उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं का कहर: अब तक 150 + मौतें, धाराली में क्लाउडबर्स्ट ने बढ़ाई मुश्किलें
उत्तराखंड में 2025 में एक के बाद एक प्राकृतिक आपदाओं ने भीषण तबाही मचाई है। तेज़ मानसूनी बारिश की वजह से अचानक आई बाढ़, क्लाउडबर्स्ट और भूस्खलन में अब तक कम से कम 77 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों लोग अभी भी पुनर्वास में जुटे हैं। सोमवार, 1 सितंबर को उत्तरकाशी के धाराली गांव में एक और जोरदार Cloud burst ने हालात को और गंभीर कर दिया है, जिससे पहाड़ी राज्य में डर और चिंता और बढ़ गई है।

भारी बारिश और भयानक तबाही
इस साल उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं का कहर जल्दी शुरू हुआ और पूरे राज्य में ज़बरदस्त बारिश आई, जिससे कई जिलों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन हुए। नदियाँ उफान पर आ गईं, कई सड़कें और पुल ढह गए, और उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग जैसे इलाकों की पूरी आबादी फंस गई।
राज्य में पिछले साल के मुकाबले दो गुना अधिक बारिश से मौतें दर्ज हुई हैं।
सैकड़ों घर टूट गए और सड़कें मानचित्र से गायब हो गईं।
स्थानीय अधिकारी लगातार बचाव कार्य में लगे रहे, लेकिन नुकसान का स्तर काफी ज्यादा रहा। सेना, NDRF और SDRF की टीमें हाई-रिस्क इलाकों में परिवारों की निकासी के लिए लगातार तैनात रहीं। PM मोदी की शी जिनपिंग और पुतिन से बातचीत
धाराली क्लाउडबर्स्ट : ताज़ा आपदा
1 सितंबर को उत्तरकाशी जिले के हर्षिल के पास धाराली गांव में जबर्दस्त Cloud burst हुआ।
अचानक हो रही तेज वर्षा से खीर गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया,
जिससे गांव के बाजार क्षेत्र में मलबा, पानी और पत्थरों की बाढ़ आ गई।
घर, दुकानें, होटल और सेना का एक हिस्सा भी बह गया या मलबे में दब गया।
बचाव कार्य तुरंत शुरू हुआ लेकिन अब तक कई मौतों, दर्जनों लापता लोगों व संपत्ति को बड़ा नुकसान होने की खबर है।
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यहां की इन्फ्रास्ट्रक्चर—हेलीपैड और प्रमुख सड़कों समेत—को भी काफी नुकसान हुआ जिससे बचाव टीमों तक पहुँचना भी मुश्किल हो गया।
स्थानीय और राष्ट्रीय नेताओं ने संवेदना प्रकट की हैं और हर संभव मदद का आश्वासन दिया है लेकिन चुनौतियाँ अभी बाकी हैं, क्यूंकि और बारिश की भविष्यवाणी है।
मानवीय प्रभाव और सामुदायिक प्रतिक्रिया
इस तबाही ने सैकड़ों लोगों को बेघर कर दिया, परिवारों को अलग कर दिया और किसानों, होटल मालिकों, दुकानदारों की कई सालों की मेहनत को तबाह कर दिया।
मृतकों में बच्चे, बुजुर्ग और तीर्थयात्री भी शामिल हैं, जो प्रकृति की तीव्र ताकत के आगे असहाय रह गए।
लगातार खतरा और पीड़ा ने पहाड़ी लोगों की हिम्मत को हिला दिया है।
आपदा प्रबंधन टीमें ‘वार फूटिंग’ पर राहत, पुनर्वास, खाद्य-सामग्री और चिकित्सा सहायता देने में जुटी हैं।
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सोशल मीडिया पर भी देशभर से मदद की अपीलें और समर्थन मिला है।
भविष्य की राह और सीख
जलवायु परिवर्तन, अति विकास और कमजोर पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र उत्तराखंड को आपदाओं की ओर धकेलते हैं।
मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण-संवेदनशील विकास और हर स्तर पर तैयारी जरूरी है।
फिलहाल, उत्तराखंड के लोग हिम्मत और उम्मीद के साथ इस त्रासदी का सामना कर रहे हैं
अपने समुदायों की शक्ति और देश भर के समर्थन पर भरोसा रखते हुए।
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