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नया लेबर कोड: कंपनियों को मिले वे अधिकार जिनकी सबसे अधिक चर्चा

भारत सरकार द्वारा लागू किए गए नया लेबर कोड को देश की रोजगार व्यवस्था में सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है। जहाँ एक ओर कर्मचारी नए नियमों को लेकर उम्मीदें और सवाल रखते हैं, वहीं दूसरी ओर कंपनियों को इस लेबर कोड में कई ऐसे अधिकार मिले हैं जिनकी खूब चर्चा हो रही है।

नया लेबर कोड

सरकार का कहना है कि नए कोड का उद्देश्य “Ease of Doing Business” और “Ease of Hiring” दोनों को बढ़ावा देना है।

यानी कंपनियों को अधिक स्वतंत्रता मिले, ताकि निवेश बढ़े और रोजगार के अवसर भी बनें।


1. कर्मचारियों को ‘हायर और फायर’ करने में आसानी

नया लेबर कोड में कंपनियों को सबसे बड़ा अधिकार यह दिया गया है कि अब 300 कर्मचारियों तक वाली कंपनियाँ बिना सरकारी अनुमति के कर्मचारियों को नियुक्त या निष्कासित कर सकती हैं।

पहले यह सीमा 100 कर्मचारियों की थी।


इस बदलाव से:

  • कंपनियों में निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी
  • बाजार की जरूरतों के अनुसार workforce को बढ़ाया या घटाया जा सकेगा
  • उत्पादन आधारित उद्योगों को अधिक लचीलापन मिलेगा

यही कारण है कि इस प्रावधान की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है।


2. फ्लेक्सिबल वर्किंग आवर्स का अधिकार

नए लेबर कोड में कार्य घंटों से जुड़ा बड़ा बदलाव यह है कि कंपनियाँ कर्मचारियों की ड्यूटी 12 घंटे प्रति दिन तक शेड्यूल कर सकती हैं,

लेकिन कुल 48 घंटे सप्ताह का नियम लागू रहेगा।

इसका मतलब:

  • कंपनी 4 दिन की वर्किंग भी लागू कर सकती है
  • या 6 दिन की, लेकिन सप्ताहिक समय सीमा एक जैसी रहेगी

यह प्रावधान कंपनियों को उत्पादन समय प्रबंधन में अधिक लचीलापन देता है।


3. कॉन्ट्रैक्ट और गिग वर्कर्स को शामिल करने की स्वतंत्रता

नया लेबर कोड कंपनियों को यह अधिकार देता है कि वे अपनी जरूरत के अनुसार कॉन्ट्रैक्ट, फिक्स्ड-टर्म और गिग वर्कर्स को बड़े पैमाने पर नियुक्त कर सकें।

इससे:

  • स्टार्टअप्स
  • ई-कॉमर्स कंपनियाँ
  • लॉजिस्टिक्स
  • डिजिटल सर्विस सेक्टर

को ज्यादा लाभ मिलेगा।

अब कंपनियाँ स्थायी कर्मचारियों के बजाय प्रोजेक्ट आधारित कर्मचारी रख सकेंगी।


4. ओवरटाइम के नियमों में कंपनियों को सरलता

पहले ओवरटाइम के लिए कई स्तरों पर कागजी प्रक्रियाएँ और सरकारी मंजूरी आवश्यक होती थी।

अब नए कोड में:

  • ओवरटाइम की सीमा बढ़ाई गई है
  • प्रक्रिया सरल की गई है
  • कंपनियाँ मांग के अनुसार workforce से अतिरिक्त काम ले सकेंगी
  • भुगतान की शर्तें स्पष्ट की गई हैं

यह बदलाव उत्पादन आधारित उद्योगों के लिए काफी लाभदायक माना जा रहा है।


5. ‘एक देश – एक वेतन परिभाषा’ से कंपनियों को राहत

नए लेबर कोड में वेतन (Wage) की परिभाषा को एकसमान किया गया है।

इससे:

  • PF
  • बोनस
  • ग्रेच्युटी
  • और अन्य सुविधाओं की गणना सरल हो जाएगी

पहले अलग-अलग राज्यों और सेक्टरों में वेतन की परिभाषा अलग थी, जिससे कंपनियों को जटिलताओं का सामना करना पड़ता था।


6. बंद फैक्ट्रियों और यूनिट्स को पुनः खोलने में आसानी

नए कोड में यह भी प्रावधान है कि किसी यूनिट को बंद करने या खोलने के नियमों को सरल किया गया है।

अब कंपनियों को:

  • कम कागजी कार्य
  • कम निरीक्षण
  • अधिक स्वतंत्रता

मिलेगी।

यह विदेशी निवेश और औद्योगिक विस्तार को बढ़ावा देगा।

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7. अनुपालन में डिजिटलाइजेशन

सरकार ने अनुपालन प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर कंपनियों को यह अधिकार दिया है कि:

  • ऑनलाइन फाइलिंग
  • डिजिटल रजिस्टर
  • निरीक्षण का पारदर्शी सिस्टम

से संचालन आसान हो।

यह उद्योगों के प्रशासनिक बोझ को बहुत कम करेगा।

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