कैंसर क्यों लौट आता है? क्या इसे रोका जा सकता है?
लाखों लोग कैंसर से लड़ते हैं, लेकिन लड़ाई हमेशा आखिरी इलाज के बाद खत्म नहीं होती। कई बार बीमारी वापस लौट आती है, जिससे डर और अनिश्चितता बढ़ जाती है। जब कैंसर इलाज के बाद दोबारा आता है, तो इसे कैंसर रिकारेंस कहा जाता है। यह उसी जगह, आस-पास के ऊतकों में या शरीर के किसी अन्य हिस्से में प्रकट हो सकता है।

कैंसर क्यों लौट आता है?
1. निष्क्रिय कैंसर कोशिकाएँ
सर्जरी, कीमोथेरेपी या रेडिएशन के बाद भी कुछ कैंसर कोशिकाएँ जीवित रह सकती हैं। ये कोशिकाएँ महीनों या वर्षों तक निष्क्रिय रह सकती हैं और फिर से बढ़ना शुरू कर सकती हैं।
2. जीन में परिवर्तन
कैंसर कोशिकाओं में अक्सर डीएनए में परिवर्तन होता है जो उन्हें खत्म करना मुश्किल बना देता है। कुछ कोशिकाएँ इलाज के प्रति प्रतिरोधी हो जाती हैं और फैलने लगती हैं।
3. जीवनशैली और इम्यून सिस्टम
तनाव, अस्वस्थ जीवनशैली, खराब आहार और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली बीमारी के दोबारा लौटने की संभावना बढ़ाते हैं।
कैंसर रिकारेंस के प्रकार
- स्थानीय रिकारेंस – कैंसर उसी जगह पर वापस आता है।
- क्षेत्रीय रिकारेंस – यह आसपास के ऊतकों या लिम्फ नोड्स तक फैलता है।
- दूरस्थ रिकारेंस – कैंसर फेफड़ों, जिगर या हड्डियों जैसे अंगों तक फैल जाता है।
क्या हम कैंसर को लौटने से रोक सकते हैं?
पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन कुछ कदम जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं:
1. स्वस्थ आहार लें
फल, हरी सब्जियाँ, साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर भोजन करें। मीठे, प्रोसेस्ड फूड और लाल मांस से परहेज करें।
2. नियमित व्यायाम करें
प्रतिदिन 30 मिनट वॉक, योग या हल्की कसरत शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
3. तनाव कम करें
लंबे समय तक तनाव इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है। मेडिटेशन, माइंडफुलनेस और गहरी साँसें मानसिक संतुलन बनाए रखते हैं।
4. नियमित जांच और स्क्रीनिंग
समय पर जांच कराना रिकारेंस को शुरुआती चरण में पकड़ने में मदद करता है।
5. धूम्रपान और शराब से दूरी
तंबाकू और शराब कैंसर के लौटने का बड़ा कारण हैं। इन्हें छोड़ने से खतरा काफी कम हो जाता है।
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भावनात्मक उपचार भी जरूरी
कैंसर का लौटना सिर्फ शरीर को नहीं, दिमाग को भी प्रभावित करता है। काउंसलिंग, सपोर्ट ग्रुप और परिवार का साथ मानसिक मजबूती देता है।
कैंसर का लौटना कठिन सच्चाई है, लेकिन उम्मीद खत्म नहीं होती। नियमित चिकित्सा, स्वस्थ जीवनशैली और भावनात्मक मजबूती से लंबा और खुशहाल जीवन संभव है।
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