मेरठ में 30 बच्चों से भरी बस पलटी, आठ साल पहले खत्म हो चुकी थी फिटनेस
मेरठ के एक स्कूल के 30 बच्चों से भरी बस पलटी। इस घटना ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि जिस बस में 30 मासूम बच्चे सफर कर रहे थे, उसकी फिटनेस आठ साल पहले ही खत्म हो चुकी थी। दुर्घटना का कारण बना—बस का टूटा हुआ ऐक्सल, जो वर्षों से ठीक नहीं कराया गया था।

यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, परिवहन विभाग की कमजोर निगरानी और स्कूल प्रबंधन की गैर-जिम्मेदारी को उजागर करता है।
कैसे हुआ हादसा? टूटे ऐक्सल ने ली बस की दिशा
- प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस गांव के पास एक मोड़ पर पहुंची ही थी कि अचानक उसका आगे का ऐक्सल टूट गया।
- ड्राइवर कुछ समझ पाता उससे पहले बस अनियंत्रित होकर सड़क के किनारे पलट गई।
- कई बच्चे सीटों से टकराकर गिर पड़े और जोर-जोर से रोने लगे।
- स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर खिड़कियों से बच्चों को बाहर निकाला।
- देखते ही देखते पूरा क्षेत्र बचाव कार्य का केंद्र बन गया।
सौभाग्य से बड़ी अनहोनी टली
- 30 बच्चों में से कई को खरोंचें और हल्की चोटें आईं, लेकिन किसी की जान को गंभीर खतरा नहीं हुआ।
- माता-पिता को जब दुर्घटना की खबर मिली तो सभी के दिलों की धड़कन तेज हो गई।
- घटना स्थल पर पहुंचकर कई अभिभावक फूट-फूट कर रो पड़े।
- डॉक्टरों ने सभी बच्चों की जांच की और इलाज के बाद अधिकांश को घर भेज दिया गया।
- बच्चों की जान बच जाना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा।
8 साल से बिना फिटनेस चल रही थी बस—किसकी जिम्मेदारी?
दुर्घटना की जांच के दौरान परिवहन विभाग ने चौकाने वाली जानकारी साझा की –
जिस बस से 30 बच्चे रोज स्कूल आते-जाते थे, उसकी फिटनेस 8 साल पहले ही समाप्त हो चुकी थी।
न तो स्कूल ने बस की फिटनेस रिन्यू कराई, न ही परिवहन विभाग ने इसे जब्त किया,
और न ही बस संचालक ने इसे ठीक करवाने की कोशिश की।
यह खुलासा माता-पिता और स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा करने के लिए पर्याप्त था।
स्कूल प्रबंधन सवालों के घेरे में
अभिभावकों ने सवाल उठाया:
कैसे बिना फिटनेस वाली बस बच्चों के लिए इस्तेमाल की जा रही थी?
क्या स्कूल प्रबंधन को इसकी जानकारी थी या यह लापरवाही जानबूझकर की गई?
कुछ अभिभावक इस बात से भी नाराज़ थे कि इतनी बुरी हालत वाली बस को रोज छोटे बच्चों की जान के भरोसे क्यों छोड़ा गया।
बच्चों की सुरक्षा सिर्फ कागजों में नहीं, हकीकत में सुनिश्चित होनी चाहिए
यह घटना एक बार फिर उस व्यवस्था पर सवाल उठाती है जहां:
- फिटनेस खत्म होने के बावजूद वाहन चलते रहते हैं
- स्कूल बिना जांच के बसों का उपयोग करते हैं
- परिवहन विभाग उचित निगरानी नहीं करता
- ड्राइवर और संचालक वाहन की नियमित सर्विस तक नहीं कराते
बच्चों की सुरक्षा का दावा करना आसान है, लेकिन वास्तविकता में इसे लागू करना ही सबसे बड़ी चुनौती है।
अब आगे क्या? कार्रवाई की तैयारी
- प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं।
- स्कूल प्रबंधन, बस मालिक और ड्राइवर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की संभावना है।
- परिवहन विभाग को भी जवाब देना होगा कि बिना फिटनेस वाले वाहन कैसे चल रहे थे।
- यह हादसा भले ही एक दुखद घटना है, लेकिन सौभाग्य से बच्चों की जान बच गई।
- अब यह सरकार और स्कूल दोनों की जिम्मेदारी है कि ऐसी लापरवाही फिर कभी न दोहराई जाए।
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इस मेरठ बस हादसा ने एक बार फिर साफ कर दिया कि बच्चों की सुरक्षा में कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
एक टूटी ऐक्सल, एक पुरानी बस और वर्षों की लापरवाह – यह सब मिलकर एक बड़े हादसे का कारण बन सकते थे।
समय रहते बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन यह चेतावनी है कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ रोकने के लिए सख्त कदम उठाना जरूरी है।
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