आवारा कुत्ते बहार या पिंजरे में बंद ? – Global Trends और India’s Growing Threat
हाल ही में भारत में आवारा कुत्तों द्वारा लोगों पर हमले की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। इस कारण यह बहस तेज़ हो गई है कि क्या इन कुत्तों को पिंजरे में बंद करना चाहिए, नसबंदी करनी चाहिए, या “पशु अधिकारों” के तहत उन्हें खुला छोड़ देना चाहिए। यह केवल कुत्तों का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसमें मानव सुरक्षा, पशु कल्याण और सार्वजनिक स्वास्थ्य का सवाल भी शामिल है।

नैतिक सवाल: क्या आवारा कुत्तों को पिंजरे में रखना सही है?
आवारा कुत्तों को पिंजरे में रखना सार्वजनिक सुरक्षा के लिए आसान समाधान लग सकता है, लेकिन यह कई नैतिक समस्याएं पैदा करता है। पशु अधिकार समूह मानते हैं कि कुत्तों को भी स्वतंत्रता और गरिमा का अधिकार है। वहीं, जिन इलाकों में आवारा कुत्तों की संख्या अधिक है, वहां के लोग बच्चों की सुरक्षा, रेबीज़ और आक्रामक व्यवहार को लेकर चिंतित रहते हैं।
भारत में सुप्रीम कोर्ट और Prevention of Cruelty to Animals Act के तहत आवारा कुत्तों का सामूहिक वध अवैध है, लेकिन नियम ये भी कहते हैं कि वे जनता के लिए खतरा नहीं बनने चाहिए — और यही बात भारत में लागू करना चुनौती है।
दुनिया में आवारा कुत्तों से निपटने के तरीके
अमेरिका
अमेरिका के ज़्यादातर शहरों में animal control centers होते हैं। यहां आवारा कुत्तों को पकड़कर टीकाकरण किया जाता है और शेल्टर में रखा जाता है। अगर तय समय (3-7 दिन) में गोद नहीं लिया जाता तो मानवीय तरीके से उन्हें euthanize किया जाता है।
इंग्लैंड
कुत्ता लाइसेंसिंग कड़ी है। बिना लाइसेंस वाले कुत्तों को नगर परिषद उठाकर ले जाती है, और 7 दिन में मालिक न मिलने पर उन्हें गोद दिया जाता है या put down किया जाता है। रेबीज़ लगभग खत्म हो चुका है।
ऑस्ट्रेलिया
यहां सख्त पालतू पंजीकरण और भारी जुर्माने का प्रावधान है। पालतू छोड़ने वालों को दंड मिलता है और ज्यादातर पालतू नसबंदी कराए जाते हैं।
जापान
जापान में आवारा कुत्ते बहुत कम हैं। जो आक्रामक होते हैं, उन्हें सुला दिया जाता है और बाकी गोद लिए जाते हैं।
तुर्की
यहां कुत्तों को पकड़कर टीका लगाया जाता है, नसबंदी की जाती है और कान में टैग लगाकर छोड़ दिया जाता है। लोग उन्हें खाना खिलाते हैं और वे समुदाय का हिस्सा बन जाते हैं।
भारत में आवारा कुत्तों का संकट
भारत में 6 करोड़ से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। इसके कारण:
- कचरा प्रबंधन की कमी – खुले कूड़े के ढेर भोजन का स्रोत बन जाते हैं।
- नसबंदी कार्यक्रम की कमी – Animal Birth Control (ABC) योजना पूरी तरह लागू नहीं।
- रेबीज़ का खतरा – भारत में दुनिया के 36% रेबीज़ मौतें होती हैं, ज्यादातर कुत्तों के काटने से।
- शहरी विस्तार – शहरों के फैलाव से कुत्तों का क्षेत्र कम होता है और वे आक्रामक हो जाते हैं।
क्यों भारतीय आवारा कुत्ते ज्यादा खतरनाक हो रहे हैं?
- भोजन की कमी से बड़े झुंडों में झगड़े।
- इंसानों से दूरी के कारण डर और रक्षात्मक व्यवहार।
- दुर्व्यवहार का अनुभव — पत्थर मारना, भगाना, चोट पहुंचाना।
- आक्रामक नस्लों के साथ प्रजनन।
स्वास्थ्य जोखिम
आवारा कुत्तों के काटने से रेबीज़, लेप्टोस्पायरोसिस और अन्य zoonotic बीमारियां फैलती हैं।
हर साल भारत में लगभग 20,000 लोग रेबीज़ से मरते हैं। बेहतर पशु-देखभाल से यह संख्या कम हो सकती है।
ये भी पढ़ें: सड़क हादसे में महिला की मौत, पति ने बाइक से बांधकर घर लाया शव
समाधान
- राष्ट्रीय स्तर पर नसबंदी अभियान
- वार्षिक टीकाकरण
- समुदाय को गोद लेने के लिए प्रेरित करना
- कचरा प्रबंधन में सुधार
- कानूनी जिम्मेदारी तय करना
जागरूकता की भूमिका
- बिना नसबंदी के कुत्तों को खिलाना समस्या बढ़ाता है।
- Good Samaritan Law मदद करने वालों को सुरक्षा देता है।
- आक्रामक कुत्तों के मामले में पुलिस को सूचित करना बेहतर है।
khaberbox.com पर पढ़ें ताजा समाचार (हिंदी समाचार), मनोरंजन, खेल, क्रिकेट, राजनीति, धर्म, शिक्षा, बाज़ार और प्रौद्योगिकी से जुड़ी हर खबर। समय पर अपडेट या हिंदी ब्रेकिंग न्यूज के लिए खबर बॉक्स चुनें। अपने समाचार अनुभव को और बेहतर बनाएं।

