Learn to Value Yourself: जब आप खुद को महत्व देंगे, दुनिया अपने आप बदल जाएगी
हम में से ज़्यादातर लोग जीवन में एक ही गलती बार-बार दोहराते हैं – हम खुद को सबसे आख़िर में रखते हैं। हम दूसरों की जरूरतें, उनकी राय, उनकी खुशी और उनकी अपेक्षाओं को अपने ऊपर प्राथमिकता दे देते हैं। नतीजा यह होता है कि धीरे-धीरे हमारा आत्मसम्मान कमजोर होने लगता है, और हम खुद से ही दूर हो जाते हैं।

Learn to Value Yourself: आइए, जीवन के कुछ सरल लेकिन गहरे सिद्धांतों को समझते हैं, जिन्हें अपनाकर आप खुद के लिए खड़े होना सीख सकते हैं।
1. किसी को कॉल करें तो सिर्फ एक बार – फिर इंतज़ार करें
बार-बार कॉल करना, मैसेज भेजना या जवाब की उम्मीद में बेचैन होना यह दिखाता है कि आप खुद को कम और सामने वाले को ज़्यादा महत्व दे रहे हैं।
अगर आपने एक बार कॉल किया है और सामने वाला उपलब्ध नहीं है, तो उसे आपको वापस कॉल करने दें।
यह आदत आपको दो बातें सिखाती है:
- धैर्य
- आत्मसम्मान
जो लोग आपको महत्व देते हैं, वे समय निकालकर ज़रूर जवाब देंगे।
2. बिना मांगे सलाह देना बंद करें
दुनिया पहले से ही “एक्सपर्ट्स” से भरी हुई है।
हर किसी को यह लगता है कि उसे सब कुछ पता है, और वही सही है। ऐसे में बार-बार सलाह देना न सिर्फ आपकी ऊर्जा खर्च करता है, बल्कि कई बार रिश्तों में दूरी भी पैदा करता है।
याद रखें – जब तक कोई आपसे सलाह न मांगे, तब तक चुप रहना भी एक समझदारी है।
3. बेवजह बोलना कम करें
हर बात का जवाब देना ज़रूरी नहीं होता।
हर बहस जीतना आपकी जिम्मेदारी नहीं है।
कभी-कभी “हम्म” या “ठीक है” कहना ही सबसे समझदारी भरा जवाब होता है।
कम बोलने से:
- आपकी बातों की कीमत बढ़ती है
- लोग आपको हल्के में लेना बंद करते हैं
- आप मानसिक रूप से शांत रहते हैं
4. हर बार ‘हाँ’ कहना बंद करें, ‘ना’ कहना सीखें
अगर आप हर किसी की मांग पर ‘हाँ’ कहते रहेंगे, तो एक दिन आप खुद से ‘ना’ कहने लगेंगे।
लोग आपकी भलमनसाहत को आदत बना लेते हैं, और जब आप मना करते हैं तो वही लोग आपको गलत ठहराने लगते हैं।
‘ना’ कहना:
- असभ्यता नहीं है
- स्वार्थ नहीं है
- यह आत्म-सम्मान की पहचान है
सीमाएँ बनाना सीखिए, वरना लोग आपको बिना पूछे इस्तेमाल करते रहेंगे।
5. जो मन करे, वही करें – हर किसी की मत सुनना ज़रूरी नहीं
हर किसी की राय सुनना आपको भ्रमित कर देगा।
हर इंसान आपको अपनी समझ, अपने डर और अपनी सीमाओं के हिसाब से सलाह देगा।
लेकिन आपकी ज़िंदगी:
- आपके अनुभवों से बनी है
- आपके सपनों से जुड़ी है
- आपकी लड़ाइयों से गुजरकर आई है
इसलिए फैसला भी आपका होना चाहिए।
सलाह सुनिए, लेकिन फैसला अपने विवेक से लीजिए।
6. अच्छाई की सराहना करना न भूलें
जब कोई कुछ अच्छा करे, उसकी तारीफ कीजिए।
दुनिया में आलोचक बहुत हैं, सराहना करने वाले कम।
तारीफ करने से:
- सामने वाले का मनोबल बढ़ता है
- रिश्तों में गर्माहट आती है
- और सबसे ज़रूरी—आपका दिल बड़ा होता है
और हाँ, अगर किसी ने आपको कुछ सिखाया है, तो उसे धन्यवाद कहना कभी न भूलें।
हम सब ईश्वर की संतान हैं
इसका अर्थ यह नहीं कि हम सब एक जैसे हैं, बल्कि इसका मतलब यह है कि हर इंसान की अपनी गरिमा और मूल्य है।
आप भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितना कोई और।
खुद को कम आंकना ईश्वर की रचना को कम आंकने जैसा है।
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Learn to Value Yourself: जानना काफी नहीं, अपनाना ज़रूरी है
हो सकता है आप इनमें से कई बातें पहले से जानते हों।
लेकिन असली बदलाव तब आता है, जब आप उन्हें अपने व्यवहार में उतारते हैं।
- अगली बार खुद को प्राथमिकता दीजिए
- अगली बार चुप रहना चुनिए
- अगली बार ‘ना’ कहने का साहस कीजिए
यही छोटे-छोटे कदम धीरे-धीरे आपको एक मजबूत इंसान बनाएंगे।
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