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अडानी ने क्यों कहा कि वर्तमान AI भारतीय पहचान के लिए जोखिम है और बताए 5 बड़े समाधान

दुनिया तेजी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की ओर बढ़ रही है। AI हमारे जीवन, काम और संस्कृति को जिस गति से प्रभावित कर रहा है, वह अभूतपूर्व है।
इसी बदलते परिदृश्य पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए भारत के प्रमुख उद्योगपति गौतम अडानी ने कहा है कि “वर्तमान स्वरूप में AI भारतीय सांस्कृतिक पहचान, भाषा और मानव स्वतंत्रता के लिए खतरा बन सकता है।”

AI भारतीय पहचान के लिए खतरा

अडानी का कहना है कि AI का विकास जितना तेज है, उतना ही कम नियंत्रण में है।

बिना रणनीति और सुरक्षा के यह तकनीक भारत जैसे विविधतापूर्ण देश की सांस्कृतिक संरचना को कमजोर कर सकती है।


AI कैसे भारतीय पहचान को प्रभावित कर सकता है?

गौतम अडानी ने कुछ प्रमुख जोखिमों की ओर इशारा किया:

1. भाषा और सांस्कृतिक विविधता पर खतरा

AI मॉडल मुख्यतः अंग्रेज़ी या पश्चिमी डेटा पर आधारित होते हैं।

इससे भारतीय भाषाओं, लोक ज्ञान और सांस्कृतिक संदर्भों का गलत प्रस्तुतिकरण हो सकता है।

अडानी के अनुसार यह “डिजिटल औपनिवेशिकता” का रूप भी ले सकता है।

2. गलत जानकारी और पूर्वाग्रह

AI यदि प्रशिक्षित डेटा में मौजूद पूर्वाग्रह को आगे बढ़ाए तो यह समाज में भ्रम,

विभाजन या गलत धारणाएँ पैदा कर सकता है।

3. रोजगार और आर्थिक असमानता

तेजी से ऑटोमेशन कुछ समुदायों में रोजगार संकट पैदा कर सकता है,

जिससे सामाजिक असमानता और गहरी हो सकती है।

4. डेटा पर विदेशी कंपनियों का नियंत्रण

अडानी मानते हैं कि “डेटा ही भविष्य का तेल है।
यदि विदेशी तकनीकी कंपनियाँ भारतीय डेटा को नियंत्रित करती हैं तो इससे
राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यक्तिगत गोपनीयता पर बड़ा जोखिम बढ़ सकता है।

5. मानव निर्णय क्षमता का कमजोर होना

AI पर अत्यधिक निर्भरता मानव विवेक, रचनात्मकता और स्वायत्तता को कम कर सकती है।

यह समाज को “निर्भर उपभोक्ता” में बदल सकता है।


इन खतरों से बचने के लिए गौतम अडानी ने सुझाए 5 बड़े समाधान

अडानी सिर्फ खतरा नहीं बताते, बल्कि भारत को AI में आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने के लिए पाँच मजबूत उपाय भी सुझाते हैं:


1. भारतीय भाषाओं और संस्कृति आधारित AI मॉडल तैयार करना

अडानी ने सुझाव दिया कि भारत को अपनी भाषाओं, पौराणिक ग्रंथों, लोक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित
स्वदेशी AI मॉडल बनाने होंगे।

इससे भारतीय पहचान और भाषा संरक्षित रहेगी।


2. डेटा का राष्ट्रीय संरक्षण और नियमों को मजबूत करना

AI कंपनियों, खासकर विदेशी संस्थानों द्वारा उपयोग किए जाने वाले भारतीय डेटा पर कड़े नियम लागू किए जाएं।

डेटा स्टोरेज, ट्रांसफर और उपयोग में पारदर्शिता अनिवार्य हो।

भारत को अपने “डिजिटल संप्रभुता” की रक्षा करनी चाहिए।


3. AI शिक्षा और कौशल विकास का विस्तार

समाज के हर वर्ग को AI के उपयोग, नैतिकता और जोखिमों की सही समझ देना आवश्यक है।

अडानी कहते हैं – “AI का ज्ञान सिर्फ वैज्ञानिकों के पास न रहे, बल्कि आम नागरिक तक पहुंचे।”

इससे रोजगार खोने का डर कम होगा और नए अवसर पैदा होंगे।


4. AI के नैतिक उपयोग के लिए कड़े नियम बनाना

AI का दुरुपयोग रोकने के लिए भारत को नैतिकता, पारदर्शिता और जिम्मेदारी आधारित AI नीति बनानी होगी।

इसमें deepfake, गलत सूचना, डेटा चोरी और algorithmic bias को रोकने की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।


5. भारत की टेक कंपनियों को AI इनोवेशन में प्रोत्साहन

अडानी ने कहा कि भारत को AI क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्राप्त करने के लिए स्टार्टअप्स, शोध संस्थानों और उद्योग जगत को मजबूत आर्थिक सहायता देनी चाहिए।

उनके अनुसार – “AI भविष्य की अर्थव्यवस्था का केंद्र है। भारत को इसका निर्माता बनना चाहिए, सिर्फ उपभोक्ता नहीं।”

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अडानी की चेतावनी सिर्फ उद्योग जगत के लिए नहीं, पूरे देश के लिए है

गौतम अडानी का संदेश स्पष्ट है – AI अवसर भी है, और खतरा भी।

लेकिन यदि भारत इसके लिए सही रणनीति बनाए,

तो AI न केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करेगा बल्कि भारत को तकनीकी महाशक्ति भी बना सकता है।

यह समय सावधानी और दूरदर्शिता का है – और अडानी की पाँच बातें भारत को इस दिशा में मजबूत बनाती हैं।

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