उत्तराखंड को मिलेगा पहला सरकारी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज – अमित शाह रखेंगे आधारशिला
उत्तराखंड में जल्द ही पहला सरकारी होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज बनने जा रहा है, जो भारत के उत्तरी क्षेत्र में वैकल्पिक चिकित्सा और मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट की आधारशिला इस महीने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा रखी जाएगी।
यह कॉलेज न केवल उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि यह भारत सरकार के आयुष मंत्रालय की एकीकृत चिकित्सा व्यवस्था की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

बढ़ती होम्योपैथी की मांग और प्रोजेक्ट की आवश्यकता
भारत में होम्योपैथी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है, खासकर इसकी कम कीमत, कम साइड इफेक्ट्स और रोग-निवारक दृष्टिकोण के चलते। अब सरकार उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में एक समर्पित होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने जा रही है, जिससे चिकित्सा शिक्षा और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार होगा।
उत्तराखंड क्यों?
उत्तराखंड का प्राकृतिक, शांतिपूर्ण वातावरण और आध्यात्मिक विरासत इसे प्राकृतिक चिकित्सा के लिए उपयुक्त बनाते हैं। ऋषिकेश के योग आश्रमों से लेकर हरिद्वार के आयुर्वेद केंद्रों तक, यह राज्य लंबे समय से स्वास्थ्य और संस्कृति का संगम रहा है।
हालांकि अब तक राज्य में कोई सरकारी संस्था नहीं थी जो होम्योपैथी शिक्षा और शोध को केंद्रित रूप से संचालित करे। इस नए कॉलेज से यह कमी पूरी होगी।
प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएँ
- अत्याधुनिक शैक्षणिक भवन – कक्षाएं, लैब्स, और डिजिटल लाइब्रेरी
- 100+ बिस्तरों वाला होम्योपैथिक अस्पताल – उपचार व प्रशिक्षण के लिए
- छात्रावास व शिक्षक आवास
- शोध केंद्र – दीर्घकालिक बीमारियों और स्थानीय औषधियों पर फोकस
- हिमालयी जड़ी-बूटियों का हर्बल गार्डन
- ग्रीन कैंपस – सौर ऊर्जा व वर्षा जल संचयन प्रणाली
इस परियोजना पर ₹180 करोड़ खर्च होंगे, जिसकी फंडिंग केंद्र व राज्य सरकार दोनों करेंगी।
अमित शाह की भूमिका
अमित शाह इस ऐतिहासिक अवसर पर कॉलेज की आधारशिला रखेंगे। वे पारंपरिक भारतीय चिकित्सा प्रणाली के मजबूत समर्थक हैं। कार्यक्रम में उनके साथ आयुष मंत्री, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और अन्य प्रमुख नेता मौजूद रहेंगे।
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“भारत को प्राकृतिक और रोग-निवारक स्वास्थ्य प्रणाली की ओर लौटने की जरूरत है। संस्थागत सहयोग से होम्योपैथी को और सशक्त बनाएंगे।”
यह पहल राष्ट्रीय आयुष मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप है।
भारत में होम्योपैथी का बढ़ता प्रभाव
भारत में अब 200 से अधिक होम्योपैथिक संस्थान हैं, परंतु अधिकांश निजी हैं और गिने-चुने राज्यों में सीमित हैं। उत्तराखंड जैसे राज्य में इस कॉलेज की अनुपस्थिति लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
WHO ने भी होम्योपैथी को सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सहायक माना है, विशेषकर जब इसे एलोपैथिक चिकित्सा के साथ जोड़ा जाए।
सरकार की अन्य पहलें:
- आयुष बजट में वृद्धि
- PHCs में होम्योपैथ डॉक्टरों की नियुक्ति
- ग्रामीण स्वास्थ्य योजनाओं में होम्योपैथी की भागीदारी
युवाओं को मिलेगा अवसर
यह कॉलेज स्थानीय छात्रों को BHMS (बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी) की पढ़ाई का मौका देगा। बाद में पीजी कोर्स और शोध छात्रवृत्तियाँ भी शुरू की जाएंगी।
- 1,000+ छात्रों को सालाना लाभ
- फैकल्टी, प्रशासन, डॉक्टर्स, और सपोर्ट स्टाफ की भर्ती
- 50% सीटें उत्तराखंड के छात्रों के लिए आरक्षित
पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा बल
उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ सीमित हैं। इस कॉलेज से जुड़े अस्पताल में:
- OPD सेवाएँ – मुफ्त या कम लागत पर
- ग्रामीण क्षेत्रों में हेल्थ कैंप्स
- प्रिवेंटिव हेल्थ प्रोग्राम
- स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण
इससे समग्र, समुदाय-केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
लोकेशन और कनेक्टिविटी
कॉलेज देहरादून जिले में स्थापित होगा, जो राज्य की शिक्षा राजधानी है। यहां AIIMS ऋषिकेश, दून मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान पहले से मौजूद हैं।
यह स्थान परिवहन, रेलवे, और भविष्य के आयुष वेलनेस हब से जुड़ाव के कारण चुना गया है।
बड़ी तस्वीर: आयुष और आधुनिक चिकित्सा का संगम
सरकार ने हाल के वर्षों में:
- AIISH संस्थान स्थापित किए
- आयुष स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग दी
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयुष अनुसंधान को बढ़ावा दिया
यह दर्शाता है कि अब स्वास्थ्य केवल इलाज तक सीमित नहीं, बल्कि समग्र स्वास्थ्य का हिस्सा बन रहा है।
जन व राजनीतिक प्रतिक्रिया
- छात्र संगठनों और स्थानीय प्रशासन ने स्वागत किया
- विपक्ष ने कार्यान्वयन समयसीमा व गुणवत्ता पर सवाल उठाए
- आम जनता, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र के लोग, इसे ऐतिहासिक मान रही है
निष्कर्ष
यह नया होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज केवल एक इमारत नहीं, बल्कि भारत की स्वास्थ्य नीति की नई दिशा का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि:
- पारंपरिक चिकित्सा को महत्व दिया जा रहा है
- चिकित्सा शिक्षा का विकेंद्रीकरण हो रहा है
- पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाई जा रही हैं
अमित शाह की उपस्थिति इस प्रोजेक्ट को राजनीतिक संबल देती है और इसे राष्ट्रीय फोकस में लाती है। यह प्रोजेक्ट भारत की समावेशी, एकीकृत और अभिनव स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में एक सशक्त कदम है।
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