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Renting vs Buying House: क्या होम लोन लेकर फ्लैट खरीदना वाकई समझदारी है?

भारतीय समाज में घर खरीदना सिर्फ एक वित्तीय फैसला नहीं, बल्कि भावनात्मक उपलब्धि माना जाता है। “अपना घर” — यह सपना लगभग हर नौकरीपेशा व्यक्ति देखता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या होम लोन लेकर घर खरीदना हमेशा सही फैसला होता है? या फिर किराये पर रहना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है? आज के समय में अधिकतर लोग 20–25 साल के होम लोन में फंस जाते हैं। आइए भावनाओं से हटकर, सिर्फ गणित और व्यावहारिक सोच से इस सवाल का जवाब ढूंढते हैं।

Renting vs Buying House

Renting vs Buying House: घर खरीदने की हकीकत: EMI का जाल

मान लीजिए आप एक मेट्रो शहर में ₹80 लाख का फ्लैट खरीदते हैं।

  • डाउन पेमेंट (20%) = ₹16 लाख
  • लोन = ₹64 लाख
  • ब्याज दर = 9%
  • अवधि = 20 साल

आपकी EMI लगभग ₹57,000 प्रति माह बनेगी।

20 साल में:

  • कुल EMI भुगतान ≈ ₹1.37 करोड़
  • यानी ₹64 लाख के लोन पर आप ₹73 लाख से ज्यादा सिर्फ ब्याज में दे देंगे।

और यह तब है जब:

  • आपकी नौकरी सुरक्षित रहे
  • ब्याज दर न बढ़े
  • कोई मेडिकल या पारिवारिक आपात स्थिति न आए

अब किराये की गणित समझिए

अब मान लेते हैं कि उसी फ्लैट का किराया ₹25,000 प्रति माह है।

  • सालाना किराया ≈ ₹3 लाख
  • 20 साल का कुल किराया (थोड़ी बढ़ोतरी मानकर भी) ≈ ₹70–75 लाख

अब सवाल उठता है —
अगर EMI ₹57,000 है और किराया ₹25,000, तो बचे हुए ₹32,000 का क्या?


यही असली खेल है: निवेश का फायदा

अगर आप किराये पर रहते हुए हर महीने बचे हुए ₹32,000 को:

  • म्यूचुअल फंड / इंडेक्स फंड
  • औसतन 12% रिटर्न

पर निवेश करें, तो:

  • 20 साल में यह निवेश ₹2 करोड़ से ज्यादा बन सकता है।

यानी:

  • आप किराये पर भी रहे
  • और आपके पास 20 साल बाद एक घर से ज्यादा कीमत का फंड हो सकता है

Renting vs Buying House: घर खरीदने के छुपे हुए खर्च

लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि घर खरीदने में सिर्फ EMI नहीं होती:

  • रजिस्ट्रेशन और स्टांप ड्यूटी
  • मेंटेनेंस चार्ज
  • प्रॉपर्टी टैक्स
  • रिनोवेशन और रिपेयर
  • सोसायटी खर्च

इन सबको जोड़ें, तो “अपना घर” और भी महंगा हो जाता है।


किराये पर रहने के डबल फायदे

1. आज़ादी

नौकरी बदली, शहर बदला — किराये में आप फंसे नहीं रहते।

2. कम तनाव

20 साल की EMI का मानसिक दबाव नहीं।

3. बेहतर कैश फ्लो

आपात स्थिति में निवेश निकाला जा सकता है, घर नहीं।

4. निवेश से ग्रोथ

घर की कीमत बढ़े या न बढ़े, अच्छे निवेश लंबे समय में ग्रोथ देते हैं।


तो क्या घर कभी नहीं खरीदना चाहिए?

ऐसा भी नहीं है।

घर खरीदना सही हो सकता है अगर:

  • आप रिटायरमेंट के करीब हों
  • आपके पास बड़ा डाउन पेमेंट हो
  • EMI आपकी आय का 20–25% से ज्यादा न हो
  • यह निवेश नहीं, रहने की जरूरत हो

लेकिन सिर्फ “किराया देना पैसा बर्बाद है” सोचकर घर खरीदना सबसे बड़ी गलती हो सकती है।

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भावनाएं बनाम वित्तीय समझदारी

घर खरीदना भावनात्मक सुरक्षा देता है,
किराये पर रहना वित्तीय आज़ादी देता है।

समझदारी इसी में है कि:

  • पहले पैसा काम करे
  • फिर आप पैसे से घर खरीदें

न कि पूरी ज़िंदगी EMI के लिए काम करें।

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