आधार कार्ड जन्मतिथि प्रमाण के रूप में अस्वीकार करने के फैसले से कई योजनाओं का भविष्य अधर में?
आधार कार्ड आज देश के हर नागरिक की पहचान का सबसे प्रमुख दस्तावेज बन चुका है। बैंक खाता खोलने से लेकर सरकारी योजना लेने तक, हर जगह आधार की मांग होती है। इसीलिए जब हाल ही में यह बड़ा फैसला सामने आया कि अब आधार कार्ड को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा, तो इससे कई कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों में चिंता बढ़ गई है।

राज्य सरकार ने UIDAI (Unique Identification Authority of India) के एक आधिकारिक पत्र का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि –
“आधार केवल पहचान और सत्यापन का दस्तावेज है, यह जन्मतिथि प्रमाणित नहीं करता।”
यह बयान न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि उन करोड़ों लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है
जो विभिन्न सरकारी योजनाओं में अपने उम्र-संबंधी दस्तावेज के रूप में आधार का उपयोग करते रहे हैं।
UIDAI ने क्यों कहा कि आधार जन्मतिथि प्रमाणित नहीं करता?
UIDAI ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि:
- आधार कार्ड की जानकारी 2010–2012 के शुरुआती एनरोलमेंट के समय लोगों द्वारा स्वयं बताई गई थी।
- कई मामलों में उम्र का अंदाजा लगाया गया था।
- कई जगह जन्मतिथि के लिए पर्याप्त दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए थे।
इसलिए आधार में दर्ज जन्मतिथि सरकारी मानकों के अनुसार प्रमाणिक या कानूनी नहीं मानी जा सकती।
UIDAI का यह रुख बताता है कि आधार का उद्देश्य केवल:
- पहचान स्थापित करना,
- बायोमेट्रिक सत्यापन करना,
- और व्यक्ति का यूनिक रिकॉर्ड रखना है।
यह जन्म प्रमाणपत्र या स्कूल रिकॉर्ड जैसे कानूनी दस्तावेजों की जगह नहीं ले सकता।
किन योजनाओं पर इसका असर पड़ सकता है?
यह फैसला उन योजनाओं पर सीधा असर डाल सकता है जिनमें उम्र एक महत्वपूर्ण पात्रता मापदंड है।
जैसे:
- वृद्धावस्था पेंशन
- विधवा पेंशन
- छात्रवृत्ति योजनाएं
- बाल संरक्षण योजनाएं
- खेल योजनाओं में आयु सत्यापन
- मेडिकल और बीमा योजनाएं
- सरकारी नौकरी व भर्ती प्रक्रियाएं
अगर आधार कार्ड आयु प्रमाणित नहीं कर सकता,
तो लाभार्थियों को अब जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल रिकॉर्ड, PAN या अन्य प्रमाण प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी।
लाभार्थियों में बढ़ी चिंता – अब क्या होगा?
देश के कई ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में अभी भी लाखों लोग ऐसे हैं
जिनके पास जन्मतिथि का कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं है।
उनमें से अधिकांश ने आधार एनरोलमेंट के समय उम्र अनुमान से बताई थी।
अब जब आधार को जन्मतिथि प्रमाण के तौर पर अस्वीकार कर दिया गया है,
तो कई लोगों को:
- योजनाओं के लाभ रोक दिए जाने
- आवेदन अस्वीकार होने
- दोबारा दस्तावेज जुटाने
जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
राज्य सरकारों की दुविधा – प्रक्रिया कैसे लागू होगी?
राज्य सरकारों के लिए भी यह फैसला नई चुनौती लेकर आया है।
क्योंकि:
- कई योजनाओं का डेटा आधार से जुड़ा है
- लाभार्थियों की आयु सत्यापन प्रक्रिया जटिल हो जाएगी
- नए दस्तावेज मांगने से विरोध बढ़ सकता है
- ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म प्रमाणपत्र बनवाना आसान नहीं
इसलिए कई राज्यों ने केंद्र से स्पष्ट दिशा-निर्देश मांगे हैं ताकि लाभार्थियों को परेशानी न हो।
क्या आधार की जन्मतिथि गलत है?
ज़रूरी नहीं कि सभी आधार कार्ड में जन्मतिथि गलत हो,
लेकिन UIDAI का कहना है कि उसकी सटीकता की गारंटी नहीं दी जा सकती।
इसलिए इसे “आयु निर्धारण” के लिए मान्य दस्तावेज नहीं माना जा सकता।
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लाभार्थियों को अब क्या करना चाहिए?
सरकार के इस फैसले के बाद, लाभार्थियों को सुझाव दिया जाता है कि:
1. जन्म प्रमाणपत्र बनवाएं
अगर अभी तक नहीं बनवाया है, तो माता-पिता या ग्राम पंचायत से इसकी प्रक्रिया शुरू करें।
2. स्कूल रिकॉर्ड अपडेट करवाएं
पुराने स्कूल दस्तावेज भी कानूनी आयु प्रमाण होते हैं।
3. PAN कार्ड या पासपोर्ट बनवाएं
इन दोनों में सटीक जन्मतिथि आवश्यक होती है।
4. आधार में त्रुटि हों तो अपडेट करवाएं
हालांकि UIDAI जन्मतिथि को सीमित बार बदलने की अनुमति देता है,
लेकिन गलती हो तो सुधार अवश्य करवाएं।
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