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बच्चों के माता-पिता अवश्य सुनें: प्रेमानंद महाराज जी की सीख जो हर घर में बदलाव ला सकती है

आज के समय में माता-पिता बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए हर संभव प्रयास करते हैं – अच्छे स्कूल, अच्छे कपड़े, बेहतर सुविधाएँ, विशेष कोचिंग और आधुनिक जीवनशैली। लेकिन इन सबके बीच कई बार सबसे महत्वपूर्ण बात छूट जाती है – बच्चों का संस्कार, चरित्र और दयालुता की शिक्षा।

प्रेमानंद महाराज जी

प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज जी ने हाल ही में माता-पिता के लिए एक ऐसी बात कही है

जो आज के दौर में हर परिवार के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा –

“बच्चों को ऊँची शिक्षा देना जरूरी है, पर उससे भी ज्यादा जरूरी है उन्हें ऊँचे संस्कार देना।”

यह संदेश इतना सरल है, फिर भी गहरा और जीवन बदलने वाला।


प्रेमानंद महाराज जी क्या कहना चाहते हैं?

प्रेमानंद महाराज जी का मानना है कि:

  • केवल किताबें बच्चों को सफल नहीं बनातीं
  • केवल अंकों से भविष्य नहीं बनता
  • केवल आधुनिक सुविधाओं से जीवन सुखी नहीं होता

बल्कि जीवन में आगे वही लोग बढ़ते हैं जिनके अंदर:

  • विनम्रता
  • दयालुता
  • ईमानदारी
  • अनुशासन
  • और आदर‐भाव

जैसी मानवीय गुण होते हैं।

उनकी दृष्टि में “संस्कार” वह बीज है जो पूरे जीवन को फलदार बनाता है।

अगर बचपन में यह बीज सही ढंग से बो दिया जाए, तो बच्चा जीवन में किसी भी कठिनाई के बावजूद मजबूत और संतुलित बनकर आगे बढ़ता है।


माता-पिता आज कहाँ गलती कर रहे हैं?

आज के माता-पिता अपने बच्चों को हर सुविधा देना चाहते हैं, पर अनजाने में कुछ गलतियाँ कर बैठते हैं, जैसे:

1. बच्चे को हर बात तुरंत मिल जाए

इससे बच्चा धैर्य और कृतज्ञता खो देता है।

2. बच्चों के सामने आपसी झगड़े

बच्चा भावनात्मक रूप से अस्थिर हो जाता है।

3. मोबाइल और टीवी पर निर्भरता

किताबों, खेल और परिवार से दूरी बढ़ती जाती है।

4. सख्त पढ़ाई, लेकिन नैतिक शिक्षा की कमी

बच्चा बुद्धिमान तो बनता है, पर भावनात्मक रूप से कमजोर रहता है।

इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि “बच्चों को घर वह माहौल दें जो उनके मन और आत्मा का विकास करे।


बच्चों को कौन-से संस्कार देने की बात करते हैं महाराज जी?

1. बड़ों का सम्मान

महाराज जी कहते हैं – “जो बच्चा माता-पिता को सम्मान देना सीख जाता है, वह जीवन में कहीं नहीं हारता।

2. सत्य बोलना और गलत से बचना

बचपन में सिखाया गया सत्य और धर्म पूरा जीवन दिशा देता है।

3. नम्रता और कृतज्ञता

महाराज जी कहते हैं – “जो बच्चा धन्यवाद कहना सीख जाए, वह कभी अभिमानी नहीं बनता।

4. अपने डर, अपनी गलतियों को स्वीकारना

बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि गलती होना बुरा नहीं, गलती को छुपाना बुरा है।

5. धार्मिक या आध्यात्मिक जुड़ाव

इसका मतलब यह नहीं कि बच्चे को साधु-संत बनाना है, बल्कि उसे यह समझाना है कि जीवन सिर्फ भौतिक नहीं, भावनाओं और मूल्यों से भी चलता है।


माता-पिता कैसे बच्चों में अच्छे संस्कार डाल सकते हैं?

1. अपनी आदतों से

बच्चा वही सीखता है जो माता-पिता करते हैं, न कि जो वे कहते हैं।

2. समय देकर

आज के माता-पिता बच्चों को चीजें दे देते हैं, लेकिन समय देना भूल जाते हैं।

3. प्रशंसा और अनुशासन का संतुलन

न ज्यादा ढील, न ज्यादा रोक – संतुलित परवरिश ही श्रेष्ठ है।

4. धैर्य और सकारात्मक माहौल

घर का वातावरण ही बच्चे का मानसिक आधार बनता है।

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प्रेमानंद महाराज जी की यह बात हर परिवार को सुननी चाहिए

प्रेमानंद महाराज जी की सीख हमें याद दिलाती है कि बच्चों का भविष्य केवल स्कूल नहीं बनाता – घर बनाता है।

उनकी सोच, उनकी भाषा, उनका स्वभाव, उनका आत्मविश्वास – सब घर से बनता है।

अगर माता-पिता प्रेम, धैर्य, अनुशासन और संस्कार का वातावरण देंगे, तो बच्चे न केवल सफल होंगे बल्कि अच्छे इंसान भी बनेंगे।

यह संदेश हर परिवार, हर माता-पिता और हर बच्चे के लिए जीवन बदलने वाली सीख है।

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