कश्मीर में बर्फबारी नहीं: लेकिन बर्फ नदारद,मौसम का बदला मिजाज
कश्मीर की सर्दियों की पहचान हमेशा से बर्फबारी रही है। सफेद चादर में ढकी वादियां, जमी हुई झीलें और बर्फ से लदे पेड़—यही तस्वीर लोगों के ज़हन में बसती है। लेकिन इस साल तस्वीर कुछ अलग है। पूरी घाटी में सर्दी तो है, ठिठुरन भी है, लेकिन बर्फबारी नहीं। यही वजह है कि इस बार की सर्दी लोगों को असमंजस में डाल रही है।

कश्मीर में बर्फबारी नहीं : गुलमर्ग में रिकॉर्ड ठंड
कश्मीर में बर्फबारी नहीं,पर्यटन स्थल गुलमर्ग में तापमान माइनस 8.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इतनी कड़ाके की ठंड के बावजूद बर्फ का न गिरना न सिर्फ स्थानीय लोगों बल्कि पर्यटकों के लिए भी हैरानी का कारण है। आमतौर पर इस समय तक गुलमर्ग बर्फ से पूरी तरह ढक जाता है और स्कीइंग जैसी गतिविधियां अपने चरम पर होती हैं।
कश्मीर घाटी में मौसम का बदला मिजाज
पूरी कश्मीर घाटी में रातें बेहद सर्द और दिन सूखे गुजर रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर रहने के कारण बनी हुई है। आमतौर पर दिसंबर और जनवरी में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ कश्मीर में बर्फ और बारिश लेकर आता है, लेकिन इस बार उसका असर बेहद सीमित नजर आ रहा है।
अगले दो हफ्ते तक राहत नहीं
मौसम विभाग की मानें तो आने वाले करीब दो हफ्तों तक बर्फबारी या बारिश की कोई ठोस संभावना नहीं दिख रही है। इसका मतलब यह है कि ठंड और बढ़ सकती है, लेकिन बर्फ के बिना। लगातार गिरते तापमान के कारण जल स्रोत जम रहे हैं और कई इलाकों में पीने के पानी की समस्या भी सामने आ रही है।
किसानों और बागवानों की चिंता
बर्फबारी का न होना कश्मीर के किसानों और बागवानों के लिए भी चिंता का विषय है। सेब और अन्य फसलों के लिए सर्दियों की बर्फ बेहद जरूरी मानी जाती है, क्योंकि यही बर्फ मिट्टी में नमी बनाए रखती है और कीटों को खत्म करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लंबे समय तक बर्फ नहीं गिरी, तो इसका असर आने वाले कृषि मौसम पर पड़ सकता है।
पर्यटन पर भी असर
कश्मीर का शीतकालीन पर्यटन काफी हद तक बर्फ पर निर्भर करता है।
गुलमर्ग जैसे इलाकों में पर्यटक खास तौर पर बर्फबारी देखने और विंटर स्पोर्ट्स का आनंद लेने आते हैं।
लेकिन बर्फ न होने से होटल बुकिंग और स्थानीय कारोबार पर असर पड़ने लगा है।
कई पर्यटकों ने अपनी यात्राएं स्थगित कर दी हैं, जिससे पर्यटन उद्योग में चिंता बढ़ गई है।
आम लोगों की मुश्किलें
ठंड तो बढ़ रही है, लेकिन बर्फ न होने से लोगों को वह प्राकृतिक सुरक्षा नहीं मिल पा रही है
जो आमतौर पर बर्फ देती है। बिना बर्फ के सूखी ठंड हड्डियों तक चुभ रही है।
गरीब और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति और भी कठिन हो गई है
क्योंकि ईंधन और हीटिंग के साधन सीमित हैं।
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जलवायु परिवर्तन की ओर इशारा
मौसम विशेषज्ञ इस असामान्य स्थिति को जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देख रहे हैं।
उनका कहना है कि मौसम के पैटर्न में हो रहे बदलाव भविष्य में और भी ऐसी परिस्थितियां पैदा कर सकते हैं
जहां ठंड तो होगी लेकिन पारंपरिक बर्फबारी नहीं।
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