GDP के शानदार आंकड़ों के बीच भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँचा
एक तरफ देश में GDP के प्रभावशाली आंकड़ों पर खुशी और गर्व की लहर है, तो दूसरी तरफ भारतीय रुपये की लगातार गिरती स्थिति लोगों की चिंता बढ़ा रही है। GDP ग्रोथ जहां भारत की आर्थिक गति को मजबूत दिखाती है, वहीं रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना यह संकेत देता है कि अर्थव्यवस्था में कई चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं।

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले: बीते दिनों भारतीय रुपया 89.76 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर पहुँच गया – जो भारतीय इतिहास का सबसे निचला स्तर है।
यह अपने पिछले रिकॉर्ड 89.66 रुपये (21 नवंबर) से भी नीचे चला गया।
आज स्थिति यह है कि रुपया 90 के स्तर को छूने की कगार पर है।
चार दिनों से लगातार गिरावट – क्या हो रहा है?
भारतीय रुपये में गिरावट का यह सिलसिला लगातार चौथे दिन जारी रहा।
मार्केट के बंद होने तक रुपया 89.53 पर बंद हुआ,
लेकिन ट्रेडिंग के दौरान यह 89.76 तक लुढ़क गया।
यह लगातार कमजोरी इस बात का संकेत है कि:
- विदेशी निवेशक सतर्क हैं
- डॉलर के मुकाबले उभरते बाजार कमजोर दिख रहे हैं
- वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स मजबूत हो रहा है
- भारत की आर्थिक स्थिरता पर बाहरी दबाव बढ़ रहा है
GDP बढ़ रही है, फिर भी रुपया क्यों गिर रहा है?
यह सवाल आम लोगों के मन में सबसे अधिक है – जब GDP इतनी तेजी से बढ़ रही है, तो रुपया क्यों कमजोर हो रहा है?
इसके कई कारण हैं:
1. डॉलर की मजबूती
डॉलर वैश्विक स्तर पर मजबूत हो रहा है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की कठोर मौद्रिक नीति और ऊंची ब्याज दरों के कारण निवेशक डॉलर में निवेश कर रहे हैं।
2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं,
जिससे रुपये पर दबाव बढ़ता है।
3. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है। जब तेल महंगा होता है,
तो डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये की कमजोरी भी।
4. वैश्विक अनिश्चितता
भूराजनीतिक तनाव, आर्थिक मंदी की आशंका और व्यापारिक अस्थिरता रुपये को प्रभावित कर रहे हैं।
रुपये की गिरावट का आम लोगों पर असर
रुपये का गिरना केवल आर्थिक आंकड़ा नहीं, बल्कि आम जनता की जेब पर सीधा असर डालता है।
1. विदेश यात्रा महंगी होगी
डॉलर मजबूत हुआ तो विदेशों में खर्च बढ़ जाएगा।
2. इलेक्ट्रॉनिक और आयातित सामान महंगे होंगे
मोबाइल, लैपटॉप, कार पार्ट्स, गैजेट्स सबकी कीमत बढ़ सकती है।
3. कच्चे तेल का भार
तेल महंगा होगा, तो पेट्रोल-डीजल का बोझ बढ़ेगा, और इसका असर हर चीज़ की कीमत पर पड़ता है।
4. शिक्षा और चिकित्सा खर्च बढ़ेगा
विदेश में पढ़ाई या इलाज काफी महंगा हो सकता है।
क्या रुपये की गिरावट आगे भी जारी रहेगी?
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि:
- डॉलर की मजबूती
- विदेशी फंड्स की बिकवाली
- कच्चे तेल की कीमतें
- वैश्विक मंदी का खतरा
इन सभी कारणों से रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
कुछ विशेषज्ञों ने तो यहां तक कहा है कि रुपया जल्द ही 90 का स्तर पार कर सकता है।
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सरकार और RBI क्या कर रहे हैं?
भारतीय रिजर्व बैंक रुपये को स्थिर रखने के लिए विनिमय बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है।
यह डॉलर बेचकर रुपये की मांग बढ़ाता है।
सरकार भी विदेशी निवेश बढ़ाने, निर्यात सुधारने और घरेलू उत्पादन को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
लेकिन विश्व अर्थव्यवस्था की अस्थिरता इन प्रयासों के असर को सीमित कर रही है।
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