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बिना कोचिंग UPSC सफलता:आराम छोड़कर चुना कठिन रास्ता

आज के दौर में जहां ज्यादातर युवा एक अच्छी सैलरी वाली नौकरी को अंतिम लक्ष्य मान लेते हैं, वहीं सैम ने बिल्कुल उल्टा फैसला लिया। उन्होंने अपनी हाई-पेइंग जॉब को अलविदा कहकर देश की सेवा का सपना चुना—अफसर बनने का सपना। यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन उनके भीतर कुछ अलग करने की जिद थी। यही जिद उन्हें उस मुकाम तक ले गई, जहां उन्होंने UPSC जैसी कठिन परीक्षा को बिना किसी कोचिंग के पास कर लिया।

बिना कोचिंग UPSC सफलता

बिना कोचिंग UPSC सफलता: नौकरी छोड़ने का मुश्किल निर्णय

मुजफ्फरपुर के सईम रजा ने लाखों की नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी की और 188वीं रैंक लेकर IPS बने. आइए जानते हैं उनकी दिल छू जाने वाली कहानी,सैम एक प्रतिष्ठित कंपनी में अच्छी तनख्वाह पर काम कर रहे थे। करियर, स्थिरता और भविष्य—सब कुछ तय-सा लग रहा था। लेकिन भीतर कहीं यह सवाल उन्हें लगातार परेशान करता रहा कि क्या यही उनका असली उद्देश्य है।
लंबे आत्ममंथन के बाद उन्होंने तय किया कि वे प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज के लिए कुछ ठोस करना चाहते हैं। यह फैसला परिवार और दोस्तों के लिए चौंकाने वाला था, लेकिन सैम अपने लक्ष्य को लेकर स्पष्ट थे।


बिना कोचिंग क्यों चुना रास्ता

सैम ने जानबूझकर कोचिंग का सहारा नहीं लिया। उनका मानना था कि सही दिशा, आत्म-अनुशासन और विश्वसनीय सामग्री के साथ तैयारी की जाए, तो कोचिंग के बिना भी सफलता संभव है।
उन्होंने UPSC के सिलेबस को अपनी तैयारी की रीढ़ बनाया और हर विषय को उसी के अनुसार पढ़ा। इंटरनेट, मानक किताबें और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र—यही उनके मुख्य साधन बने।


पढ़ाई की रणनीति

सैम की तैयारी का सबसे मजबूत पहलू था योजना और निरंतरता

  • उन्होंने रोजाना पढ़ाई के घंटे तय किए और उनका सख्ती से पालन किया।
  • हर विषय के लिए सीमित लेकिन प्रभावी स्रोत चुने।
  • उत्तर लेखन का अभ्यास खुद से किया और अपने जवाबों का आत्ममूल्यांकन किया।

उन्होंने बताया कि समय प्रबंधन उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी, लेकिन नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह तैयारी के लिए समर्पित कर दिया।


मानसिक मजबूती बनी सबसे बड़ा हथियार

UPSC की तैयारी सिर्फ किताबों की नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन की भी परीक्षा है। सैम कहते हैं कि बिना कोचिंग के तैयारी करते समय आत्म-संदेह अक्सर घेर लेता है।
ऐसे समय में उन्होंने खुद पर भरोसा रखा, छोटे लक्ष्य बनाए और उन्हें पूरा करके आत्मविश्वास बढ़ाया। योग और हल्की एक्सरसाइज भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा रही, जिससे तनाव कम हुआ।


सफलता का वह दिन

जब UPSC का परिणाम आया और सैम का नाम चयनित उम्मीदवारों की सूची में था,

तो वह पल उनके लिए अविश्वसनीय था। जिस रास्ते को लोगों ने जोखिम भरा कहा था,

वही रास्ता उन्हें मंजिल तक ले आया। यह सिर्फ परीक्षा पास करने की खुशी नहीं थी,

बल्कि उस फैसले की जीत थी, जिसमें उन्होंने आराम के बजाय संघर्ष को चुना था।

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युवाओं के लिए सीख

सैम की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है,

जो संसाधनों की कमी या कोचिंग न मिलने को अपनी कमजोरी मान लेते हैं।

यह कहानी बताती है कि साफ लक्ष्य, सही रणनीति और अनुशासन हो, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं रहती।
उन्होंने यह भी साबित किया कि कोचिंग एक सहारा हो सकती है, लेकिन सफलता की शर्त नहीं।

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