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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिलाओं की भागीदारी ने रचा इतिहास

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिलाओं की भागीदारी ने एक ऐतिहासिक रुझान पेश किया है — इस बार पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाओं ने वोट डाला, जो राज्य के बदलते राजनीतिक परिदृश्य का संकेत है।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिलाओं

यह बढ़ती हुई भागीदारी दशकों से चल रहे महिला सशक्तिकरण अभियानों, बेहतर कानून व्यवस्था और महिलाओं के लिए बनाई गई विशेष आर्थिक योजनाओं का परिणाम है।


महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी: आंकड़े बताते हैं बदलाव

पिछले कुछ चुनावों से बिहार में महिलाओं के मतदान प्रतिशत में लगातार वृद्धि हो रही थी,

लेकिन इस बार यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिलाओं की भागीदारी लगभग 71.6% रही,

जबकि पुरुषों का मतदान प्रतिशत 62.8% के आसपास था — यानी करीब 10 प्रतिशत अधिक

2010 के बाद से शुरू हुआ यह रुझान अब स्थायी रूप से दिखने लगा है, जो बताता है

कि महिलाएं न सिर्फ मतदान कर रही हैं, बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं।


महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के पीछे कारण

महिलाओं के इस अभूतपूर्व मतदान के पीछे कई ठोस कारण हैं:

  1. महिला रोजगार योजना (Mahila Rozgar Yojana) और जीविका परियोजना (Jeevika Project) जैसी योजनाओं ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है।
  2. साइकिल योजना और पंचायत आरक्षण जैसी स्थानीय पहलों ने लड़कियों को शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण दोनों दिया।
  3. कानून-व्यवस्था में सुधार और मतदाता जागरूकता अभियानों ने महिलाओं को मतदान केंद्रों तक अधिक आत्मविश्वास के साथ पहुंचाया।

इन प्रयासों ने महिलाओं के भीतर यह भावना पैदा की है कि उनका वोट राज्य की दिशा बदल सकता है।


राजनीतिक प्रभाव: महिलाएं बनीं निर्णायक वोट बैंक

राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो महिलाओं का मतदाता वर्ग अब एक निर्णायक शक्ति बन चुका है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों ही गठबंधन अब महिलाओं को आकर्षित करने के लिए अपने घोषणापत्रों में नकद हस्तांतरण, शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता दे रहे हैं।

यह महिला-केंद्रित राजनीति इस बात को साबित करती है कि महिलाएं अब न केवल सामाजिक रूप से सशक्त हैं बल्कि
राजनीतिक रूप से भी सबसे विश्वसनीय और प्रभावशाली मतदाता वर्ग बन चुकी हैं।


क्या यह बदलाव स्थायी होगा?

अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है — क्या महिलाओं की यह बड़ी भागीदारी दीर्घकालिक बदलाव लाएगी?

इसका उत्तर इस बात पर निर्भर करेगा कि राजनीतिक दल चुनावों के बाद महिलाओं के मुद्दों पर कितना ध्यान देते हैं। सच्चा सुधार तभी होगा जब वोटों को नीतिगत बदलावों में बदला जाएगा – ऐसी नीतियां जो महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में वास्तविक सुधार लाएं।

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बिहार की राजनीति में नया अध्याय

  • संक्षेप में, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिलाओं की भागीदारी ने राज्य में लोकतंत्र को नई दिशा दी है।
  • यह न केवल सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक है, बल्कि इस बात का संकेत भी है कि
  • अब महिलाएं बिहार की सशक्त, समावेशी और सहभागी लोकतंत्र की आधारशिला बन चुकी हैं।

यह समय बिहार के लिए एक नए युग का आरंभ हो सकता है —

जहाँ महिलाओं की आवाज़ शासन, विकास और निर्णय-प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनेगी।

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