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Haryana CM son Aniket CET exam: मुख्यमंत्री का बेटा, लेकिन लक्ष्य सरकारी नौकरी

हरियाणा की राजनीति में एक दिलचस्प और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। राज्य के मुख्यमंत्री के बेटे अनीकेत ने भी आम युवाओं की तरह सरकारी नौकरी के लिए आवेदन किया और कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) की पूरी तैयारी की। यह खबर सामने आते ही सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई।

आमतौर पर यह माना जाता है कि बड़े राजनीतिक परिवारों के बच्चों के पास कई विकल्प होते हैं, लेकिन अनीकेत का यह कदम इस धारणा को चुनौती देता है। उन्होंने साबित किया कि मेहनत और प्रतियोगिता का रास्ता सभी के लिए समान है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री के बेटे अनिकेत ने सीईटी परीक्षा दी

Haryana CM son Aniket CET exam: CET परीक्षा क्यों है महत्वपूर्ण?

अनुराग अग्रवाल, पंचूकला। हरियाणा में तृतीय श्रेणी की नौकरियों के लिए हुई सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी) की गंभीरता और महत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बेटे अनिकेत सैनी ने भी इस परीक्षा के लिए आवेदन फार्म भरा था।

हरियाणा में सरकारी नौकरियों के लिए CET परीक्षा को एक अहम चरण माना जाता है। यह परीक्षा हजारों युवाओं के लिए सरकारी सेवा में प्रवेश का मुख्य माध्यम है। ऐसे में मुख्यमंत्री के बेटे का भी उसी प्रक्रिया से गुजरना यह दर्शाता है कि प्रतियोगी परीक्षाएं सभी के लिए समान हैं।

सूत्रों के अनुसार, अनीकेत ने नियमित रूप से पढ़ाई की, कोचिंग ली और मॉक टेस्ट देकर खुद को तैयार किया। उन्होंने किसी विशेष सुविधा का लाभ लेने की कोशिश नहीं की, बल्कि अन्य अभ्यर्थियों की तरह ही तैयारी की।


तैयारी में दिखाई गंभीरता

Haryana CM son Aniket CET exam:बताया जा रहा है कि अनीकेत ने अपने दिन का बड़ा हिस्सा पढ़ाई को समर्पित किया। सामान्य ज्ञान, गणित, रीजनिंग और हरियाणा से जुड़े विषयों पर उन्होंने विशेष ध्यान दिया। परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा को लेकर पूरी गंभीरता दिखाई और अनुशासन का पालन किया।

यह कदम उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो अक्सर सोचते हैं कि राजनीति से जुड़े परिवारों को अलग सुविधाएं मिलती हैं।


सामाजिक और राजनीतिक संदेश

अनीकेत का सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करना एक बड़ा सामाजिक संदेश भी देता है।

यह दर्शाता है कि आज के युवा, चाहे वे किसी भी पृष्ठभूमि से हों, अपनी पहचान खुद बनाना चाहते हैं। सरकारी नौकरी की तैयारी करना मेहनत, धैर्य और समर्पण की मांग करता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पारदर्शिता और समान अवसर की भावना को मजबूत करता है।

इससे यह संदेश जाता है कि प्रतियोगी परीक्षाएं निष्पक्ष हैं

और हर उम्मीदवार को समान अवसर मिलता है।


युवाओं में उत्साह

इस खबर के बाद कई युवाओं ने सोशल मीडिया पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।

कुछ ने इसे प्रेरणादायक बताया, तो कुछ ने कहा कि इससे सरकारी परीक्षाओं में भरोसा बढ़ेगा।

युवाओं का मानना है कि जब एक मुख्यमंत्री का बेटा भी उसी परीक्षा में बैठ सकता है,

तो यह व्यवस्था की निष्पक्षता को दर्शाता है।

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परिवार की प्रतिक्रिया

परिवार के करीबी सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने भी अपने बेटे को मेहनत करने की सलाह दी

और उसे स्वतंत्र रूप से अपना करियर चुनने की छूट दी।

यह एक सकारात्मक संकेत है कि राजनीतिक परिवारों में भी नई सोच विकसित हो रही है।

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