक्ति, धन, पद या अहंकार सीमा पार कर जाता है, तो विनाश केवल समय की प्रतीक्षा करता है। इतिहास, समाज और व्यक्तिगत जीवन – तीनों इस सत्य के साक्षी हैं। कमजोर को सताना, शक्ति का दुरुपयोग करना और स्वयं को अजेय समझना – ये सभी व्यवहार अंततः उसी व्यक्ति को नीचे गिरा देते हैं, जो कभी शिखर पर खड़ा होता है।

Excessive Behavior Leads to Ruin: कमजोर को सताना – सबसे बड़ी भूल
जो व्यक्ति शक्ति के नशे में कमजोर को कुचलता है, वह यह भूल जाता है कि:
- आज वह ऊपर है, कल परिस्थितियां बदल सकती हैं
- शक्ति स्थायी नहीं होती
- समय किसी का पक्षपात नहीं करता
कमजोर को सताना सिर्फ अन्याय नहीं, बल्कि अपने ही पतन की नींव रखना है। क्योंकि जब शक्ति चली जाती है, तब वही कमजोर लोग समाज की स्मृति बनकर न्याय की आवाज़ उठाते हैं।
अहंकार क्यों बनता है पतन का कारण
अहंकार व्यक्ति को अंधा कर देता है। वह:
- सलाह सुनना बंद कर देता है
- खुद को नियमों से ऊपर समझने लगता है
- दूसरों की पीड़ा को महत्वहीन मानने लगता है
यही अहंकार धीरे-धीरे व्यक्ति को वास्तविकता से काट देता है। और जब वास्तविकता टकराती है, तो गिरावट बेहद तेज और दर्दनाक होती है।
शिखर तक पहुंचने की कीमत
किसी भी ऊंचाई तक पहुंचना आसान नहीं होता:
- वर्षों की मेहनत
- त्याग
- अनुशासन
- असफलताओं से सीख
इन सबके बाद कोई व्यक्ति ऊपर पहुंचता है। लेकिन विडंबना यह है कि जिस ऊंचाई तक पहुंचने में उम्र लगती है, वहीं से गिरने में एक क्षण भी नहीं लगता। एक गलत निर्णय, एक क्रूर व्यवहार, एक अहंकारी शब्द—और सब कुछ ढह सकता है।
इतिहास और समाज की सीख
इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है जहाँ:
- अत्याचारी शासक गिरे
- घमंडी नेता अपमानित हुए
- शक्तिशाली संस्थाएं टूट गईं
सभी का कारण एक ही था—अत्यधिक व्यवहार। जिन्होंने सीमाएं लांघीं, उन्होंने अंततः अपना ही विनाश चुना।
संयम: सच्ची शक्ति का परिचय
वास्तविक शक्ति वह नहीं जो डर पैदा करे, बल्कि वह जो:
- सुरक्षा दे
- न्याय करे
- कमजोर को उठाए
संयम रखने वाला व्यक्ति ही लंबे समय तक टिकता है। वह जानता है कि शक्ति सेवा के लिए है, दमन के लिए नहीं।
व्यक्तिगत जीवन में भी लागू होता है यह नियम
Excessive Behavior Leads to Ruin: यह सिद्धांत केवल सत्ता या धन तक सीमित नहीं:
- रिश्तों में अति नियंत्रण
- शब्दों में अति कठोरता
- व्यवहार में अति स्वार्थ
ये सभी चीजें रिश्तों को तोड़ देती हैं। व्यक्ति अकेला रह जाता है – भले ही उसके पास सब कुछ क्यों न हो।
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आज की दुनिया में इसकी प्रासंगिकता
आज जब सोशल मीडिया, पद और प्रभाव जल्दी मिल जाते हैं, तब:
- अहंकार जल्दी पनपता है
- गिरावट भी उतनी ही तेज होती है
इसलिए आज पहले से कहीं अधिक जरूरी है कि व्यक्ति:
- विनम्र रहे
- सीमाएं समझे
- शक्ति का प्रयोग सोच-समझकर करे
जीवन का संतुलन ही सफलता की कुंजी
जीवन हमें बार-बार यही सिखाता है:
- अति से बचो
- करुणा को अपनाओ
- विनम्रता को शक्ति समझो
जो व्यक्ति दूसरों को कुचलकर आगे बढ़ता है, वह ऊपर भले दिखे, पर भीतर से खोखला हो जाता है। और खोखले स्तंभ देर तक खड़े नहीं रहते।
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