Labour Codes Rollout April: 1 अप्रैल से नए लेबर कोड लागू करने की तैयारी? PF और ग्रेच्युटी कॉस्ट पर बड़ा असर संभव
केंद्र सरकार एक बार फिर चारों लेबर कोड को लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इस बार सरकार की कोशिश है कि इन कोड्स को 1 अप्रैल से लागू किया जाए, ताकि इनकी शुरुआत कंपनियों के वित्तीय वर्ष (Financial Year) के साथ तालमेल में हो। श्रम और रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour & Employment) का मानना है कि वित्तीय वर्ष में लागू होने से कंपनियों, कर्मचारियों और वित्तीय प्रणालियों में बदलाव को सुचारू रूप से लागू करने में आसानी होगी।

Labour Codes Rollout April: चारों लेबर कोड –
- वेज कोड
- इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड
- सोशल सिक्योरिटी कोड
- ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड
पहले ही संसद से पास हो चुके हैं और राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है, लेकिन अभी तक इन्हें पूरी तरह लागू नहीं किया गया है क्योंकि केंद्र और राज्यों के स्तर पर नियम एक समान समय पर लागू होने की आवश्यकता है।
क्यों जरूरी समझी जा रही है 1 अप्रैल की तारीख?
1 अप्रैल भारत में वित्तीय वर्ष की शुरुआत का दिन है। कंपनियों के लिए –
- पेरोल
- PF योगदान
- ग्रेच्युटी कैलकुलेशन
- टैक्स प्लानिंग
- सैलरी रीस्ट्रक्चर
सभी इसी दिन से अपडेट होते हैं।
अगर लेबर कोड इसी समय लागू होते हैं तो कंपनियों को दोहरे बदलाव से नहीं गुजरना पड़ेगा और कॉस्ट इंप्लीकेशन का अनुमान लगाना आसान हो जाएगा।
क्या हैं नए लेबर कोड की मुख्य परिवर्तन?
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव सैलरी संरचना (Salary Structure) से जुड़ा है।
नए कोड के तहत:
- बेसिक सैलरी (Basic + DA) कुल CTC का 50% या उससे अधिक होना चाहिए।
- इससे PF और ग्रेच्युटी दोनों का हिसाब बदल जाएगा।
जहां अभी कई कंपनियों में बेसिक 30-35% तक रखा जाता है, वहीं 50% की बाध्यता आने से:
- PF योगदान बढ़ेगा
- ग्रेच्युटी देनदारी बढ़ जाएगी
ये बदलाव कंपनियों के कुल वेतन लागत (Wage Cost) को बढ़ा सकते हैं।
PF और ग्रेच्युटी पर प्रभाव – सबसे बड़ा मुद्दा
PF (Provident Fund) प्रभाव
PF की गणना बेसिक सैलरी पर होती है।
उदाहरण के लिए:
पहले:
CTC = 60,000/माह
Basic = 18,000 (~30%)
PF = 2160 × 2 = 4320
नया कोड:
Basic = 30,000 (~50%)
PF = 3600 × 2 = 7200
यानी PF योगदान बढ़ने से हाथ में आने वाली टेक-होम सैलरी कम होगी, लेकिन लॉन्ग-टर्म सेविंग बढ़ेगी।
ग्रेच्युटी प्रभाव
ग्रेच्युटी की गणना भी बेसिक सैलरी पर होती है, इसलिए इसका बोझ कंपनियों पर बढ़ेगा।
कई कंपनियां प्रोजेक्ट या कॉन्ट्रैक्ट आधारित नौकरियों में भी ग्रेच्युटी लागू होने की संभावना को लेकर चिंतित हैं।
कंपनियों की चिंता: लागत बढ़ेगी
नए लेबर कोड लागू होने से कंपनियों पर कई तरह का कॉस्ट इंपैक्ट आएगा:
- PF बढ़ेगा
- ग्रेच्युटी देनदारी बढ़ेगी
- ओवरटाइम और पेड लीव में बदलाव
- वर्किंग ऑवर्स पुनर्गठन
- शॉर्ट-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट वर्करों की लागत बढ़ेगी
कई MSME संगठन पहले ही इन बदलावों को धीरे-धीरे लागू करने की मांग कर चुके हैं।
कर्मचारियों के लिए फायदे
हालांकि कंपनियों को खर्च बढ़ेगा, पर कर्मचारियों के लिए फायदे होंगे:
- रिटायरमेंट फंड मजबूत होगा
- ग्रेच्युटी की पात्रता बढ़ेगी
- PF एक तरह का मजबूर सेविंग टूल बनेगा
- सोशल सिक्योरिटी कवरेज बढ़ेगा
- नौकरी छोड़ने के बाद भी लाभ मिलेगी
युवा कर्मचारियों के लिए यह मजबूरी भरी बचत बाद में एक बड़ा बफर बन जाएगी।
कर्मचारियों की चिंता: टेक-होम सैलरी कम होगी
जहां फायदों की बात है, वहीं कर्मचारियों के सामने भी एक चुनौती साफ दिखती है:
- हाथ में मिलने वाली सैलरी कम हो सकती है
- EMI आधारित जीवन पर असर पड़ेगा
- टैक्स प्लानिंग बदलनी पड़ेगी
भारत में युवा कार्यबल अक्सर टेक-होम को प्राथमिकता देता है। इसलिए यह बदलाव व्यवहारिक स्तर पर समय ले सकता है।
सरकार की रणनीति: सोशल सिक्योरिटी को मजबूत करना
सरकार लगातार सोशल सिक्योरिटी इकोसिस्टम को मजबूत करने पर काम कर रही है:
- PF
- पेंशन
- ग्रेच्युटी
- ESIC
- गिग वर्कर्स सोशल सिक्योरिटी
नए कोड का उद्देश्य है कि भारत में भी विकसित देशों की तरह रोजगार से जुड़े सुरक्षा लाभ मजबूत हों।
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गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों पर भी नज़र
नई सोशल सिक्योरिटी कोड में फूड डिलीवरी, टैक्सी, ई-कॉमर्स, और ऐप आधारित श्रमिकों को भी शामिल करने का प्रावधान है।
भारत में ऐसे वर्करों की संख्या 80 लाख से अधिक मानी जा रही है।
यह श्रम बाजार में अगला बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
Labour Codes Rollout April: क्या अप्रैल 1 का रोलआउट अंतिम है?
अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मंत्रालय ने सक्रिय रूप से इस तारीख पर विचार करना शुरू कर दिया है।
1 अप्रैल एक आदर्श स्थिति प्रस्तुत करता है क्योंकि:
- कंपनियों को अकाउंटिंग बदलने में आसानी
- श्रमिक भुगतान कैलकुलेशन में स्थिरता
- ऑडिट और टैक्स में स्पष्टता
- मॉडर्न HR सिस्टम में अपग्रेड सरल
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